Home » इंडिया » Catch Hindi: Will changed Narendra Modi get opposition's support?
 

नरेंद्र मोदी के नये अवतार से हो सकेगा लटके हुए विधेयकों का उद्धार?

पाणिनि आनंद | Updated on: 28 November 2015, 21:50 IST
QUICK PILL
  • भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के शीतकालीन सत्र में बदले नजर आए. उन्होंने पहली बार जवाहरलाल नेहरू और दूसरे विपक्षी नेताओं की खुलकर तारीफ की.
  • नरेंद्र मोदी के बदले हुए रवैये को संसद में लंबित पड़े विधयेकों पर विपक्ष का सहयोग पाने की दिशा में की गई पहल माना जा रहा है. उन्होंने मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी से चाय पर चर्चा भी की.

साल 2015 की सर्दियां पिछले सालों से काफ़ी अलग हैं. अपने डेढ़ साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल में पहली बार नरेंद्र मोदी संसद में नरम मिजाज में नज़र आए.

पिछले साल आम चुनावों में मिले प्रचंड बहुमत से सरकार में बहुत ज्यादा आत्मविश्वास था. विपक्ष इतना कमजोर था कि संसद में वो लगभग बेअसर लग रहा था. अब लग रहा है कि मोदी सरकार का 'हनीमून पीरियड' ख़त्म हो गया है.

महज एक साल में पूरा परिदृश्य बदला नजर आ रहा है. दिल्ली और बिहार में भाजपा को करारी हार मिली. वो संसद के पिछले दो सत्रों में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में नाकामयाब रही. इन विफलताओं का असर नरेंद्र मोदी पर दिखायी देने लगा है.

बुधवार को शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्यादा संसदीय नज़र आए. उनकी आवाज़ में नरमी और मधुरता आयी है. पहले उनके लहजे में अहमन्यता और रूखापन होता था. अब उनके शब्दकोश में 'समावेश' और 'सहयोग' जैसे शब्द जगह पा चुके हैं.

ऐसा लग रहा है कि लोकसभा चुनावों मिली जीत का हैंगओवर 18 महीने बाद उतरा है. भारतीय संविधान के निर्माता बीआर आंबेडकर की 125वीं जंयती के अवसर पर संसद में संविधान और उसके मूल्यों को समर्पित दो दिवसीय विशेष चर्चा सत्र रखा गया था.

इस बहस के आखिर में नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया. भाषण में उन्होंने विपक्षी दलों के प्रति गर्मजोशी भरा दोस्ताना व्यवहार दिखाया

25 नंवबर को संसद के विशेष सत्र से एक दिन पहले उन्होंने सदन में बैठकर विपक्ष को पूरे इत्मीनान से सुना. उनकी इस कवायद को संसद, ख़ासकर राज्यसभा में लंबित पड़े विधेयकों को पारित कराने की कोशिश के लिए उठाए गए कदम के रूप में देखा गया. याद रहे, राज्य सभा में बीजेपी गठबंधन अल्पमत में है.

मोदी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से संवाद किया. उनका रवैया सकारात्मक रहा. फिर उन्होंने विपक्ष से कहा कि राष्ट्रहित में जीएसटी विधेयक पारित कराना जरूरी है.

संसद के मानसून सत्र में जिस तरह का गतिरोध हुआ था उसे देखते हुए संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने भी सभी दलों से इस पर सहयोग की अपील की.

नरेंद्र मोदी और उनकी टीम के इस यू-टर्न से बीजेपी के अंदर भी कई नेता चकित हैं. बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की मौजूदगी भी लोगों को हैरानी में डाल रही है.

इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था. मोदी को पता है कि बिहार में मिली हार के बाद पार्टी के अंदर उभरे असंतोष को दूर करने का यही एक तरीका है.

मोदी को शायद इस बात का एहसास हो गया है कि इन वरिष्ठ नेताओं के राजनीतिक और संसदीय अनुभव का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है

गुरुवार को मोदी ने संसद में मीडिया से कहा, "मैंने विपक्ष के नेताओं से बात की है. सकारात्मक माहौल में रचनात्मक बातचीत हुई. सभी लोग इस बात पर सहमत थे सदन व्यवस्थित रूप से चलना चाहिए."

उन्होंने कहा, "संवाद के लिए संसद से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती. वाद, विवाद और संवाद संसद की आत्मा हैं. दूसरी चीज़ों के लिए देश में बहुत जगह है. इन मुद्दों पर विपक्ष के सकारात्मक रवैये से मैं ख़ुश हूं. हम सब लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे."

वेंकैया नायडू ने कहा, " देश को सहयोग की राजनीति की जरूरत है न कि टकराव की. जनता कानून निर्माताओं पर नजर बनाए हुए है. वो नकारात्मकता को स्वीकार नहीं करने वाली."

चर्चा के दोनों दिन मोदी सदन में मौजूद रहे. ये नरेंद्र मोदी का नया रूप था. पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार का प्रतिनिधि चेहरा लगभग गायब रहा था.

नरेंद्र मोदी संसद में सबसे कम उपस्थित रहने वाले नेताओं में एक हैं. पिछले साल उनके मंत्रियों को उनकी गैर-मौजूदगी की सफाई देनी पड़ती थी. विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को यह कहकर घेरता रहा है कि प्रधानमंत्री को संसद में आकर जवाब देना चाहिए.

विशेष चर्चा सत्र के दोनों दिन वो जितने खुशदिल और उदार नज़र आए उससे विपक्ष के साथ-साथ अपनी पार्टी के लोग भी हैरान हुए

बीजेपी के कई नेताओं ने विपक्ष की आलोचना की लेकिन जब शुक्रवार शाम मोदी के बोलने की बारी आयी तो उन्होंने विपक्ष के वर्तमान और पूर्व सांसदों की खुलकर तारीफ की.

मोदी ने जवाहरलाल नेहरू के योगदान की तारीफ की. उन्होंने कहा कि बहुमत का ये मतलब नहीं है कि आप जनता पर कुछ भी थोप सकते हैं.

उन्होंने सदन में कहा कि वो शायद देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिसने लाल किले से दिए गए अपने भाषण में आज़ादी के बाद से अब तक हुए सभी प्रधानमंत्रियों की तारीफ की है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बगैर उन्होंने उनके राजनीतिक हस्तक्षेपों की तारीफ की. उन्होंने ये भी माना कि अपने भाषण में आंबेडकर का जो वक्तव्य उन्होंने प्रयोग किया उसे गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रयोग किया था. 

इससे पहले मोदी ने सदन में कभी अपने विदेश दौरों के बारे में बात नहीं की थी. इन दो दिनों में उन्होंने इन दौरों में हुई प्रगति की जानकारी दी. आखिरकार, उन्होंने अपन पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री के नक्शेकदम पर चलते हुए विपक्षी नेताओं को चाय का निमंत्रण दिया. 

विशेष चर्चा सत्र की समाप्ति पर प्रधानमंत्री ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को अपने आवास पर शाम की चाय का निमंत्रण दिया

दोनों नेता उनके आवास पर उनसे मिले और शीतकालीन सत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की. वित्त मंत्री अरुण जेटली और शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू भी चाय पर हुई इस चर्चा में मौजूद थे.

चर्चा के बाद जेटली ने पत्रकारों से कहा, "हमने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की. खासकर संसद में पिछले सत्र से लंबित पड़े विधयेकों पर. नायडू विपक्षी नेताओं से सम्पर्क में रहेंगे."

उन्होंने कहा, "जीएसटी विधेयक पर कांग्रेस नेताओं ने तीन बिंदु उठाए हैं. हमने इन पर उनसे बात की. वो अपनी पार्टी से उनपर बात करेंगे. कुछ समय बाद हम फिर से उनपर चर्चा करेंगे."

ये सारे बदलाव अचानक और अकारण नहीं हैं. इनसे साफ है कि मोदी अपनी रणनीति बदल रहे हैं ताकि वो लंबित विधेयकों को पारित करा सकें

उनकी इस रणनीति में एक बड़ी मुश्किल ये है कि विपक्ष सिर्फ प्रधानमंत्री के नरम रवैए के कारण उनकी बात नहीं मानने वाला.

अगले छह महीनों में पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. विपक्ष अपनी संसदीय रणनीति बनाते वक्त इस बात को ध्यान में रखेगा. जैसा कि जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "हम पीएम और उनकी रणनीतियों को समझते हैं. हम उनके जाल में नहीं फंसने वाले."

First published: 28 November 2015, 21:50 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

पिछली कहानी
अगली कहानी