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गोवा: चुनावी साल मे संघ-भाजपा के टकराव ने पैदा किया हार का संकट

आकाश बिष्ट | Updated on: 17 September 2016, 8:08 IST

गोवा में विधानसभा चुनाव होने में फिलहाल लगभग साल भर का समय बाकी है और सत्तासीन भाजपा सरकार ‘आरएसएस समस्या’ से जूझ रही है. इससे पार्टी के इस तटीय प्रदेश में दोबारा सत्ता में आने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं.

आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की प्रदेश इकाई ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संघ और सरकार के बीच इस बात पर ठन गई है कि शिक्षा का माध्यम (एमओआई) क्षेत्रीय भाषा हो और अंग्रेजी स्कूलों को दी जाने वाली सहायता बंद कर दी जाए.

प्रदेश में आम आदमी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता पहले ही भाजपा के लिए मुसीबत बनी हुई है. उस पर, गोवा के पूर्व संघ प्रमुख सुभाष वेलिंगकर ने संघ की स्थानीय इकाई के समर्थन  के बल पर एमओआई मुद्दे पर सरकार से सीधी टक्कर ले ली है.

आरएसएस को गोआ में स्थापित करने वाले वेलिंगकर को अनुशासनहीनता के आरोप में 31 अगस्त को संघ की सेवाओं से मुक्त कर दिया गया था. वेलिंगकर प्रदेश के स्कूलों में एमओआई लागू करने का वादा न निभाने के लिए भाजपा का विरोध करने हेतु नई पार्टी के गठन का ऐलान कर चुके थे. इसी के चलते वेलिंगकर के समर्थक संघ के कोंकण प्रांत को छोड़ कर गोवा प्रांत बनाने चले थे, जिसे मानने से नागपुर ने इनकार कर दिया. तभी से वेलिंगकर भाजपा के खिलाफ एक मिशन पर जुट गए हैं.

वेलिंगकर प्रदेश में सभाएं आयोजित कर लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराएं

वेलिंगकर अब प्रदेश भर में भारी भरकम सभाएं आयोजित कर लोगों से आग्रह कर रहे हैं कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराएं. गत 11 नवम्बर को बैम्बोलिन में आयोजित ऐसी ही एक सभा में आरएसएस के 2000 स्वयंसेवकों की उपस्थिति में वेलिंगकर ने भाजपा की तुलना हिरण्यकश्यप् से कर दी और कहा अब समय आ गया है कि इस ‘राक्षस’ का अंत कर दिया जाए.

दूसरी ओर, भाजपा भी पीछे हटने के मूड में दिखाई नहीं दे रही और पूछ रही है सरकार के फैसलों पर निर्देश देने वाला आरएसएस कौन होता है. भाजपा विधायक माइकल लोबो ने कहा एमओआई पर निर्णय करने का काम आरएसएस का नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘यह शिक्षा विभाग का निर्णय है. क्या आरएसएस तय करेगा मेरे बच्चों के लिए बेहतर क्या है? जनता को हमारे फैसलों पर निर्णय करने दीजिए कि हमने जो किया है, वह सही है या नहीं.’

परन्तु लोबो ने इस बात पर सहमति जताई कि इन बागियों के चलते विधानसभा चुनावों में भाजपा पर विपरीत असर पड़ने की संभावना है और इसके मतों का प्रतिशत गिर सकता है. और तो और, भारतीय भाषा सुरक्षा मंच (बीबीएसएम) को राजनीतिक दल में बदलने और चुनाव लड़ने का वेलिंगकर का निर्णय भगवा पार्टी के लिए बड़ी चिंता का विषय हो सकता है.

आरएसएस के बागी गुट द्वारा समर्थित बीबीएसएम को अन्य क्षेत्रीय दलों का भी समर्थन प्राप्त है और वेलिंगकर के विचारों का समर्थन कर रही शिवसेना भी इसके साथ है. संघ के समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा के पक्ष में और प्रचार न करने से गोवा धीरे-धीरे भाजपा के हाथ से फिसलता नजर आ रहा है.

वरिष्ठ आरएसएस नेता कृष्णराज सुकेरकर ने दोहराया कि इस विवाद के चलते भाजपा को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं

वेलिंगकर द्वारा 2011 में गठित बीबीएसएम का उद्देश्य पूर्ववर्ती दिगम्बर कामत नीत कांग्रेस सरकार पर हमला करना था.  पार्टी कांग्रेस को 130 अंग्रेजी स्कूलों को दी जाने वाली सहायता और एमओआई पर निशाना बना रही थी. 2012 में वेलिंगकर और बीबीएसएम की भाजपा को सत्ता में लाने में अहम भूमिका थी.

वरिष्ठ आरएसएस नेता और उत्तरी गोवा प्रमुख कृष्णराज सुकेरकर ने दोहराया कि इस विवाद के चलते भाजपा को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, क्योंकि अब उसे समर्पित आरएसएस कार्यकर्ताओं का और साथ नहीं मिलने वाला जो घर-घर जाकर भगवा पार्टी के लिए समर्थन जुटाते हैं.

सुकेरकर कहते हैं सार्वजनिक रूप भाजपा का विरोध करने की बजाय केवल घर बैठने मात्र से भी आरएसएस कार्यकर्ता पार्टी को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं.

सुकेरकर ने भाजपा की तुलना कांग्रेस से करते हुए कहा, कि वह भी तुष्टिकरण की राजनीति के पथ पर चल पड़ी है, जिसमें कांग्रेस को महारत हासिल है. उन्होंने कहा, ‘ज्यादातर इंग्लिश मीडियम स्कूल आर्काडायोसेज बोर्ड ऑफ एजुकेशन द्वारा संचालित है और इन स्कूलों को आर्थिक सहायता रोकने का मतलब है सरकार अपने कैथलिक वोटों की संख्या कम कर रही है. वे ऐसा नहीं करना चाहते भले ही इससे हिन्दू नाराज हो जाएं.’

उन्होंने कहा, अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के चलते भाजपा बहुसंख्यकों के बड़े हितों की अनदेखी कर रही है. हिन्दुओं को लग रहा है कि भाजपा सरकार केवल अपसंख्यकों के लिए कार्य कर रही है.

भाजपा की चिंताओं को और बढ़ाते हुए नवनियुक्त संघ प्रमुख  प्रमुख लक्ष्मण बेहरे ने भी एक तरह से वेलिंगकर की ही बात दोहराई कि वे राज्य सरकार को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश करेंगे कि वह स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा को प्रोत्साहित करे.

भाजपा आप के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है. विधायक लोबो ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के संगठन को कमतर समझना भूल होगी

भाजपा नेताओं का मानना है कि एमओआई मुद्दे को दरकिनार कर वह स्वयं को गोवा में स्वीकार्य पार्टी के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है, जो कि देश के अन्य भागों के बजाय बहुसांस्कृतिक प्रदेश है. परन्तु इसके राजनीतिक कारण भी हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में बहुत सारे कैथोलिकों ने भाजपा को वोट दिया था और पहली बार भाजपा के पांच कैथोलिक उम्मीदवार भारी अंतर से जीते थे.

यही कारण है कि पहले मनोहर पार्रिकर और फिर उनकेे उत्तराधिकारी लक्ष्मीकांत पर्सेकर ने वेलिंगकर की बातें अनसुनी कर दीं. इस बीच, आरएसएस के बागी नेताओं ने कहा, हालांकि मामला एमओआई का है लेकिन नागपुर आरएसएस के गोवा इकाई के प्रति सौतेले रवैये की भी अनदेखी नहीं की जा सकती.

सुकेरकर ने कहा, नागपुर में बैठे वरिष्ठ प्रचारकों को मनगढ़न्त कहानियां सुनाई जाती हैं. इसीलिए वे वेलिंगकर और प्रदेश संघ इकाई के खिलाफ कड़े कदम उठा रहे हैं और सार्वजनिक रूप से बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, 'वेलिंगकर को कम नहीं आंका जा सकता. साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर आरोप लगाया कि वे पिछले दरवाजे से राजनीति कर रहे हैं और इसीका नतीजा है कि वेलिंगकर को अपने पद से हाथ धोना पड़ा.'

इस बीच, कांग्रेस और आप, भाजपा व संघ की इस लड़ाई को दूर से देख रही हैं और इस विवाद से दूरी बनाए हुए हैं. भाजपा और उसके वैचारिक पैतृक संगठन आरएसएस के बीच इस लड़ाई ने गोवा के आगामी विधानसभा चुनाव मुकाबले को रोचक बना दिया है. अन्यथा यूपी और पंजाब जैसे बड़े राज्यों के चुनाव के मुकाबले यहां के चुनावों पर लोगों का ध्यान नहीं जाता, इन राज्यों में भी साथ-साथ चुनाव होने हैैं.

गोवा में आप पार्टी के बढ़ते प्रभाव ने भी चुनावों को दिलचस्प बना दिया है. अब यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. चुनाव पूर्व रायशुमारी में लहर आपके पक्ष में दिखाई दे रही है. कौटिल्य तीर्थ डेटा एनालिटिक्स अनुसार, आप 14 सीट केे साथ इस मुकाबले में सबसे आगे चल रही है. उसके बाद क्रमशः भाजपा, कांग्रेस और महाराष्ट्रवादी गोमान्तक पार्टी का नम्बर आता है.

भाजपा भी आप के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है. विधायक लोबो ने कैच से कहा कि अरविंद केजरीवाल के संगठन को कमतर समझना मूर्खता होगी. उन्होंने कहा, 'आपको निश्चित रूप से फायदा हुआ है, जहां-जहां कांग्रेस की वजह से खालीपन आया, आप ने फायदा उठाया है. जिन इलाकों में कांग्रेस मजबूत थी, वहां आप अपना आधार तलाश रही है.'

हालांकि हर कोई लोबो से सहमत नहीं है. निर्दलीय विधायक विजय सरदेसाई ने आप को दिल्ली की एक क्षेत्रीय पार्टी कह कर खारिज कर दिया और कहा गोवा को क्षेत्रीय दलों की जरूरत नहीं है क्योंकि यहां पहले से ही इनकी भरमार है. ‘अरविंद केजरीवाल मोहल्ला क्लिनिकों की बात करते हैं जबकि लोग दिल्ली में मर रहे हैं. वे गरीबों की बात करते हैं लेकिन उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि गोवा के लोग गरीब नहीं हैं. यहां कोई आम आदमी नहीं है. अगर कहीं ऐसा कुछ है तो वह हालिया विवादों और दिल्ली में आई कुछ सीडी के कारण हुआ है,' वे कहते हैं.

आप इन सब बातों से पूर्णतः असहमत है और इसके गोवा संयोजक वाल्मिकी नाइक ने कहा, 'उनकी सभाएं जन समर्थन का प्रमाण हैं और वे इसका आनंद उठा रहे हैं.' साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नतीजे घोषित होते ही सबको पता चल जाएगा कि आप कितनी सक्षम है.

नाइक ने भाजपा-संघ की लड़ाई पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, यह उनका अंदरूनी मामला है लेकिन यह जरूर कहा कि यह इस बात का सबूत है कि भाजपा ने न केवल लोगों को अपने से दूर कर दिया है बल्कि संघ के कार्यकर्ताओं को भी. कोई नहीं चाहता कि भाजपा सत्ता में लौटे. लोग कुशासन से त्रस्त हैं और परिवर्तन चाहते हैं.’

एमओआई पर बात करने से बचते हुए नाइक ने कहा, 'स्थानीय लोगोें से बात करने से ही उन्हें इसका सही समाधान मिल सकेगा.' ‘हम गोवावासियों से बात कर रहे हैं कि उनका इस बारे में क्या नजरिया है, उस पर विचार किया जाएगा. अभी हमारा घोषणा पत्र जारी नहीं हुआ है और एक बार यह जारी  हो जाए तो आप इस पर हमारा रवैया जान जाएंगे.'

इस बीच, राजनेता इस बात पर एकमत हैं कि भाजपा-संघ की इस लड़ाई का फायदा एमजीपी को हो रहा है, जिसे निष्कासित वेलिंगकर का समर्थन प्राप्त है. 1961 में पुर्तगाल से आजादी पाने के बाद एमजीपी गोवा पर राज करने वाली पहली पार्टी रही है. लेकिन उसके बाद इसके वोटों और लोकप्रियता में तीव्र गिरावट देखी गई.

एमजीपी फिलहाल अपने तीन विधायकों के साथ भाजपा सरकार का ही एक हिस्सा है और इसके एक विख्यात नेता सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री रामकृष्ण धावालिकर ने कैच को कहा, 'हम भाजपा के साथ ही अगला चुनाव लड़ेंगे.' परन्तु साथ ही उन्होंने कहा  कि उनकी पार्टी एमओआई मुद्दे पर वेलिंगकर के साथ है. इससे यह संभावनाएं बनती हैं कि चुनावों की घोषणा होने के बाद पार्टी अपना मन बदल सकती है.

उन्होंने कहा, हम स्थानीय भाषा का समर्थन करते हैं, चाहे यह हिन्दी हो, कोंकणी या मराठी. इस मामले पर 15 प्रतिशत से ज्यादा वोटर वेलिंगकर के साथ हैं. इसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ेगा. इस बीच, कांग्रेस का कोई प्रादेशिक नेता टिप्पणी के लिए मौजूद नहीं था. यहां तक कि प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह ने कई बार किए गए फोन कॉल्स का जवाब नहीं दिया.

First published: 17 September 2016, 8:08 IST
 
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