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पंजाबः पिछड़ती आप को उबारने के लिए केजरीवाल की 11 रैलियां

राजीव खन्ना | Updated on: 21 November 2016, 7:39 IST
QUICK PILL
  • आम आदमी पार्टी की पंजाब यूनिट में चल रही उठा-पटक के बाद पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल अब ख़ुद मैदान में उतर गए हैं. 
  • उनका फोकस राज्य का मालवा इलाक़ा है जहां अभी भी पार्टी का जनाधार है और विधानसभा में आधे विधायक इसी क्षेत्र से चुनकर आते हैं. 

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब में पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए खुद ही मैदान में कूद पड़े हैं. अगले 11 दिनों तक केजरीवाल पंजाब में 21 जगहों पर रैलियां कर जनता को संबोधित करेंगे. अभी तक पार्टी नदी जल बंटवारे और कई अन्य ज़रूरी मुद्दों पर जनता को लुभाने में पहले ही विफल रही है. इसलिए अरविंद के लिए पार्टी की चुनाव मशीनरी को फिर से उसी जगह पर लाना बड़ी चुनौती है, जहां यह चार महीने पहले थी.

मालवा में मज़बूत

केजरीवाल राज्य के मालवा क्षेत्र पर फोकस करेंगे क्योंकि पार्टी का आधार अब भी वहां मजबूत है और इसके नेता भगवंत मान यहां अच्छी खासी भीड़ जुटाने में सक्षम हैं. ऐसी भी खबरें हैं कि आप पार्टी मान को जलालाबाद सीट से उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के सामने मैदान में उतारेगी. जलालाबाद को बादल का मजबूत गढ़ माना जाता है.

पंजाब की राजनीति में मालवा एक तरह से काफी अहम क्षेत्र है. विधानसभा में आधे विधायक यहीं से चुन कर आते हैं. आप के इस इलाके में दस्तक देने से पहले यह कांग्रेस और अकालियों का गढ़ माना जाता रहा है. यहां कुछ जगहों पर वाम दलों के भी समर्थक मिल जाएंगे.

किसान आत्महत्या के मामले इसी इलाक़े में सबसे अधिक हुए हैं. खेतों से जुड़ी समस्याएं भी इस क्षेत्र में सर्वाधिक हैं. कपास की फसल पर पेस्टिसाइड्स के बेजा इस्तेमाल का घोटाला हुआ. ड्रग माफिया के अलावा और भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. आप ने इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द पिछले लोकसभा चुनाव में प्रचार की रणनीति अपनाई थी. आगामी विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ड्रग्स के मुद्दे को ही चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा बनाएगी.

क्यों घटी लोकप्रियता?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है पिछले चार महीनों में आम आदमी पार्टी का ग्राफ गिरने के कई कारण हैं. इनमें से एक यह है कि पार्टी प्रचार के अपने ही पथ से भटक गई है, जिसमें उसे अच्छे नतीजे मिल रहे थे. कुछ महीनों पहले तक आप ने नकली पेस्टिसाइड्स, नकली बीजों और किसान आत्महत्या जैसे स्थानीय सवालों को चुनावी मुद्दा बनाया था लेकिन अब पार्टी अपने प्रतिद्वंदी दलों बीजेपी-शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के प्रचार अभियान को देखते हुए अपने प्रचार का रूख बदल रही है. 

पार्टी अब पारम्परिक भावनात्मक मुद्दों का राजनीतिकरण कर रही है, जबकि ये दल अपने मुद्दों पर कायम हैं. इन मुद्दों पर आप का रूख भी स्पष्ट नहीं है. ये मुद्दे कुछ भी हो सकते हैं, जैसे पार्टी के युवा प्रकोष्ठ के घोषणा पत्र पर आप पार्टी का प्रतीक हमरिंदर साहेब की फोटो के साथ छपने पर काफी विवाद हो गया था. ऐसा ही कुछ सतलुज-यमुना लिंक नहर के मामले में हुआ.

आप की लोकप्रियता घटने का एक और कारण पार्टी द्वारा पार्टी के प्रदेष इकाई संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर को हटाया जाना है. सुच्चा सिंह लोकसभा चुनाव के बाद आप पार्टी में शामिल हुए थे. छोटेपुर ने क्षेत्रीय नेता के रूप में राजनीतिक करियर शुरू किया था और आज वे पूरे पंजाब के नेता के रूप में जाने जाते हैं. आप से हटाए जाने के बाद उन्होंने अपना पंजाब पार्टी का गठन किया. इससे आम आदमी पार्टी को थोड़ा नुकसान तो होगा ही, खास तौर पर माझा में जो कि छोटेपुर का गृहनगर है.

अपना पंजाब पार्टी के प्रवक्ता कर्नल (रिटा.) जे.एस गिल ने कहा, केजरीवाल की ज्यादातर रैलियां धान मंडियों में होगी, जहां किसान ही ज्यादा से ज्यादा संख्या में मौजूद रहेंगे. इस बार आप देखेंगे इन रैलियों में आप के वॉलिएंटर बहुत कम दिखेंगे. हर रैली में बार-बार लोगों का एक ही समूह केजरीवाल को सुनते नजर आएगा. हम भी उनका स्वागत करते हुए उन्हें पोस्टर देंगे, जिस पर लिखा होगा, 'उनकी यहां जरूरत नहीं है और वे ईमानदार राजनेता नहीं है.' 

गिल ने कहा, 'किसानों को इस बात का एहसास है कि सतलज यमुना लिंक पर केजरीवाल ने कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाया है. उन्हें यह भी दिखाई दे रहा है कि वे पंजाब का प्रचार अभियान, पंजाब से बाहर के ही अपने लोगों से करवा रहे हैं.' आप की गिरती लोकप्रियता का एक और कारण पिछले कुछ महीनों में इसके नेताओं में उपजा अति आत्म विश्वास है. 

पर्यवेक्षकों और मीडिया के आकलन पर लोगों का कहना है, 'आप नेता अभी से ही ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे कि सत्ता में आ गए हों. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आप का प्रचार अभियान मई-जून में ही परवान चढ़ चुका है और कांग्रेस अब अपने परम्परागत वोट बैंक की ओर बढ़ रही है और अगले माह के मध्य तक इसका प्रचार अभियान चरम पर पहंचने की उम्मीद है.

केजरीवाल से वापसी की उम्मीद

टिकट बंटवारे के बाद पार्टी में भीतर ही भीतर मची खींचतान को भांपते हुए आप नेतृत्व को एक बार फिर अपनी रणनीति पर सोचने पर मजबूर कर दिया है. केजरीवाल के दौरे से कार्यकर्ताओं में उत्साह की उम्मीद जगती है. खास तौर पर तब जब पार्टी के पिछले दो कार्यक्रम फेल हो चुके हों. एक तो गत माह धान खरीद पर आप का अनाज बाजारों में आयोजित विरोध प्रदर्शन और दूसरा, पटियाला के कपूरी गांव में सतलुज-यमुना मुद्दे पर अनिश्चित कालीन धरना.

यह कयास भी लगाया जा रहा है कि केजरीवाल प्रदेश के दलित बहुल दाओबा क्षेत्र में आयोजित रैली में पार्टी अपना दलित घोषणा पत्र जारी कर दें. कार्यकर्ता इस कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन का अवसर बना सकते हैं. पार्टी दलितों के बीच आधार बनाने में कामयाब रही है. राज्य की पूरी आबादी का 32 प्रतिशत हिस्सा दलित आबादी है.                                                   

आप के प्रदेश संयोजक गुरप्रीत सिंह वराइच ने कहा, 'केजरीवाल की इन रैलियों का उद्देश्य जनता को भाजपा-शिरोमणि अकाली दल सरकार की जन विरोधी नीतियों के बारे में बताना और कांग्रेस ने जनता के साथ जो धोखा किया, उससे जनता को सतर्क करना है.' उन्होंने कहा आप कार्यकर्ताओं में जोश है और वे एक बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हैं.

विपक्षी का पलटवार

इस बीच आप के मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंदी कांग्रेस और अकाली केजरीवाल को घेरने की तैयारी में हैं. अकाली दल ने तो पहले ही गेंद उनके पाले में छोड़ दी है. एक स्थानीय अदालत ने केजरीवाल और वरिष्ठ नेता संजय सिंह व आशीष खेतान के खिलाफ आपराधिक अवमाना के एक मामले में आरोप तय कर दिए हैं. पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने यह मामला दर्ज करवाया था.

मजीठिया ने कहा, 'केजरीवाल और उनका बाहरी गैंग पंजाब और पंजाबी युवाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए 'पाप' पार्टी को पंजाब का प्रतिनिधित्व करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. इसके नेताओं को अपना बोरिया बिस्तर बांधकर वापस दिल्ली चले जाना चाहिए या पूर्वी उत्तर प्रदेश चले जाएं. पंजाबियों को उनके हाल पर छोड़ दें, वे अपना भविष्य खुद संवार लेंगे.

उधर, कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह रोजाना केजरीवाल पर कोई न कोई बयानबाजी करते रहते हैं. कपूरी में आप पार्टी के फ्लॉप धरने पर उन्होंने कहा, इससे पता चलता है जनता का आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक से मोह भंग हो गया है.

एसवाईएल नहर पर केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, पंजाब की जनता चाहती है कि इस संकट की घड़ी में आप उनके साथ हो कि नहीं. अगर आप राज्य में सरकार बनाने का सपना देख रहे हैं तो पंजाब की जनता के प्रति जिम्मेदारियों की तरफ से आंख नहीं मूंद सकते.

First published: 21 November 2016, 7:39 IST
 
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