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तो क्या माओवादी और पुलिस सोरी को तिरंगा फहराने से रोक पाएंगे?

राजकुमार सोनी | Updated on: 24 July 2016, 8:16 IST

माओवादी मानते हैं कि देश को अभी पूरी तरह से आजादी नहीं मिली, इसलिए वे बस्तर के उन गांवों में तिरंगा नहीं फहराने देते हैं जहां उनकी धमक है. दूसरी तरफ पुलिस है जो आदिवासी कार्यकर्ता सोनी सोरी को हार्डकोर माओवादी मानती है इन दोनों के विपरीत धारणाओं के बीच सोनी सोरी इस स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले तिरंगा लेकर यात्रा निकालने जा रही है. उसी बस्तर इलाके में जहां सरकार की भी अक्सर नहीं चलती.

बस्तर में पुलिस अफसर शिवराम कल्लूरी की नियुक्ति के बाद कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही इसे लेकर दो अतिवादी विचारों में बंटी एक बहस चल रही है. सोरी की यह यात्रा इस मायने में महत्वपूर्ण है कि यह शायद दोनों बहस के काले-सफेद अध्यायों के बीच मौजूद धूसर हिस्सों को खोज सकेगी.

क्या माओवादी सोरी को तिरंगा फहराने देंगे या पुलिस आदिवासी ग्रामीणों को भड़काने और उकसाने के आरोप में उनकी यात्रा पर प्रतिबंध लगाएंगी?

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अब तक माओवादी पुलिस के शहीद जवानों की प्रतिमाओं पर प्रहार करते रहे हैं और पुलिस लाल सलाम वाले स्मारकों पर हथौड़ा चलाती रही है. सोरी अपनी यात्रा के दौरान संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर और आदिवासी क्रांतिकारी बिरसामुंडा की प्रतिमा भी स्थापित करने जा रही है. ऐसे में माओवादियों और पुलिस का जवाब क्या होगा इसे लेकर हलचल मची हुई है.

सोनी सोरी वहीं आदिवासी नेत्री हैं जिन पर माओवादी होने के आरोप में पुलिस ने छह प्रकरण दर्ज किए थे और जेल में उनके गुप्तांग में पत्थर डालने सहित ऐसी वीभत्स और शर्मनाक यातनाएं दी थी कि इसे लेकर देश-दुनिया में काफी हल्ला मचा था.

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पुलिस तमाम तरह की कवायदों के बाद भी यह साबित नहीं कर पाई कि सोरी माओवादी है या माओवादी गतिविधियों में लिप्त है. बहरहाल अदालत ने सोरी को पांच मामलों में बरी कर दिया है. एक प्रकरण पर अभी फैसला आना शेष है.

यात्रा में शामिल होंगे कई दिग्गज

सोरी की तिरंगा यात्रा जो नौ अगस्त से निकलने वाली है उसे बस्तर क्रांति का नाम दिया गया है. इस यात्रा में शामिल होने के लिए रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला, मोहम्मद अखलाक की पत्नी इकरामन, जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है.

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इसके अलावा उनकी इस यात्रा में छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के नंद कश्यप, आलोक शुक्ला, पीयूसीएल की छत्तीसगढ़ ईकाई के अध्यक्ष लाखन सिंह, आम आदमी पार्टी के संयोजक संकेत ठाकुर, सीपीआई रेड स्टार के सौरा यादव, लिंगा कोडोपी, दंतेवाड़ा पत्रकार समिति के कमल शुक्ल, प्रभात सिंह, रायगढ़ महिला मंच की रिनचिन, बस्तर लीगल एड की ईशा खंडेलवाल, शालिनी गेरा और जनमुक्ति मोर्चा के हजारों कार्यकर्ताओं शामिल होंगे.

तिरंगा फहराया तो मौत के घाट उतार देंगे

वर्ष 2007 में जब सोरी दंतेवाड़ा जिले के कुआकोन्डा इलाके से 30 किलोमीटर दूर एक गांव जबेली के आश्रम में अधीक्षिका थी तब माओवादियों ने उन्हें यह कहते हुए धमकाया था कि यदि 15 अगस्त को आश्रम में तिरंगा फहराया तो उन्हें मौत के घाट उतार देंगे.

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सोनी धमकी देने वाले का नाम तो नहीं जानती लेकिन तब उन्होंने कहा था, 'जब चंद्रशेखर आजाद विदेशी झंडे के खिलाफ तिरंगा फहरा सकते हैं तो फिर मैं क्यों नहीं फहरा सकती?' सोनी का जवाब सुनकर माओवादी फिर दोबारा गांव में नहीं आए और धीरे-धीरे यह बात प्रचारित हो गई कि माओवादी सोनी सोरी की बात मानते हैं. यह प्रचार पुलिस तक पहुंचा तो उसने सोरी को मुखबिर बनने का न्यौता दिया. जब सोरी ने इन्कार किया तो उन्हें हार्डकोर माओवादी ठहरा दिया गया.

गोमपाड़ में फहराया जाएगा तिरंगा

सोरी की यात्रा दंतेवाड़ा से निकलेगी लेकिन 15 अगस्त को उस गोमपाड़ में तिरंगा फहराया जाएगा जहां पिछले दिनों सुरक्षाबलों ने मडकम हिड़मे नाम की एक आदिवासी युवती को माओवादी बताकर मौत के घाट उतार दिया था.

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सोरी कहती है, 'यह यात्रा इसलिए भी है क्योंकि गोमपाड़ और उसके आसपास के डेढ़ सौ गांवों के ग्रामीणों से पुलिस ने उनका राशनकार्ड और जीने का अन्य बुनियादी अधिकार छीन लिया है. दंतेवाड़ा से गोमपाड़ तक ग्रामीण मर-मरकर जी रहे हैं. देश और दुनिया को यह तो मालूम होना ही चाहिए कि बस्तर में पुलिस माओवाद के खात्मे के नाम पर कैसा गंदा खेल खेल रही है.

First published: 24 July 2016, 8:16 IST
 
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