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यूपी में डूब चुकी कांग्रेस का तारणहार बनेंगी प्रियंका गांधी?

आकाश बिष्ट | Updated on: 17 March 2016, 8:50 IST
QUICK PILL
  • चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर आगामी यूपी विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की कमान संभालेंगे. खबरों के अनुसार उन्होंने प्रियंका गांधी को यूपी के सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करने का सुझाव दिया है.
  • किशोर के सुझाव की खबर के बाद राज्य के कांग्रेसी नेता भी जोरशोर से इस मांग को उठाने लगे हैं. हालांकि विपक्षी नेता प्रियंका के आने से यूपी कांग्रेस की स्थिति में किसी बड़े परिवर्तन की संभावना से इनकार करते हैं.

13 मार्च को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने लखनऊ दौरे में कहा कि अगर प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में आती हैं तो इससे पार्टी को बड़ा लाभ होगा. उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस के हर ज़मीनी कार्यकर्ता की यही इच्छा है. यहां तक की यूपी कांग्रेस के नेता भी लगभग हाथ जोड़े इसकी मांग कर रहे हैं.

नौ मार्च को यूपी कांग्रेस के नेताओं ने एक यज्ञ किया ताकि सोनिया गांधी प्रियंका को सक्रिय राजनीति में आने दें. इस यज्ञ में 'प्रियंका लाओ देश बचाओ. देश में राहुल, प्रदेश में प्रियंका' के मंत्र पढ़े गए.

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जब से ये खबर आयी है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने यूपी में अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव में प्रियंका को राज्य के सीएम के रूप में पेश करने की राय दी है, तब से राज्य में प्रियंका को लाने की मांग ज्यादा जोर पकड़ने लगी है.

प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को इस बात का पूरा भरोसा है कि प्रियंका के आने से कांग्रेस के चुनावी कार्यक्रमों में लोगों को जुटाने में मदद मिलेगी. लेकिन ये लोग वोट देंगे या नहीं इसको लेकर इन नेताओं में अनिश्चितता की स्थिति है.

खबरों के अनुसार प्रशांत भूषण ने यूपी में प्रियंका को सीएम के उम्मीदवार के रूप में उतारने का सुझाव दिया है

लखनऊ स्थित वरिष्ठ पत्रकार गोविंद पंत राजू कहते हैं, "वो अच्छी दिखती हैं, अच्छा बोलती हैं जिससे कुछ नौजवान वोटर आकर्षित हो सकते हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी ने केंद्र और राज्य में ऐसा कुछ नहीं हासिल किया है जिसे लेकर वो जनता के बीच जा सके. उनके पास ज़मीनी कार्यकर्ता भी नहीं हैं."

राजू कहते हैं, "आप दाल में नमक मिलाकर उसे स्वादिष्ट बना सकते हैं लेकिन आपके पास दाल ही न हो तो नमक बेकार है."

अगर कांग्रेस प्रियंका को यूपी के संभावित सीएम के रूप में पेश करेगी तो भी उसके लिए मुकाबला काफी कठिन होगा. गांधी परिवार के प्रभाव वाले कुछ विधान सभाओं के छोड़कर शेष प्रदेश में पार्टी की हालत बहुत खराब है.

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कांग्रेस परिवार के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भी पार्टी की हालत खराब ही होती जा रही है. साल 2012 में हुए विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को अमेठी और रायबरेली की कुल 10 विधान सभा सीटों में से महज दो पर जीत मिली थी.

कैच ने इस मुद्दे पर कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं से बात की. सभी नेताओं ने प्रियंका पर केवल मुखौटा होने के आरोप से इनकार किया. उनका मानना है कि प्रियंका संगठन में नई जान फूंक सकती हैं. उनके आने से ज़मीनी कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बहुत बढ़ेगा.

नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, "प्रियंका का यूपी की कमान संभालने का निर्णय परिवार को लेना है. वो सभी जातियों, वर्गों और आयु के लोगों में अपील रखती हैं. अगर वो इसे स्वीकार करती हैं तो उसका फर्क सभी को दिख जाएगा."

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कांग्रेसी नेता जो भी सोचें विपक्षी दलों के नेताओं का मानना है प्रियंका को 'प्रत्याशी बनाने या सक्रिय भूमिका में उतारने' की बात केवल चुनावी पैंतरा है. चुनावी नतीजों से जिसकी हवा निकल जाएगी.

लखनऊ के मेयर और बीजेपी नेता डॉक्टर दिनेश शर्मा कहते हैं, "कांग्रेस पार्टी यूपी में इतिहास बन चुकी है. ये उनका आखिरी चुनाव हो सकता है. 2014 के आम चुनाव में वो प्रदेश में केवल दो सीटें जीत सके थे. पार्टी का ढांचा बुरी तरह चरमरा चुका है जिसे आखिरकार गिरना ही है."

यूपी के नेता चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के 'महिमामंडन' को भी अतिरेक मान रहे हैं

राज्य में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी भी प्रियंका को उतारने की बात से ज्यादा प्रभावित नजर नहीं आ रही है. सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, "यूपी के लोग इतने भोले नहीं है कि जितना ये दोनों पार्टियां समझती हैं. चुनाव ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के समग्र प्रयास से जीता जाता है, न कि किसी मास्टर रणनीतिकार से."

राज्य की राजनीतिक पार्टियां चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के 'महिमामंडन' को भी अतिरेक मान रही हैं. उनका मानना है कि जिन दो पार्टियों के चुनाव से प्रशांत किशोर जुड़े रहे उनका ज़मीनी पर ठोस आधार था. जबकि कांग्रेस का यूपी में ज़मीनी आधार वैसा नहीं है.

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चौधरी कहते हैं, "कोई बाहरी रणनीतिकार कांग्रेस की मदद नहीं कर सकता. केवल रणनीति से चुनाव नहीं जीता जाता, उसके लिए व्यापक जनाधार चाहिए. जो कांग्रेस के पास नहीं है."

चौधरी नहीं मानते कि सपा को एंटी-इनकम्बेंसी का शिकार होना पड़ेगा. उनका मानना है कि राज्य के लोग अखिलेश यादव सरकार के कामकाज से बहुत खुश हैं.

जो बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी को आम चुनावों में मिली जीत के बाद प्रशांत किशोर से अभिभूत नजर आते थे अब वो भी उनपर सवाल उठा रहे हैं. इन नेताओं के अनुसार प्रशांत किशोर एक बाहरी आदमी हैं जिसे यूपी की राजनीति की कोई समझ नहीं है. 

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दिनेश शर्मा कहते हैं, "अगर पीआर या मार्केटिंग कंपनियां चुनाव जिता सकतीं तो टाटा, बिरला और अंबानी सरकार में अहम पदों पर होते. कांग्रेस इन एजेंटों के सहारे चुनाव जीतना चाहती है. लेकिन यूपी चुनाव में ये बुलबुला फूट जाएगा."

प्रियंका यूपी सीएम पद की उम्मीदवार बनेंगे या नहीं ये लाख टके का सवाल है. लेकिन दिल्ली के कुछ बीजेपी नेताओं को लगता है कि उनके पास पहले से ही ऐसी नेता है जो प्रियंका के करिश्मे का मुकाबला कर सकती हैं. क्या वो नेता स्मृति ईरानी हैं?

अगर ऐसा होता है तो कोई हैरत की बात नहीं होगी क्योंकि ईरानी को यूपी के सीएम उम्मीदवार के रूप में उतारने की मांग बीजेपी के अंदरखाने उठनी शरू हो चुकी है.

First published: 17 March 2016, 8:50 IST
 
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