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क्या सर्जिकल स्ट्राइक भारत के वास्तविक मकसद को पूरा करेगा?

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 October 2016, 16:17 IST

उरी पर हमला करने वाले ‘नॉन-स्टेट’ एक्टर्स थे. घुसपैठिए थे, जिन्हें पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े एक भारत विरोधी हिस्से का छिपकर समर्थन हासिल था. नियंत्रण रेखा के पार ‘आतंकियों के लॉन्च पैड’ पर सशस्त्र हमला, पहले की तरह छुपाने की बात नहीं रही. अब इसे खुल कर प्रचारित किया जा रहा है.

भारत ने दुनिया के सामने साफ कहा कि भारत की सशस्त्र सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक किए हैं. इससे तुरंत दोनों देशों, दोनों सरकारों और उनकी सेनाओं के बीच राजनीतिक और सैन्य दांवपेंच आजमाने की शुरुआत हो गई. भारत की तरफ से यह कुछ लोगों के लिए संतोषप्रद रहा, तो दूसरों के लिए काफी परेशानी वाला. क्या अब बारत भविष्य में इसी तरह के कदम किसी भी आतंकी हमले की सूरत में उठाएगा?

भारतीय हमलों का राजनीतिक-रणनीतिक मकसद यह मैसेज देना था कि पाकिस्तान की ओर से भविष्य में होने वाले हमलों का जवाब वह इसी तरह देगा. इसलिए पाकिस्तान भविष्य में घुसपैठियों से ऐसे हमले नहीं होने दे. दूसरे शब्दों  में भारत ने साफ कर दिया कि हमलावर नॉन स्टेट ऐक्टर हों या स्टेट एक्टर अगर वह पाकिस्तान की तरफ से हमला करता है तो यह पाकिस्तान की जिम्मेदारी होगी.

इस तरह का मैसेज केवल सांकेतिक नहीं होने चाहिए, बल्कि यह प्रभावी हथियार होना चाहिए. पाक का राजनीतिक और सैन्य संस्थान ऐसे हमलों पर नियंत्रण करें और खुद के हित में इसे रोके, अन्यथा, जैसा कि दावा किया, और बता भी दिया, कि यदि भविष्य में जब भी आवश्यकता हुई, भारत सरकार जवाबी सैन्य कार्रवाई करेगी.

हालांकि भारत के विपरीत, पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था ज्यादा विभाजित है और सेना का भी ऐसे तत्वों पर पूरा अधिकार नहीं है जिस तरह भारत की असैनिक सरकार को पड़ोसी के खिलाफ सशस्त्र कदम उठाने का अधिकार है.

न तो पाक सेना और ना ही इस्लामाबाद सरकार की असैन्य विंग उन इस्लामी गुटों को पूरा तरह से नियंत्रित या रोक सकती है, जो पाकिस्तान में अपने खुद के लोगों पर आतंकी हमले करते हैं.

इससे खुद पाकिस्तान का भारी नुकसान हुआ है. इसलिए ऐसा मानना या उम्मीद करना कि पाक सरकार विभिन्न इस्लामिक गुटों को नियंत्रण रेखा के पार भारत की धरती पर हमला करने से नियंत्रित करेगी, या उन पर रोक लगाएगी, भ्रम है.

इसका अर्थ यह हुआ कि घुसपैठियों की इन गतिविधियों पर सैनिक-राजनीतिक स्तर पर न तो पाकिस्तान का पूरा नियंत्रण है और ना ही भारत उन्हें दृढ़तापूर्वक रोक सका है, जिसके पास बेजोड़ सामरिक ताकत है.

यदि सामरिक-राजनीतिक विवेक यह है कि बिना युद्ध के भारत-पाक संबंधों को सुधारने की एक व्यवस्थिति गाइडलाइंस होनी चाहिए, तो प्रश्न उठना लाजिमी है कि भारत के वर्तमान व्यवहार ने कितना विवेक दिखाया है.

First published: 1 October 2016, 16:17 IST
 
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