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क्या सर्जिकल स्ट्राइक का चुनावी फ़ायदा मिलेगा भाजपा को? जानकारों की राय बंटी है

चारू कार्तिकेय | Updated on: 2 October 2016, 7:13 IST
QUICK PILL
  • उरी हमले के जवाब में हुई सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई को भाजपा ने उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है.
  • मगर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पैनी नज़र रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों की राय में भाजपा इसका फ़ायदा नहीं उठा पाएगी.

उरी हमले के जवाब में एनडीए सरकार पाकिस्तान पर हमला कर सकती है, इसकी एक खास वजह को लेकर पिछले कई हफ्तों से दिल्ली के राजनीतिक हलकों में चर्चा थी. अटकलें थीं कि अगर सरकार पाकिस्तान के ऊपर किसी भी तरह के हमले को सफलतापूर्वक अंजाम देती है तो भाजपा, उत्तरप्रदेश सहित सभी जगहों पर जनता को अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब रहेगी.

इसका फायदा भाजपा को राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में मिलेगा. अब जब नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक हो चुकी है, और उसका जश्न भी मनाया जा रहा है तब यह पूछने-समझने का सही समय है कि क्या इससे यूपी के मतदाताओं पर कोई असर पड़ा है?

उरी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ जनता के गुस्से को देखते हुए ही सरकार ने गर्व से सर्जिकल स्ट्राइक की घोषणा की और समूचे विपक्ष ने इसका एक सुर में स्वागत किया. जाहिर है, सभी पार्टियों का मानना है कि इस मुद्दे का सभी जगह के औसत मतदाताओं पर असर पड़ेगा. तो क्या इसका यूपी के चुनावों पर भी असर पड़ेगा? अगर हां, तो कितना? कैच ने राजनीतिक विश्लेषकों से बात की, जो काफी समय से यूपी की राजनीति में उतार-चढ़ाव देख रहे थे.

प्रोफ़ेसर बद्री नारायण

जीबी पंत समाज विज्ञान संस्थान, इलाहाबाद के प्रो बद्री नारायण का मानना है कि भाजपा को निश्चित रूप से राजनीतिक लाभ होगा, पर ज्यादा दिनों तक नहीं. नारायण ने कहा कि फिलहाल युद्ध का उन्माद हावी है, पर यह कितना टिकाऊ होगा, कहना मुश्किल है. उन्होंने आगे कहा कि इसे लेकर मध्यम वर्ग उत्साहित है, पर युद्ध की मानसिकता का असर दलित जैसी हाशिए पर पड़ी जातियों पर ज्यादा नहीं होगा. उन्होंने चुनाव होने तक मतदाताओं में भावुकता बनी रहने की आशंका जताई.

प्रमोद कुमार

राजनीतिक विश्लेषक प्रो. प्रमोद कुमार भी बद्री नारायण से सहमत थे. उन्होंने भी युद्ध के उन्माद का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर इस समय चुनाव होते हैं, तो भाजपा को काफी फायदा होगा. उनकी दिलचस्प बात यह थी कि भाजपा को यह लाभ मतदाताओं के सभी वर्गों से होगा क्योंकि युद्ध का उन्माद सभी को प्रभावित करता है. लंबे समय से लोग इस तरह के एक्शन का इंतजार कर रहे थे और आख़िरकार यह हो गया, वे खुश हैं. फिर भी चुनाव अभी दूर हैं और चूंकि जनता की याददाश्त आमतौर पर कमजोर होती है, मुझे संदेह है कि यह भावुकता उस समय तक बनी रहेगी.

रामदत्त त्रिपाठी

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी ने इस तरह के अनुमानों को अपरिपक्व बताकर खारिज किया. उन्होंने कहा कि सरकार और सेना के स्ट्राइक्स को लेकर दावे अभी परखने बाकी हैं और इसके अभाव में यह सचाई से ज्यादा प्रचार नजर आता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ग्राफ गिर रहा था, इसलिए हो सकता है कि उसे दुरुस्त करने के लिए प्रचार कैंपेन शुरू किया गया हो. इस तरह के स्ट्राइक पहले भी हुए हैं, लेकिन उन्हें कभी प्रचारित नहीं किया गया.

उन्होंने अपनी बात जारी रखी कि इन दावों के एक बार खरे उतरने पर पता नहीं कौन-से तथ्य उभर कर आएं और कौन कह सकता है कि उन तथ्यों से भाजपा का फायदा होगा या नुकसान. वे अन्य विश्लेषकों की इस बात से भी सहमत थे कि चुनाव अभी छह महीने दूर हैं और किसी के ग्राफ को उठाने या गिराने के लिए यह समय काफी होता है.

भाजपा भुनाने में जुटी

भाजपा नेताओं ने पूरे देश में, खासकर यूपी में, सर्जिकल स्ट्राइक्स से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं. यूपी में पार्टी प्रमुख केशव प्रसाद मौर्य ने यह नारा दिया है- ‘56 इंच का सीना है, सर उठाके जीना है’. उनका कहना है कि भारतीय सेना ने पाक को उसी की भाषा में सबक सिखाया है. हालांकि यह कहानी अभी जारी रहेगी क्योंकि भारत और पूरा विश्व पाकिस्तान के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रहा है.

First published: 2 October 2016, 7:13 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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