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नोटबंदी के 50 दिन पर विपक्ष का सवालः क्या मोदी जी इस्तीफा देंगे?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 28 December 2016, 8:21 IST
QUICK PILL
  • कांग्रेस की पहल पर 27 दिसम्बर को नई दिल्ली में हुई विपक्ष की ज्वाइंट प्रेस कांफ्रेंस में बहुत से प्रमुख विपक्षी दल मौजूद नहीं थे.
  • हालांकि वहां मौजूद सभी ने एक सुर में कहा कि वे विरोध जारी रखेंगे. प्रेस कांफ्रेंस में आठ विपक्षी दल एक साथ थे और सभी ने नोटबंदी को सरकार का विफल कदम और घोटाला करार दिया.

कांग्रेस की पहल पर 27 दिसम्बर को नई दिल्ली में हुई विपक्ष की ज्वाइंट प्रेस कांफ्रेंस में बहुत से प्रमुख विपक्षी दल मौजूद नहीं थे. मगर वहां जो भी थे, सभी ने एक सुर में कहा कि वे विरोध जारी रखेंगे. प्रेस कांफ्रेंस में आठ विपक्षी दल एक साथ थे और सभी ने नोटबंदी को सरकार का विफल कदम और घोटाला करार दिया.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ललकारा कि अब जबकि आपके ही थोपे गए 50 दिन भी पूरे होने वाले हैं, फिर भी आम जनता की मुसीबतें थमने का नाम ही नहीं ले रहीं. इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.

नोटबंदी को लेकर विपक्ष की एकजुट हुई पार्टियों और नेताओं में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, द्रमुक सांसद तिरूची सिवा, राजद सांसद जय प्रकाश नारायण यादव, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल और जद (एस), झामुमो और आईयूएमएल शामिल थे. दूसरी ओर वाम दलों, सपा, बसपा और जद(यू) ने इस संवाददाता सम्मेलन से दूरी बनाए रखी.

राहुल गांधी ने सबसे पहले इस कांफ्रेंस में कहा कि 30 दिसम्बर आने को है और हालात अभी वैसे ही हैं जैसे नोटबंदी के समय थे. उन्होंने यह भी माना कि नोटबंदी के जितने उद्देश्य बताए गए थे, वे हासिल ही नहीं हो पाए. और तो और आम जनता के लिए अच्छी खासी परेशानी खड़ी हो गई. सहारा समूह पर मारे गए छापे के दौरान मिले कागजात का हवाला देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप दोहराया.

‘‘गब्बर आ जाएगा’’

राहुल गांधी के बाद ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा, मोदी ने अच्छे दिनों के पर जनता को लूटा. ‘कैशलेस बेसलेस’ बन कर रह गया. देश को इससे इतना करारा आर्थिक झटका लगा है कि वह 20 साल पीछे चला गया है. उन्होंने कहा, मोदी ने जनता पर नोटबंदी का एकतरफा फैसला सुनाते वक्त संवैधानिक सिद्धान्तों को भी ताक पर रख दिया. 

ममता ने कहा, सरकार किसी भी पार्टी की हो लेकिन देश संविधान से चलता है. इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए. उन्होंने सकार का विरोध न करने वालों को भी आड़े हाथ लिया और कहा, आजकल तो यह हो गया है कि ‘कुछ मत बोलो गब्बर सिंह आ जाएगा.’ अगर सरकार ऐसे ही जनता को सुबह से लेकर शाम तक गब्बर सिंह से डराती रही तो वह दिन दूर नहीं जब जनता इन्हें वोट नहीं देगी. 

ममता ने नोटबंदी को ‘कालाधन साफ करने वाले डिटर्जेंट’की संज्ञा देने वाली केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन की भी खिल्ली उड़ाई. उन्होंने कहा, ऐसा कौन-सा डिजिटल साबुन है, जिससे मोदी ने भाजपा को ‘सफेद’ कर दिया? उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी पर एक साझा कार्यक्रम तैयार किया जाएगा और देश भर में आंदोलन चलाए जाएंगे. अब तक तो नोटबंदी से 107 मौतें हो चुकी हैं और अब लोग भुखमरी से मरेंगे.

मोदी अब इस्तीफे और ‘चैराहे’ के बीच

ममता बनर्जी से एक दिन पहले ही राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी मोदी से यही सवाल किया था कि क्या प्रधानमंत्री अब नैतिकता के नाते इस्तीफा देंगे? लालू ने ट्विटर पर मोदी को याद दिलाया था कि अब मोदी को अपना मनपसंद चौराहा चुनेंगे, जहां देश उन्हें सजा दे सके, अब 50 दिन की अवधि पूरी होने वाली है.

गौरतलब है कि मोदी ने 13 नवम्बर को गोवा में कहा था कि ‘अगर 30 दिसम्बर के बाद मेरे काम में कोई कमी पाई गई या कोई गलत इरादा लगे तो देश जो सजा देगा भुगतने के लिए तैयार हूं.’

विपक्षी दलों के बयानों में समानता से जाहिर होता है कि विपक्ष इस मामले पर एकराय है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वाम दल, सपा, बसपा और जद (यू) कांग्रेस की अगुवाई वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए. जद (यू) का रुख इस संबंध में स्पष्ट नहीं है क्योंकि इसके अध्यक्ष नीतीश कुमार कई बार नोटबंदी का समर्थन कर चुके हैं. जहां तक वाम दलों की बात है, सीताराम येचुरी पहले ही कह चुके हैं कि विपक्ष संसद में अपनी एकजुटता जारी रखेगा.

बसपा भी नोटबंदी के विरोध में ही है. पार्टी अध्यक्ष मायावती कई बार इसके लिए प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आड़े हाथों ले चुकी हैं. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष से कौन सी पार्टी शामिल हुई या नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि ये पार्टियां नोटबंदी के मुद्दे पर एकजुट हैं. साथ ही, ये इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चलाएंगे क्योंकि विपक्ष का मानना है कि कम से कम अगले छह माह तक तो नोटबंदी का मुद्दा चलेगा. नोटबंदी से जो भी नुकसान हुआ, उसी को हथियार बना कर विपक्ष इस मुद्दे पर अपने विरोध की धार तेज करेगा.

First published: 28 December 2016, 8:21 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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