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विधानसभा चुनाव: बंगाल में शांत और असम में आक्रामक रहेंगे मोदी

पाणिनि आनंद | Updated on: 16 February 2016, 22:53 IST
QUICK PILL
  • पश्चिम बंगाल के मुकाबले प्रधानमंत्री असम पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करेंगे. बंगाल में पार्टी का कमजोर संगठन और खराब हालत की वजह से बीजेपी के जीतने के आसार न के बराबर हैं.
  • वहीं असम में बीजेपी को जीत की उम्मीद है. प्रधानमंत्री ने असम में पहले से ही चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी है और वह कोकराझार और गुवाहाटी में रैली भी कर चुके हैं.

2016 में पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. अभी तक के संकेतों के आधार पर देखा जाए तो यह समझने में कोई दिक्कत नहीं होगी कि बीजेपी का फोकस असम पर टिका हुआ है.

प्रधानमंत्री मोदी ने असम में ज्यादा वक्त बिताने का फैसला लिया है. बीजेपी को असम में जीत की उम्मीद है. दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद मोदी को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा है. दोनों ही राज्यों में प्रधानमंत्री ने जबरदस्त तरीके से प्रचार किया था. अब इन चुनावों से सबक लिया जा चुका है. उन राज्यों में ज्यादा मेहनत मत करो जहां जीतने की संभावना कम है. असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में बीजेपी के लिए संभावनाएं बेहद कम हैं.

मोदी ने असम में पहले से ही चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी है. उन्होंने कोकराझार और गुवाहाटी में रैली की है और आने वाले कुछ हफ्तों में कुछ और रैलियों को संबोधित करने की उम्मीद है. अन्य चार राज्यों में अभी तक उन्होंने चुनावी अभियान की शुरुआत नहीं की है जिसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है.

क्या होगी रणनीति?

बीजेपी के सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बंगाल में कुछ ही रैलियों को संबोधित करेंगे. राज्य के एक नेता ने बताया, 'पीएम करीब आधा दर्जन रैलियों को संबोधित करेंगे.' यह समझा जा सकता है कि आखिर मोदी क्यों बंगाल जैसे बड़े राज्य को नजरअंदाज कर रहे हैं. बंगाल में पार्टी बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है. 295 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी का बस एक विधायक है.

बीजेपी के अन्य नेता ने बताया, 'बंगाल में बीजेपी को बहुत अधिक मिलने की उम्मीद नहीं है. इसके अलावा पार्टी के संगठन में देर से किया गया बदलाव भी सही नहीं है.' उन्होंने कहा कि पुरुलिया में हमारे संगठन सचिव के साथ बदतमीजी हुई. इसके अलावा बांकुरा में दिलीप घोष के साथ भी ऐसा ही हुआ. पार्टी का नेतृत्व राज्य में अपने कार्यकर्ताओं की हिफाजत करने में सक्षम नहीं है.

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पार्टी के एक नेता ने कहा, 'हाल के दिनों में बीजेपी के नेता तृणमूल में शामिल हो रहे हैं और यह एक बड़ी वजह है कि पीएम मोदी बंगाल आने से बच रहे हैं.' बीजेपी ने अभी तक राज्य में चार रैलियां की हैं और इसे राजनाथ सिंह, अमित शाह, स्मृति ईरानी और नितिन गडकरी ने संबोधित किया है. किसी भी रैली में 10,000 लोगों से ज्यादा की भीड़ नहीं दिखी.

पार्टी के एक नेता ने कहा, 'बंगाल ऐसा राज्य नहीं है जहां आपको लोगों को रैली में लाने के लिए भुगतान करने की जरूरत हो. बीजेपी ने अपनी रैलियों में लाखों रुपये का खर्चा किया है लेकिन इसके परिणाम उत्साहित करने वाले नहीं रहे हैं.' पार्टी राज्य में पिछली और मौजूदा सरकार की खामियों पर ज्यादा फोकस करेगी.

बड़ी उम्मीदें

असम का मामला दूसरा है. अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पार्टी वहां पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठा रही है. साफ तौर पर वह धु्रवीकरण की मदद से चुनाव में जीत दर्ज करना चाहती है. इसके अलावा पार्टी गगोई के 15 सालों के शासनकाल की वजह से सत्ता विरोधी रुझानों का भी इस्तेमाल करना चाहती है.

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बीजेपी के एक नेता ने कहा, 'असम में हमारी संगठन की सूची में 37 राज्य हैं. प्रधानमंत्री इनमें से अधिकांश में जाएंगे. हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि इनमें से प्रत्येक जिले में प्रधानमंत्री की कम से कम एक रैली जरूर हो.'

राज्य में पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह है और वह मतदाताओं को बूथ पर जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. पार्टी को असम में जीत की उम्मीद है और मोदी इसका श्रेय लेने का अवसर नहीं चूकना चाहते. 

First published: 16 February 2016, 22:53 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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