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शनि शिंगणापुर: महिलाओं ने गर्भगृह में घुसने का मांगा अधिकार

अश्विन अघोर | Updated on: 8 March 2016, 9:14 IST
QUICK PILL
  • रोजाना हजारों लोग शनि शिंगणापुर मंदिर का दर्शन करते हैं. हालांकि मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है.
  • दिलचस्प बात यह है शनि मंदिर ट्रस्ट की प्रमुख एक महिला हैं और गांव की कई महिलाओं द्वारा भी प्रतिबंधों का समर्थन किया जा रहा है.

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में एक शांत और पवित्र गांव शिंगणापुर अपने मशहूर शनि मंदिर के लिए जाना जाता है. रोजाना हजारों लोग शनि शिंगणापुर मंदिर के दर्शन करते हैं. लेकिन मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है.

कई पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को शनि शिंगणापुर के भक्तों और निवासियों द्वारा स्वीकार कर लिया गया है. लेकिन पिछले साल नवंबर में एक औरत प्रतिबंध को ललकारते हुए गर्भगृह में जहां शनिदेव की मूर्ति रखी गई है वहां पहुंच गई और तेलपूजन किया.

उस महिला द्वारा पाबंदी की अवहेलना कर पूजा करने की सूचना के बाद पूरे महाराष्ट्र में हजारों महिलाओं द्वारा मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की मांग की जाने लगी है. अब शनि शिंगणापुर मंदिर ट्रस्ट द्वारा महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध बनाए रखने के लिए धार्मिक परंपराओं का हवाला दिया जा रहा है.

गांव के निवासियों ने भी इस परंपरा का जोरदार समर्थन किया और गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति देने के लिए महिलाओं की मांग का दृढ़ता से विरोध किया. दिलचस्प बात यह है शनि मंदिर ट्रस्ट की प्रमुख एक महिला हैं और गांव की कई महिलाओं द्वारा भी प्रतिबंध का समर्थन किया जा रहा है.

अभियान

इस वर्ष का गणतंत्र दिवस शनि शिंगणापुर के लिए एक बदलाव का वायस साबित हो सकता है. मंदिर ट्रस्ट और ग्रामीणों के कड़े विरोध के बावजूद, रणरागिनी भूमाता ब्रिगेड ने गांव में जाकर प्रतिबंध की अवहेलना करते हुए गर्भगृह में प्रवेश करने का फैसला किया. मंगलवार सुबह ब्रिगेड के 1000 से अधिक स्वयंसेवकों ने पुणे से शनि शिंगणापुर के लिए कूच कर दिया.

कानून और व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते अहमदनगर पुलिस ने पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर सुपे गांव के पास आंदोलनकारियों के वाहनों को रोक लिया. पुलिस कार्रवाई के खिलाफ ब्रिगेड अध्यक्ष तृप्ति देसाई के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने राजमार्ग पर बैठकर प्रदर्शन और नारेबाजी की. 

जब राजमार्ग पर ब्रिगेड द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था, उसी दौरान शनि शिंगणापुर के निवासियों ने मंदिर के प्रतिबंधित क्षेत्र में महिलाओं को प्रवेश करने से रोकने के लिए तैयारी कर ली. देसाई के अनुसार ब्रिगेड ने मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद गर्भगृह में मूर्ति को छूकर  इस "अपमानजनक" परंपरा को धता बताने की योजना बनाई थी. टकराव को रोकने के लिए प्रशासन ने शनि शिंगणापुर गांव में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी.

ब्रिगेड का दावा था कि यह परंपरा अमानवीय और महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण है. दूसरी ओर गांव की महिलाओं का कहना था कि प्रदर्शनकारियों की रुचि केवल अपने प्रचार में है. ग्राम पंचायत ने भी "500 साल पुरानी परंपरा के संरक्षण और गर्भगृह में महिलाओं की पाबंदी" के संबंध में एक प्रस्ताव पारित कर दिया.

पुलिस कार्रवाई

मंगलवार की सुबह से ही तनाव शुरू हो गया था. पुलिस ने मंदिर क्षेत्र की बैरिकेडिंग करने के साथ ही यहां भारी संख्या में पुलिसबल तैनात कर दिया. गांव में प्रवेश करने वाले हर वाहन की जांच की गई और उसमें बैठे लोगों की पहचान को सत्यापित किया गया.

सुपे पर ब्रिगेड को रोकने के अलावा पुलिस ने शनि शिंगणापुर मंदिर में भी किसी संभावित संघर्ष को टालने के लिए तैयारी कर रखी थी.

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं तृप्ति देसाई ने कहा, "हमें पता था कि प्रशासन मंदिर में जाने के लिए अनुमति नहीं देगा. हम किसी भी तरह कानून और व्यवस्था पर खतरा नहीं थे, हम केवल मंदिर जाकर शांति से पूजा करना चाहते थे. गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की अमानवीय परंपरा को ध्वस्त होना चाहिए और हमें किसी भी कीमत पर यह करना होगा." 

पुलिस हिरासत में होने के बावजूद देसाई ने कहा कि ब्रिगेड हार नहीं मानेगी.

"आप हमें गिरफ्तार करके हमारी योजनाओं को विफल नहीं कर सकते. स्वयंसेवक चुपके से मंदिर क्षेत्र में पहुंच चुके हैं. वे कोशिश करके गर्भगृह में प्रवेश करेंगे."

ब्रिगेड ने मंदिर परिसर में प्रवेश करने के बाद गर्भगृह में मूर्ति को छूकर  इस "अपमानजनक" परंपरा को धता बताने की योजना बनाई थी

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक गांव में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की तैनाती कुछ और दिनों के लिए जारी रहेगी. उन्होंने कहा, "हम सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी कानून-व्यवस्था को बिगाड़ न पाए. मंदिर परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है और पहचान का सबूत दिए बिना प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है."

जो स्वयंसेवक मंदिर का "बचाव" करना चाहते थे, वे प्रदर्शनकारियों के नजरबंदी की खबर प्राप्त करने के बाद जल्द ही तितर-बितर हो गए.

मंदिर की ट्रस्टी प्रफुल्ल सुरपुरिया ने कहा, "यह अच्छा है  कि पुलिस ने ब्रिगेड स्वयंसेवकों हिरासत में ले लिया. लेकिन हम अपनी सुरक्षा बनाए रखेंगे." 

परंपरा

पिछले साल दिसंबर में शनि शिंगणापुर मंदिर ट्रस्ट ने अध्यक्ष के रूप में एक गृहिणी अनिता शेते को चुना. हालांकि इससे भी अब तक महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी के संबंध में कोई बदलाव नहीं आ सका.

विडंबना यह है कि स्वयं ट्रस्ट का अध्यक्ष होने के बावजूद अनिता शेते गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकती हैं.

इस नियम की जड़ों का पता शनिदेव के बारे में एक पौराणिक कथा से लगाया जाता है. कहा जाता है कि बचपन में शनि ने आपसी झगड़े में अपनी बहन को लात मार दी थी और बाद में उन्हें इसके लिए उनकी मां ने दंडित किया था.

सजा से नाराज शनिदेव ने तब फैसला किया कि वह अपने ऊपर महिलाओं की छाया भी नहीं पड़ने देना चाहते.

First published: 8 March 2016, 9:14 IST
 
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