Home » इंडिया » Women’s Day 2019 Know the rights of women in India by the Constitution
 

Women’s Day 2019: जानें भारतीय संविधान से महिलाओं को मिले कौन से अधिकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 March 2019, 11:11 IST

आज समूचा विश्व महिला दिवस मना रहा है. आज का दिन हर महिला के लिए खास है. हम आपको आज महिलाओं के उन अधिकारों के बारे में बताने जा रहे हैं जो भारतीय संविधान ने हर महिला को दिए हैं. संविधान से मिले इन अधिकारों को भारत की हर महिला को जानना जरूरी.

क्योंकि वो जननी है मां है, बहन है, बेटी है और ना जाने कितने रिश्तों का बोझ अपने कंधों पर लेकर चलती है. बावजूद इसके उसे उन नजरों से देखा जाता है जिसे समाज घर की चार दीवारी के अंदर कैद रखना चाहता है. भारतीय संविधान से मिले महिलाओं के ये अधिकार ही उन्हें रह जुर्म से लड़ने के लिए मजूबती प्रदान कर सकते हैं. इसलिए इन अधिकारों को आपको जानना जरूरी है.

ये हैं महिलाओं को मिले भारतीय संविधान से अधिकार

समान वेतन का अधिकार

आज दुनियाभर में महिलाए पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रही है. ऐसे में ये नहीं कहा जाता सकता कि उन्हें उस काम के बदले कम पैसा मिले जिसे करने के लिए पुरुषों को मिलता है. समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता. क्यों कि आज महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं ऐसे में उन्हें भी पुरुषों के समान वेतन पाने का पूरा अधिकार है.

काम के दौरान हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार

महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ काम कर रही है. ऐसे में अगर कोई सहकर्मी उनका यौन उत्पीड़न करता है तो भारतीय संविधान का यौन उत्पीड़़न अधिनियम उन्हें ये अधिकार प्रदान करता है कि आप यौन उत्पीड़न करने वाले खिलाफ शिकायत दर्ज कराएं. जिससे उन्हें न्याय मिल सके.

नाम न छापने का अधिकार

भारतीय संविधान ने यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है. अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है.

घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार

इस अधिनियम के तहत मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नी, एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है. अगर किसी महिला के साथ इस तरह के अत्याचार हो रहे हैं तो वो तुरंत इसकी शिकायत दर्ज करा सकती है.

मातृत्व संबंधी लाभ के लिए अधिकार

ये अधिकार कामकाजी महिलाओं के लिए दिया गया है. मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि ये उनका अधिकार है. मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नई मां के प्रसव के बाद 26 सप्ताह (6 महीने) तक महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाती और वो फिर से काम शुरू कर सकती हैं.

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार

भारत के हर नागरिक का ये कर्तव्य है कि वो एक महिला को उसके मूल अधिकार- 'जीने के अधिकार' का अनुभव करने दें. गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने तकनीक अधिनियम कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है.

मुफ्त कानूनी मदद के लिए अधिकार

रेप या यौन हिंसा की पीड़ित किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है. स्टेशन हाउस आफिसर (SHO) के लिए ये ज़रूरी है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचित करे.

रात में गिरफ्तारी ना करने का अधिकार

एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है.

संपत्ति पर अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है.

गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार

किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तोउसपर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए.

देश की इन महिला सरपंचों ने लाखों रुपये की नौकरी छोड़ गांव को दिखाई तरक्की की राह

First published: 8 March 2019, 11:11 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी