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साहस, ईमानदारी, बहादुरी और सोनी सोरी

श्रिया मोहन | Updated on: 8 March 2016, 22:16 IST
QUICK PILL
  • 20 फरवरी को सोनी सोरी पर उस वक्त हमला हुआ जब वह अपनी सहयोगी रिंकी के साथ जगदलपुर से गीदम लौट रहीं थीं. सोनी गीदम में रहती हैं. तभी तीन लोगों ने उन्हें उनकी गाड़ी से उतारा और उनके चेहरे पर टार पोत दिया.
  • सोरी बताती हैं कि जब आप अन्याय और क्रूरता की हदों को देख लेते हैं तब आपको डर नहीं लगता. मेरे लिए कुछ भी डराने वाला नहीं है. मेरा डर अब उस पिघले हुए लोहे की तरह है जो अब तलवार की शक्ल ले चुकी है.

रविवार शाम सात बजे के आस-पास जब मैं सोनी सोरी से मिली तो उन्होंने तुरंत ही मुझे मोमो खाने के लिए दिया. वह खुद भी इसे खाने की कोशिश कर रही थीं. सोरी को सरकार आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा मानती है. 

पुलिस ने उन्हें गलत तरीके से नक्सली साबित करने की कोशिश की और इस दौरान उन पर अत्याचारों का पहाड़ टूट पड़ा. पूरी कोशिश सोरी को चुप कराने की थी. हाल ही में उनके चेहरे पर टार पोत दिया गया. चेहरे पर लगे रासायन की वजह से हुए नुकसान का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अभी तक सोरी का चेहरा अपने सामान्य रंग और रूप में वापस नहीं आ पाया है. सोरी का दिल्ली के अपोलो अस्पताल के बर्न वार्ड में इलाज चल रहा है.

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोरी ने मोमो का पहला टुकड़ा अपने मुंह में रखा और बताया कि आखिरकार उन्हें अब डर क्यों नहीं लगता है.

20 फरवरी को सोनी पर उस वक्त हमला हुआ जब वह अपनी सहयोगी रिंकी के साथ जगदलपुर से गीदम लौट रहीं थीं. सोनी गीदम में रहती हैं. तभी तीन लोगों ने उन्हें उनकी गाड़ी से उतारा और उनके चेहरे पर टार पोत दिया. 

सोनी बताती हैं, 'वह जल्दबाजी में थे. उन्हों पीछे से मेरा हाथ पड़का और कहा कि वह मेरे चेहरे को काला करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं मर्दून बलात्कार का मामला वापस ले लूं जिसमें सीआरपीएफ के जवान आरोपी हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर मैं अपनी बेटी को जिंदा देखना चाहती हूं तो मुझे आईजी एसआरपी कल्लूरी के खिलाफ की गई शिकायत को वापस लेना होगा.'

सोनी सोरी को पता चल गया कि उनके चेहरे पर सिर्फ कालिख नहीं पोती गई है. लग रहा था कि किसी ने उनके चेहरे पर अंगारे डाल दिए हों

हमलावरों ने कहा, 'अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो वह मुझे कहीं का मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेंगे.' कुछ मिनट बाद ही उन्हें और रिंकी को यह पता चल चुका था कि उनके चेहरे पर सिर्फ पेंट नहीं पोती गई थी. उनकी आंखें बंद हो गई थी और ऐसा लग रहा था कि किसी ने उनके चेहरे पर अंगारे डाल दिए हों.

डर का कोई मतलब नहीं

जब मैं सोरी से मिली तो मुझे इस बात का एहसास हुआ कि नहीं डरना होता क्या है. सोनी कैसे बिना डरे हर सकती हैं? ऐसे हालात में वह इतनी बेफिक्र कैसे हो सकती हैं?

सोरी बताती हैं, 'मेरे प्राइवेट पार्ट्स में पत्थर डाले जा रहे थे, मैं अन्य लोगों को यातनाएं सहते हुए देख रही थी, महिलाओं के स्तन को करंट लगाया जा रहा था. मेरी आंखों के सामने 17 साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया गया और फिर उसने जेल में ही बच्चे को जन्म दिया. मैं जेल में करीब डेढ़ साल रही और मेरे बच्चे बाहर भटकते रहे. मैंने अपने पति को जेल में इस कदर पिटते हुए देखा कि उन्हें लकवा मार गया. फिर 2013 में जेल में ही उनकी मौत हो गई. यह सब देखकर अब मुझे डर नहीं लगता.'

जब आप अन्याय और क्रूरता की हदों को देख लेते हैं तब ऐसा कुछ नहीं होता. मेरे लिए कुछ भी चौंकाने वाला नहीं और नहीं मेरे लिए कुछ डराने वाला है. सोरी बताती हैं, 'मेरा डर अब उस पिघले हुए लोहे की तरह है जो अब तलवार की शक्ल ले चुकी है.'

सोरी की इस बात को मानने के कई आधार हैं कि उन पर हुए हमले के पीछे बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लुरी का हाथ है. 

सोरी बताती हैं, 'ऐसे कई घटनाक्रम है जो यह बताते हैं कि मेरे ऊपर हुए हमलों के लिए वहीं जिम्मेदार हैं. मीडिया में उन्होंने मेरे खिलाफ बयान जारी किया. मुझे उनके गुस्से का सामना करना पड़ा क्योंकि मैंने उनके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए बलात्कार, फर्जी मुठभेड़ और पुलिस अत्याचार के मामले की जांच कराए जाने की मांग की.'

सोरी कहती हैं कि उन पर हुए हमले के पीछे बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लुरी का हाथ है

लेकिन सोरी ने ऐसा कुछ कर दिया जिससे कल्लुरी की परेशानियां बढ़ गई हैं. पहले महिलाएं सोरी से निजी तौर पर अपने खिलाफ हुए अत्याचार की शिकायत किया करती थीं और फिर सोरी उन मुद्दों को मीडिया में उठाती थीं. इस घटना के बाद सोरी अब सतर्क हैं. सोरी बताती हैं, 'मैं केवल उन्हीं मामलों को उठाती हूं जहां परिवार खुद मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखने के लिए राजी होता है.' 

सोरी अब बस्तर के लोग और मीडिया के बीच की कड़ी हैं. वह अब अत्याचारों और पुलिसिया जुल्म की कहानी सबके सामने ला रही हैं.

क्या सोरी के परिवार वाले चिंतित हैं? सोरी की दो बेटियां हैं. इनमें से एक 16 की जबकि दूसरी 11 साल की है. उनका एक बेटा भी है जिसकी उम्र 13 साल है. उनकी सबसे बड़ी संतान वकील बनना चाहती हैं जबकि सबसे छोटी बेटी उनकी ही तरह बनना चाहती है. वह हंसते हुए बताती हैं, 'उनकी बेटी पढ़ाई में ठीक नहीं है लेकिन वह बेहद लड़ाकू हैं.'

सोरी के परिवार को अब डर और खतरे के साए में रहने की आदत हो गई है. सोरी जब अस्पताल में थी तब उनकी बड़ी बेटी को मौत की धमकी मिली थी. धमकी देने वाले ने कहा कि सोरी पर जो कुछ हुआ उसका इलाज किया जा सकता था लेकिन जो तुम्हारे साथ होगा उसका कोई इलाज नहीं होगा.

अगर मैं किसी आदिवासी महिला के खिलाफ हुए बलात्कार की बात उठाती हूं तो क्या मैं राष्ट्रविरोधी हूं

सोरी गर्व से बताती हैं, 'मेरी बेटी यह बात फोन पर मुझे हंसते हुए बता रही थी जब मैं अस्पताल में भर्ती थी.' थोड़ी देर बाद सोरी बताती हैं, 'मैं इन लोगों से कहना चाहती हूं कि तुम्हारी लड़ाई मेरे साथ है और तुम इसे मेरे साथ लड़ो.' वह न्याय की लड़ाई में अपना सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हैं. लेकिन एक मां के तौर पर वह उस बाघिन की तरह है जो अपने बच्चों के साथ कुछ भी होते हुए नहीं देखना चाहतीं.

मैं राष्ट्रवादी हूं

लेख लिखे जाने के दौरान सोनी सोरी जेएनयू में छात्रों के बीच अपना भाषण दे चुकी हैं.सोरी पूछती हैं, 'यह मेरी भी सरकार है जैसा कि सबका है. यह जिम्मेदारी नागरिकों की है कि वह सरकार को बताए कि क्या गलत हो रहा है. हम ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि हमें सरकार से प्यार है. इसमें राष्ट्रविरोधी होने की बात कहां से आ गई? अगर मैं इंस्पेक्टर जनरल एसआरपी कल्लुरी के खिलाफ शिकायत करना चाहती हूं तो उसकी वजह यह है कि उनके अंदर सीआरपीएफ के जवानों ने 40 दलित महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया. तो क्या मैं राज्य की दुश्मन हो गई? अगर मैं लोगों के लिए न्याय मांग रही हूं जिन्हें झूठे मामलों में फंसाकर नक्सली करार दिया गया है तो क्या मैं राष्ट्रविरोधी हूं. जबकि मेरे पास इन सभी आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं.'

सोरी की योजना अपने राजनीतिक कद को मजबूत करने की भी है. ऐसा लगता है कि हमले के बाद आम आदमी पार्टी के साथ उनके संबंध और मजबूत हुए हैं. उन्हें हमले के बाद तुरंत दिल्ली लाया गया. सोरी अगला चुनाव लड़ने के बारे में भी सोच रही हैं.

सोरी बताती हैं, 'मैं पिछला चुनाव हार गई क्योंकि मैं तुरंत जेल से बाहर आई थी. इसकी वजह से मैं लोगों से कट गई. यह खराब समय था.' वह बताती है कि अगली बार ऐसा कुछ नहीं होगा.

उनकी योजना बस्तर में सार्वजनिक अस्पताल बनाने की है. इसके अलावा उनकी योजना आदिवासियों को न्याय दिलाने की है. पहला तरीका  राजनीति का है जबकि दूसरा तरीका संस्थाओं के निर्माण का है.

महिला दिवस पर किसी तरह का संदेश दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'इस महिला दिवस पर भी, जबकि यह 2016 है, महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. उनके साथ बलात्कार किया जा रहा है और उन्हें मारा जा रहा है. उनके चेहरे पर तेजाब फेंकी जा रही है तो हम कहां सुरक्षित हैं? महिलाओं को डर के साए में जिंदगी जीनी पड़ रही है. मुझे इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि महिलाओं के खिलाफ किस तरह के आपराधिक मुकदमे हैं लेकिन उन्हें उचित मौका मिलना चाहिए.'

सोरी जब मंगलवार को जगदलपुर लौटेंगी तो वह नए अवतार में होंगी. इस बार भी उनका जबरदस्त स्वागत होगा. बस्तर की महिलाओं के लिए उनका लौटना ही महिला दिवस के लिए उनका सबसे बड़ा तोहफा होगा.

First published: 8 March 2016, 22:16 IST
 
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