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यादव पुराण समाप्त? मुलायम का जलवा, अखिलेश कठपुतली

अतुल चंद्रा | Updated on: 20 September 2016, 7:15 IST
(पीटीआई)

समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अपने भाई और बेटे अखिलेश यादव के बीच चल रहे विवाद में 17 सितम्बर को सुलह करवा दी. खामोशी से बेटे अखिलेश के पर कतरते हुए शिवपाल की तारीफों के पुल बांध मुलायम ने यह पारिवारिक कलह खत्म की.

परन्तु पार्टी के भीतर अब भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा और इस पूरे घटनाक्रम से यह साबित होता है कि अखिलेश यादव एक कठपुतली मुख्यमंत्री से अधिक कुछ नहीं हैं जो अपने पिता और चाचा के परामर्श के बिना कुछ नहीं कर सकते.

मुख्यमंत्री को इस बात के लिए भी ताकीद कर दिया गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में फैसले सलाह मशविरे से लिए जाते हैं न कि एकतरफा.अखिलेश ने संवाददाता सम्मेलन में इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि किसी पंडित से परामर्श लेने के बाद 4 अक्टूबर को हम कानपुर जा कर मेट्रो परियोजना का शिलान्यास करेंगे.

नियम व शर्तें लागू

समझौते के नियमानुसार शिवपाल पार्टी अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि टिकट बंटवारे की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के चलते अखिलेश यह पद स्वयं लेना चाह रहे थे.उन्हें हालांकि सार्वजनिक निर्माण विभाग अपने पास ही रखने की अनुमति मिल गई है, जो उन्होंने अपने चाचा से लिया है.

परन्तु पूर्व सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवपाल को चिकित्सा, शिक्षा, आयुष, लघु सिंचाई और दस अन्य विभाग सौंप दिए गए हैं. पहले शिवपाल के पास नौ मंत्रालय थे और अब 13 हैं.

आहत मुख्यमंत्री

अखिलेश के समर्थक जब उन्हें पार्टी की प्रदेश इकाई से हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे तो उन्होंने उन्हें यह कह कर शांत कर दिया कि वे अब भी पार्टी के युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं.

संवाददाता सम्मेलन में जब अखिलेश से उनके इस पद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘इसके बारे में मत पूछो वरना यह भी छिन जाएगा.’उन्होंने नए पार्टी अध्यक्ष को बधाई दी लेकिन शिवपाल का नाम लेकर संबोधित नहीं किया. संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने चाचा के घर गए थे चाय पीने न कि पार्टी अध्यक्ष के घर.

पासा उल्टा पड़ा

एक निजी टीवी चैनल पर एक चुनावी कार्यक्रम में अखिलेश ने पार्टी अध्यक्ष के पद पर बने रहने पर जोर दिया था. उन्होंने कहा, 'जब उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद से हटाया गया, तब उन्हें बहुत खराब लगा. आपने उसका असर भी देखा होगा.’

कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिलेश ने अपने चाचा से उनके प्रमुख विभाग वापस ले लिए. अखिलेश ने स्पष्ट किया कि वे उनके सारे विभाग लौटाने को तैयार हैं अगर उन्हें पार्टी प्रदेशाध्यक्ष का पद पुनः दे दिया जाए. हालांकि यह होने वाला नहीं था.

चूंकि टिकट बंटवारे में पार्टी अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, इसलिए अखिलेश किसी बड़े उद्देश्य के लिए इस पद पर बने रहना चाहते थे. परन्तु अब शिवपाल तय करेंगे कि अखिलेश के कितने समर्थकों को 2017 के विधानसभा चुनाव के टिकट दिए जाएंगे.

पिछले दिनों हुई घटनाओं में मुलायम अखिलेश के समर्थकों पर जमकर बरसे. रिपोर्टों के अनुसार, बंद कमरे में हुई एक बैठक में मुलायम ने कहा कि उन्होंने और शिवपाल ने पार्टी को खड़ा करने में कड़ी मेहनत की है. ‘जब मैं और शिवपाल पार्टी के लिए काम कर रहे थे, अखिलेश स्कूल में पढ़ते थे.'

पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख ने माना कि विधायकों पर शिवपाल की पकड़ अखिलेश के मुकाबले मजबूत है. इसीलिए उन्होंने अखिलेश को 15 अगस्त को चेतावनी दी थी कि अगर शिवपाल ने पार्टी छोड़ दी तो यह सपा के लिए बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है.

15 अगस्त को यह चेतावनी इसलिए दी गई क्योंकि शिवपाल ने धमकी दी थी कि नौकरशाह और विधायक उनकी सुनते नहीं हैं और पार्टी कार्यकर्ता जमीनों पर कब्जा करने और दूसरी भ्रष्ट गतिविधियो में लिप्त हैं. मुलायम ने सार्वजनिक तौर पर मुख्यमंत्री को आगाह किया है कि पार्टी कार्यकर्ता और मंत्री अपने पद को दुरुपयोग कर पैसा कमाने में लगे हैं.

भ्रष्टाचार और पक्षपात

अजीब बात यह है कि मुलायम और शिवपाल ने दागी गायत्री प्रसाद प्रजापति को अखिलेश मंत्रिमंडल में दोबारा प्रवेश का समर्थन किया है. दोनों वरिष्ठ नेताओं को भ्रष्टों और राज्य में राजनीतिक अपराधियों को आसरा देने के लिए जाना जाता है.

कुछ माह पहले ही मुलायम और शिवपाल चाहते थे कि जेल में सजा काट रहे माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय हो जाए. मुख्यमंत्री के पीछे हट जाने के कारण यह विलय टल गया था.

गुरुवार देर रात शिवपाल ने घोषण की थी कि वे पार्टी छोड़ रहे हैं. उनके बेटे आदित्य ने प्रान्तीय सहकारी संघ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. पत्नी सरला यादव ने बैंक को-ऑपरेटिव, इटावा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.

इसके बाद मुलायम सिंह ने अपने भाई से आधे घंटे की बैठक की और घोषित किया कागजों में मतभेदों का निपटारा कर लिया गया है.

अखिलेश ने पार्टी की समस्याओं के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया है और कहा कि वे और मुलायम मिल कर उन्हें हटाना चाहते थे. शिवपाल के अधिक शक्तिशाली बन कर उबरने के बाद अब कुछ समय तक मुख्यमंत्री को अपने ‘बाहरी’ होने का एहसास हो सकता है.

शिवपाल को चिकित्सा, शिक्षा, आयुष, लघु सिंचाई और दस अन्य विभाग सौंप दिए गए हैं. पहले उनके के पास नौ मंत्रालय थे

गुरुवार देर रात शिवपाल ने घोषण की थी कि वे पार्टी छोड़ रहे हैं. उनके बेटे आदित्य ने प्रान्तीय सहकारी संघ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. पत्नी सरला यादव ने बैंक को-ऑपरेटिव, इटावा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.

इसके बाद मुलायम सिंह ने अपने भाई से आधे घंटे की बैठक की और घोषित किया कागजों में मतभेदों का निपटारा कर लिया गया है.

अखिलेश ने पार्टी की समस्याओं के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया है और कहा कि वे और मुलायम मिल कर उन्हें हटाना चाहते थे. शिवपाल के अधिक शक्तिशाली बन कर उबरने के बाद अब कुछ समय तक मुख्यमंत्री को अपने ‘बाहरी’ होने का एहसास हो सकता है.

First published: 20 September 2016, 7:15 IST
 
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