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यूपी-बिहार में हार पर बोले यशवंत सिन्हा: इस वजह से BJP से पीछा छुटा रही है जनता

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2018, 15:30 IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा NDA से घटक दलों द्वारा नाता तोड़ने को लेकर अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है. यशवंत सिन्हा ने लिखा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ कुछ सहयोगी होंगे, लेकिन गठबंधन का स्वरूप और आकार वह नहीं होगा जो अभी है.

एक निजी टीवी चैनल पर लिखे लेख में यशवंत सिन्हा ने कहा, "NDA से उसके घटक दल क्यों पीछा छुड़ाने लगे हैं? इसकी वजह तलाशने के लिए दूर नहीं जाना होगा. उन लोगों ने जनता का मूड भांप लिया है जो निर्णायक तौर पर भाजपा के खिलाफ हो चुका है. बेहतर साबित होने के बजाय बीजेपी उनके लिए बोझ बन चुकी है."

 

आगे उन्होंने लिखा, "नीतीश कुमार NDA में शामिल होने वालों में सबसे नए हैं, लेकिन उनके उम्मीदवार को जहानाबाद विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में आरजेडी के हाथों करारी शिकस्त मिली है. NDA से पीछा छुड़ाने की प्रक्रिया समय में बदलाव की एक और निशानी है."

उन्होंने लिखा, "उत्तर प्रदेश और बिहार में उपचुनावों के बाद त्रिपुरा में जीत हासिल करने पर बीजेपी के प्रति धारणा में भी बदलाव आया है. बीजेपी के रवैये से NDA के सहयोगी दल नाखुश होते जा रहे हैं. ऐसा लगता है जैसे भाजपा के व्यवहार से सिर्फ शिवसेना ही नहीं बल्कि अन्य सहयोगी दल भी नाखुश हैं."

 

सिन्हा ने लिखा, "शिवसेना के बाद चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP भी अपने 16 सांसदों के साथ पहले कैबिनेट से अपने मंत्रियों को हटा लिया था और बाद में NDA से अलग हो गई. TDP सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाई है. पंजाब में अकाली दल बार-बार अपनी नाखुशी जाहिर कर रहा है."

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उन्होंने लिखा, "NDA में शामिल होने वाले जीतन राम मांझी अब यूपीए में शामिल हो चुके हैं. बिहार में ही तीन सांसदों के साथ उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरजेडी के साथ दोस्ताना हो रही है. यहां तक कि रामविलास पासवान भी बीजेपी को उपदेश दे रहे हैं, जिन्हें लालू यादव ने एक बार सबसे बेहतरीन ‘वेदर साइंटिस्ट’ करार दिया था. ओम प्रकाश राजभर ने राज्यसभा चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान न करने की धमकी दी है. कई अन्य दल भी व्याकुल हैं."

First published: 22 March 2018, 15:30 IST
 
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