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बीमार यासीन मलिक को कैद में रखना कितना सही, कितना गलत?

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2016, 7:15 IST
(वसीम अंद्राबी/हिन्दुस्तान टाइम्स/गेट)
QUICK PILL
  • पाकिस्तान में रह रहीं उनकी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक के अनुसार जेकेएलएफ सुप्रीमो को एकान्तवास में रखा या है और उनका स्वास्थ्य दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है. 
  • सरकार भी अब तक उन्हें दो बार स्थानीय सरकारी अस्पताल और कुछ निजी नर्सिंग होम में लेकर गई है लेकिन उनकी बहन के अनुसार उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ है.

हुर्रियत प्रदर्शनकारियों ने पिछले 86 दिनों से लगातार कश्मीर को पंगु बनाकर रखा हुआ है. जम्मू-कश्मीर सरकार ने घाटी के अलगाववादियों की तिकड़ी सैय्यद अली शाह गिलानी, मीरवाज उमर फारुख और यासीन मलिक के लिए जेल में तीन अलग-अलग तरह के मापदंड बना रखे हैं. 

गिलानी को उनकी बढ़ती उम्र के कारण उनके घर में ही नजरबंद रखा गया है और मीरवाइज को निशात के निकट एक उप जेल में रखा गया है. निशात श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित एक प्रसिद्ध मुगल गार्डन है जबकि मलिक को श्रीनगर हवाईअड्डे के पास हुमहामा के संयुक्त पूछताछ केन्द्र में शिफ्ट किया गया है.

घाटी के लोग जाहिरा तौर पर मलिक के साथ किए जा रहे इस सौतेले व्यवहार के लिए सत्तारूढ़ पीडीपी गठबंधन को उत्तरदायी ठहराते हैं. मलिक के रिश्ते गठबंधन सरकार के साथ अच्छे नहीं बताए जाते हैं. इस साल की शुरुआत में मलिक ने गिलानी और मीरवाज के साथ मिलकर कश्मीरी पंडितों के लिए अलग टाउनशिप और सैनिक कालोनी बनाने के प्रस्ताव के विरोध में एक मोर्चा बनाया था. 

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने बंद का आह्वान किया था और प्रस्ताव के विरोध में अलगाववादियों ने हड़ताल रखते हुए अलग टाउनशिप का प्रस्ताव खारिज कर दिया था. वास्तव में देखा जाए तो यह मलिक ही थे जिन्होंने इन प्रस्तावित सैटलमेन्ट के अलार्म को समझ लिया था. माना जाता है कि इससे जनता के बीच आतंक का भाव उत्पन्न हुआ जिससे वर्तमान की अशांति को बढ़ावा मिला.

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं यासीन

क्या कोई मलिक के साथ सरकार के इस कड़ाई वाले व्यवहार के बारे में बता सकता है? पाकिस्तान में रह रहीं उनकी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक के अनुसार जेकेएलएफ सुप्रीमो को एकान्तवास में रखा या है और उनका स्वास्थ्य दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है. 

मलिक ने पाकिस्तान में मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें गहरी स्वास्थ्य समस्याएं हैं. उनका हृदय कमजोर है. इसके अलावा जेल की अनहाइजिनक कंडीशनों के कारण उनके बाएं पैर में इन्फैक्शन हो गया है. सरकार उनका समुचित इलाज नहीं करा रही है जिससे उनका स्वास्थ्य और बिगड़ता जा रहा है.

मलिक की बहन अदीबा, जो जेल में अपने भाई से मिलने बेरोकटोक जाती रहती हैं, चाहती हैं कि उनके भाई को जेल से अस्पताल में स्थानान्तरित कर दिया जाए. उन्होंने कैच न्यूज से कहा कि वह अपने कमरे में अकेले हैं और बीमार हैं. उनका दिल कमजोर है और किडनी में पथरी है जो फिर असहनीय पीड़ा देने लगी है. यह उनके भाई की मजबूत इच्छाशक्ति है जो उन्हें जीवित रखे हुए है.

मलिक के स्वास्थ्य की सालों से जांच करने वाले चिकित्सकों का भी मानना है कि चिन्ता की पर्याप्त वजहें हैं. एक डॉक्टर ने कहा कि मलिक साहब को काफी समय से हृदय और किडनी की समस्या है. उनका एक वॉल्व काम नहीं कर रहा है. सोलह साल पहले उनकी सर्जरी हुई थी. वह ब्लड थिनर्स (रक्त को पतला करने वाली दवाईयां) लेते हैं ताकि वॉल्व ब्लॉक न हो. 

पथरी होने के कारण कई बार उनकी किडनी का आपरेशन भी हो चुका है. वह कहते हैं कि उन्हें बहुत ज्यादा स्वास्थ्य समस्याएं हैं लेकिन इस समय उनकी हालत इतनी ज्यादा गंभीर नहीं है. हालांकि, उनके स्वास्थ्य पर तुरन्त ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

जेल नहीं सेहत के लिए फिक्रमंद

मलिक के संगठन जेकेएलएफ ने भी जेल में उनके गिरते स्वास्थ्य को लेकर सबका ध्यान आकर्षित कराने के वास्ते एक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि यासीन साहब की दोनों किडनियों में कई स्टोन हैं. इसी समस्या के कारण उनका कई बार आपरेशन भी हो चुका है. किडनी में फिर स्टोन आ जाने से डॉक्टर्स चिन्तित हैं. 

सरकार भी अब तक उन्हें दो बार स्थानीय सरकारी अस्पताल और कुछ निजी नर्सिंग होम में लेकर गई है. उनकी बहन के अनुसार उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ है. अबीदा कहती हैं कि वह कमरे में अकेले रहते हैं. साथ में उनके केवल किताबें हैं. खाने में उन्हें दाल और आलू मिलता है. वह यह भी कहती हैं कि लेकिन हम कोई शिकायत नहीं कर रहे हैं. मेरे भाई जेल में हैं और वह उचित कारणों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. हम उनके स्वास्थ्य के लिए चिन्तित हैं, उनके कैदखाने से नहीं.

इस दौरान मलिक का नाम रोजाना जारी किए जाने वाले अलगाववादियों के संयुक्त बयान में छपा होता है. इसमें हुर्रियत के प्रदर्शन का कलैंडर होता है और चल रहे विद्रोह को और मजबूती देने की बात होती है. लोगों को अनुपालना करने के लिए प्रदर्शन और शटडाउन का रोस्टर होता है. जेकेएलएफ अपनी नियमित प्रेस रिलीज में उनके बयान को कोट भी करता है.

कश्मीर के हालात के लिए पीडीपी ज़िम्मेदार?

संगठन के ताजा बयान में कश्मीरियों के उत्पीड़न के लिए पीडीपी पर आरोप लगाया गया है. ऐसा आरोप आए दिन ही लगाया जाता है. पीडीपी नेताओं पर छिपे तौर पर हमला करते हुए मलिक को कोट किया गय़ा है. इसमें मलिक ने कहा है कि कश्मीरियों के खिलाफ ये अपराध दिल्ली के निर्देश पर हुए हो सकते हैं लेकिन इन्हें दिल्ली और नागपुर में बैठे प्रो-इंडिया राजनीतिकों और कश्मीर में उनके एजेण्टों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है.

कश्मीर में पाकिस्तान समर्थक अलगाववादियों के झुण्ड में मलिक एकमात्र स्वतंत्रता समर्थक नेता है. वह मीरवाज और गिलानी की अगुवाई वाले हुर्रिय़त के मिले-जुले हिस्से भी नहीं है. लेकिन तीनों लोगों को गत 8 जुलाई को हिजबुल के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद अचानक हुए बड़े पैमाने पर उपद्रव के चलते समान आधार पर जेल में रखा गया है.

देखा जाए तो अभी जो हालात हैं, मलिक और मीरवाइज जेल में हैं, गिलानी को अशांति की अगुवाई के लिए अकेला छोड़ दिया गया है. ऐसे में हालात में कमी आने के आसार कम ही हैं.

First published: 6 October 2016, 7:15 IST
 
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