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सुप्रीम कोर्ट ने 92 साल के दोषी को कहा- सजा भुगतने के लिए जाओ जेल

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनर किलिंग के मामले में 92 साल के दोषी शख्स को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि उसे इस मामले में सरेंडर करते हुए पूरी सजा भुगतनी होगी.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव के 92 साल के बुजुर्ग पुत्ती फिलहाल बिस्तर पर हैं और उन्होंने कार्ट से मेडिकल ग्राउंड पर समर्पण की छूट मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस एल नागेश्वर राव की अवकाशकालीन बेंच ने पुत्ती की अर्जी खारिज करते हुए इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया है.

दोषी बुजुर्ग की दलील थी कि वह बिस्तर पर है और पूरी तरह से लाचार है. लेकिन इसके बावजूद उसे किसी भी समय गिरफ्तार करके जेल भेजा जा सकता है. इसलिए मेडिकल ग्राउंड पर उसे सरेंडर के लिए छूट दी जानी चाहिए.

ऑनर किलिंग में दोषी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 24 फरवरी को पुत्ती को ऑनर किलिंग के मामले में मिली सजा के आदेश को सही ठहराते हुए पुलिस के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया था.

इसके बाद पुत्ती ने हाई कार्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. पुत्ती के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील में कहा कि हाई कोर्ट ने उसकी आयु पर ध्यान नहीं दिया है. इस मामले में दो अन्य आरोपी फीक्का और स्नेही की पहले ही मौत हो चुकी है. दोनों पुत्ती के भाई थे.

36 साल पहले हत्या

पुलिस के मुताबिक दिसंबर, 1979 में फीक्का की विवाहित बेटी नन्हकू के भाई सोहन के साथ भाग गई थी. इससे नाराज पुत्ती, फीक्का और स्नेही ने 22 अगस्त, 1980 को नन्हकू की हत्या कर दी थी.

घटना के करीब दो साल बाद 28 मई, 1982 को ट्रायल कोर्ट ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. तीनों ने सजा के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और तीनों को जमानत भी मिल गई थी.

हाई कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान फीक्का और स्नेही की मौत हो गई. करीब 34 साल बाद 24 फरवरी 2016 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनकी अपील खारिज करते हुए सजा को बहाल रखा था.

हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराते हुए सजा को बरकरार रखने का आदेश दिया है.

First published: 18 June 2016, 12:23 IST
 
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