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कौन है जाकिर नाइक जिससे बचने की हिदायत दारुल उलूम भी देता है

सादिक़ नक़वी | Updated on: 7 July 2016, 16:24 IST

रिपोर्टों के अनुसार ढाका के हमलावरों में से कम से कम दो हमलावर इस्लाम के प्रचारक जाकिर नाइक के अनुयायी थे. यह कोई अचरज की बात नहीं है. जाकिर नाइक अपने कपोल कल्पित वैज्ञानिक प्रवचनों में कुरान के उद्धरणों और अपनी समझ के अनुसार लोगों के सामने इसकी व्याख्या करते हैं. गड़बड़ यह है कि कुछ लोग उनकी व्याख्या से प्रेरित होकर हिंसा का रास्ता अख्तियार कर रहे हैं. कई साल पहले उन्हें इंग्लैंड ने अपने यहां आने पर पाबंदी लगा दी थी. उसके बाद कनाडा ने भी उनके खिलाफ ऐसा ही कदम उठाया.

यहां तक कि मलेशिया में भी उसके साथ प्रस्तावित वार्ता इसलिए रद्द कर दी गई, क्योंकि इस वजह से वहां नस्ली तनाव भड़क सकता था. हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर नाइक को आतंक भड़काने के लिए जिम्मदार नहीं ठहराया जा सकता लेकिन उनके धर्मोपदेश में ऐसी बातें कही जाती हैं, जो उग्रवादी मानसिकता को उकसाने के लिए काफी हैं.

उत्तर दक्षिणी विश्वविद्यालय के एक छात्र 22 वर्षीय रोहन इम्तियाज ने जनवरी में अपनी फेसबुक वाॅल पर नाइक का एक बयान पोस्ट किया था, जिसमें नाइक कह रहे हैं, 'सभी मुसलमानों को आतंकी हो जाना चाहिए.' इसके बाद रोहन गायब हो गया था और उसने गुलशन में पांच अन्य लोगों के साथ मिल कर एक रेस्टोरेंट पर हमला किया. अतीत में भी ऐसी कुछ घटनाएं हुई हैं, जिससे पता लगता है कि हमलावर नाइक के उपदेशों से ‘प्रेरित’ थे.

इस्लामिक स्टेट में शामिल होने मध्य-पूर्व की ओर जा रहे बांग्लादेशियों पर अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि बांग्लादेशी मूल का ब्रिटिश नागरिक समियम रहमान और उसके दो साथियों ने जमायत-ए-मुजाहिदीन, बांग्लादेश के लिए सात लोगों को भर्ती किया था. ये सभी आपस में नाइक के फैन पेज पर ही मिले थे.

एक याचिका में मांग की गई है कि नाइक के इस्लामिक शोध संस्थान को आतंकी संगठन घोषित कर देना चाहिए

वर्ष 2009 में न्यूयाॅर्क के टाइम्स स्क्वायर सहित कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले का प्रयास करने के आरोप में गिरफ्तार अफगानी प्रवासी नजीबुल्लाह जाजी के साथियों ने बताया कि उसने भी नाइक के वीडियो देख सुन कर ही हमलों की कोशिश की थी. उसे नाइक के वीडियो से खासा लगाव था.

ऐसे और भी मामले हैं. चेंज डाॅट ओआरजी पर डाली गई एक याचिका में मांग की गई है कि नाइक के इस्लामिक शोध संस्थान को आतंकी संगठन घोषित कर देना चाहिए. इसमें यह भी कहा गया कि उसके भाषणों की सीडी इंडियन मुजाहिदीन के ठिकानों से बरामद की गई. इसके अलावा 26/11 के मुंबई हमले की जांच में हेडली के मुंबई प्रवास के दौरान उसके नाइक के संगठन आईआरएफ के साथ संबंध होने के साक्ष्य मिले थे.

कौन है जाकिर नाइक और क्या हैं उसके उपदेश?

51 साल का जाकिर नाइक कोई साधारण धार्मिक वक्ता नहीं है, उनका दावा है कि वह तुलनात्मक धर्म जैसे विषय पर बोलने के लिए मशहूर है. डाॅक्टरी की पढ़ाई करने वाले नाइक ने वर्ष 1991 में आईआरएफ का गठन किया था. तभी से उसने दवाह यानी धार्मिक प्रवचन देना शुरू किया. नाइक का वर्चस्व भारत में बाबरी मस्जिद गिरने के बाद बढ़ना शुरू हुआ.

नाइक दूसरे इमामों की तरह कुर्ता पायजामा नहीं पहनते, वह हमेशा तीन पीस सूट में नजर आते हैं, जिसकी पतलून एड़ी के ऊपर तक उठी होती है. वह गले में टाई और सिर पर टोपी पहनते हैं. उनके ज्यादातर प्रवचन अंग्रेजी में होते हैं या फिर अरबी में. उनके भाषणों का विषय ज्यादातर यह रहता है कि कैसे इस्लाम आज के विज्ञान से बेहतर है और बाकी सभी पंथों से भी.

यद्यपि वे अंतर धार्मिक संवाद की वकालत करते हैं लेकिन उसके उपदेशों की हकीकत कुछ और ही है. वह किसी अन्य धर्म का प्रचार करने का विरोध करता है. साथ ही वह गैर मुसलमानों के इस्लामिक देशों में मुस्लिम धार्मिक स्थलों में प्रवेश की भी मुखालफत करते हैं. वह कहते है धर्म के लिहाज से मुसलमान सर्वश्रेष्ठ हैं.

अपने श्रोताओं को सम्मोहित करने के लिए वह अपनी बात पूर्ण शांति के साथ रखते है. बीच-बीच में वह वेदों, बाइबल का भी उल्लेख करते हैं और जटिल वैज्ञानिक विश्लेषण भी करते हैं लेकिन अंत में वह यही सही ठहराते हैं कि इस्लाम इन सबसे बेहतर है.

‘विज्ञान का इस्लाम से मुकाबलाः युवा बांग्लादेशियों को मीडिया द्वारा पढ़ाई जा रही इस्लाम की नई परिभाषा’ शीर्षक वाले एक पत्र के शोधार्थी जी सैमुअल और एस रोजेरियो ने काफी विस्तार से बताया है कि नाइक की ही तरह सिलहैट की एक छात्रा मुन्नी और अन्य नौजवानों के बीच कैसे नाइक की लोकप्रियता बढ़ रही है.

इसका सारा श्रेय यूट्यूब, एक समर्पित टीवी चैनल और डीवीडी को जाता है. मुन्नी ने इन्हें बताया, ‘क्योंकि उसके पास सारे सवालों के जवाब हैं. वह केवल कुरान ही नहीं पढ़ता, वह गीता और बाइबल भी पढ़ता है और उसे इन सबके बारे में जबर्दस्त जानकारी है. वह सभी सवालों का जवाब बहुत अच्छी तरह से देता है.’

कई बार नाइक अन्य पंथों का उपहास भी उड़ाते देखे गए. यहां तक कि वह यह भी बताते हैं कि पत्नी को पीटना इस्लाम में क्यों बुरा नही है, कंडोम का इस्तेमाल एक इंसान को मारने के समान क्यों माना गया है. साथ ही वह कहते हैं, वे स्कूल जहां पर पढ़ने वाली लड़कियां अपना कौमार्य खो देती हैं, बंद कर दिए जाने चाहिए. एक बार तो जाकिर नाइक ने टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को भी सलाह दे डाली थी कि वे टेनिस खेलते वक्त भी ढ़ंग के कपड़े पहना करें. वह शरीया कानून मानते हैं और पत्थर से मौत देने के अलावा और भी बहुत सी बातों को धर्म सम्मत मानते है.

नाइक दुनिया भर में इस्लामी एकता के समर्थक हैं और वह किसी अलग धड़े को नहीं मानते. जबकि उनके उपदेशों में उनकी वहाबी सोच साफ-साफ जाहिर होती है. वह कुरान और हदीस की अपनी ही व्याख्या करते हैं और इसके मूल स्वरूप की बात करते हैं, जो कि वहाबियों के कब्जे में है.

नाइक एक कुशल वक्ता हैं, वो जानते हैं कि पश्चिम की बुराई करके आसानी से अपने अनुयायी बनाए जा सकते हैं

उसके इस ‘इस्लाम ब्रांड’ के कारण ही सउदी अरब उसे बार-बार पनाह देने की बात करता है. गत वर्ष ही इस्लाम की सेवा के लिए उसे किंग फैजल अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है. वह यह भी कहता है कि मुसलमानों को अल्लाह के अलावा और किसी से मदद नहीं मांगनी चाहिए, पैगम्बर से भी नहीं. इस वजह से सूफी, शिया और अहमदिया समुदायों के प्रति नफरत फैली है. इस्लामिक स्टेट ने इन समुदायों के खिलाफ हिंसा को इसी आधार पर सही ठहराया है.

कई बार नाइक के भाषणों में शियाओं पर हमले की बात कही जाती है.

2007 में मुंबई में आयोजित एक सभा में जब हजारों लोग नाइक को सुनने आए थे तब उसने करबला के शैतान याजिद के लिए शांति की कामना की थी. यह बात पैगम्बर के बंदों के लिए कही जाती है. शियाओं ने इस बयान का जमकर विरोध किया था. इस पर नाइक ने अजीबो गरीब सफाई दी थी कि पैगम्बर ने कहा है, ‘अगर आप किसी नाकाबिल-ए-तारीफ की तारीफ करते हैं तो कोई बात नहीं लेकिन अगर आप किसी को बददुआ देते हैं और वह इस लायक नहीं है तो बददुआ पलट कर आपको ही लगती है. इसलिए मैं कहता हूं किसी को भी बददुआ मत दो, याजिद को भी नहीं.’

नाइक एक कुशल वक्ता हैं और वह जानते हैं कि पश्चिम की बुराई करके आसानी से अपने अनुयायी बनाए जा सकते हैं. उनका मानना है कि अगर वह पश्चिम के खिलाफ साजिशी बातें करेंगे तो असंतुष्ट मुस्लिम युवा खुद ब खुद उनके पीछे आ जाएंगे, जो किसी न किसी रूप में स्वयं को ठगा महसूस करते हैं.

नाइक जानते हैं कि इन युवाओं को किस तरह से संतुष्ट करना है. इसका एक उदाहरण यह है कि उन्होंने 9-11 के हमलों के लिए ओसामा बिन लादेन की निंदा नहीं की और दावा किया कि यह अंदर का काम है. वह यही कहते रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति जाॅर्ज बुश सबसे बड़े आतंकी हैं और अगर बिन लादेन ने अमेरिका में आतंक बरपाया है तो हर किसी को आतंकी बन जाना चाहिए.

एक धार्मिक उपदेशक या व्याख्याता के रूप में दो दशक से भी अधिक समय के दौरान वह दुनिया भर में 2000 से ज्यादा ऐसे उपदेश दे चुका है. अपनी बात ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए उसने पीस टीवी नाम से एक इस्लमी चैनल भी शुरू किया है. इसका अंग्रेजी चैनल 2006 में, उर्दू चैनल 2009 में तथा बांग्ला चैनल 2011 में शुरू हुआ. इन चैनलों का दावा है कि इनके करोड़ों दर्शक हैं.

भारत, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम रहते हैं, उसे ऐसे लोगों से खबरदार रहने की जरूरत है. यहां तक कि दारुल-उलूम देवबंद ने भी फतवा जारी कर मुसलमानों को उसे मानने या उसका अनुयायी होने से मना किया है.

First published: 7 July 2016, 16:24 IST
 
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