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जाकिर नाइक ने खुद को बताया शांतिदूत, कहा मीडिया ट्रायल का हुआ शिकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 July 2016, 12:49 IST
(कैच)

ढाका आतंकी हमले के बाद लग रहे आरोपों पर इस्लामिक धर्म प्रचारक जाकिर नाइक ने पहली बार मीडिया को विस्तार से सफाई दी है. मुंबई के मझगांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आखिरकार उन्हें जगह मिल ही गई. इससे पहले भी उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द हो चुकी थी.

इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के जाकिर नाइक ने सऊदी अरब के मदीना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी सफाई दी. ढाका आतंकी हमले में शामिल कुछ आतंकियों के जाकिर नाइक के भाषणों से प्रभावित होने की खबर थी. इसके बाद से जाकिर नाइक सवालों के घेरे में थे. एक नजर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी गई उनकी सफाई के अहम बिंदुओं पर:

जाकिर नाइक की सफाई

  • निर्दोष लोगों पर हमला नहीं होना चाहिए.
  • फ्रांस के नीस में हमले की कड़ी निंदा करता हूं.
  • ढाका में छपी खबर के बाद से भारत में हुआ मेरा मीडिया ट्रायल.
  • मैंने कभी किसी को आतंकवाद के लिए प्रेरित नहीं किया.
  • मीडिया ने मेरे बयानों को पूरी तरह से नहीं दिखाया.
  • मैं शांति का दूत हूं, आतंक का नहीं. 
  • जन्नत भेजने के नाम पर आतंक गलत.
  • निर्दोष लोगों पर हमला नहीं होना चाहिए.
  • देशहित में आत्मघाती हमला हो तो वह जायज है.
  • इसके अलावा युद्ध में आतंकी हमला भी जायज है.
  • जान बचाने के लिए तो शराब पीना भी हराम नहीं है.
  • इस्लाम में बेगुनाहों का कत्ल हराम है.
  • आत्मघाती हमला इस्लाम में हराम है.
  • पीस टीवी को प्रसारण की इजाजत नहीं मिली.
  • मुस्लिम चैनल की वजह से भारत सरकार का अड़ंगा.
  • पुलिस ने आज तक किसी मामले में मुझे नहीं बुलाया.
  • सरकार के साथ हर तरह की जांच में सहयोग के लिए तैयार.
  • मैं हैदराबाद में आईपीएस अफसरों को भाषण दे चुका हूं.
  • हर महीने मैं हजारों लोगों से मैं मिलता हूं.
  • मुलाकात में बहुत से लोग मेरी फोटो खींचते हैं.

पहले रद्द हो चुकी थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

गौरतलब है कि पहले ये बताया गया था कि जाकिर नाइक 11 जुलाई को सऊदी अरब के मक्का से भारत आकर 12 जुलाई को मुंबई के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. लेकिन वो रद्द कर दी गई.

इसके उसके बाद 14 जुलाई की सुबह वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में रखी गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी रद्द कर दिया गया था. वजह बताई गई कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने जगह देने से मना कर दिया है.

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वहीं गुरुवार को जाकिर नाइक के वकील द्वारा दक्षिण मुंबई में ही महफिल हॉल को बुक कराया गया था. यह जगह बोहरा मुस्लिम समुदाय की थी. पहले तो महफिल हॉल ने बुकिंग को हरी झंडी दे दी, लेकिन देर रात डॉक्टर जाकिर नाइक को सूचित किया गया कि उनकी बुकिंग रद्द की जा रही है.

कौन हैं जाकिर नाइक और क्या हैं उनके उपदेश?

51 साल के जाकिर नाइक कोई साधारण धार्मिक वक्ता नहीं है, उनका दावा है कि वह तुलनात्मक धर्म जैसे विषय पर बोलने के लिए मशहूर है. डाॅक्टरी की पढ़ाई करने वाले नाइक ने वर्ष 1991 में आईआरएफ का गठन किया था. तभी से उन्होंने दवाह यानी धार्मिक प्रवचन देना शुरू किया. नाइक का वर्चस्व भारत में बाबरी मस्जिद गिरने के बाद बढ़ना शुरू हुआ.

नाइक दूसरे इमामों की तरह कुर्ता पायजामा नहीं पहनते, वह हमेशा तीन पीस सूट में नजर आते हैं, जिसकी पतलून एड़ी के ऊपर तक उठी होती है. वह गले में टाई और सिर पर टोपी पहनते हैं. उनके ज्यादातर प्रवचन अंग्रेजी में होते हैं या फिर अरबी में. उनके भाषणों का विषय ज्यादातर यह रहता है कि कैसे इस्लाम आज के विज्ञान से बेहतर है और बाकी सभी पंथों से भी.

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यद्यपि वे अंतर धार्मिक संवाद की वकालत करते हैं लेकिन उसके उपदेशों की हकीकत कुछ और ही है. वह किसी अन्य धर्म का प्रचार करने का विरोध करता है. साथ ही वह गैर मुसलमानों के इस्लामिक देशों में मुस्लिम धार्मिक स्थलों में प्रवेश की भी मुखालफत करते हैं. वह कहते है धर्म के लिहाज से मुसलमान सर्वश्रेष्ठ हैं.

अपने श्रोताओं को सम्मोहित करने के लिए वह अपनी बात पूर्ण शांति के साथ रखते है. बीच-बीच में वह वेदों, बाइबल का भी उल्लेख करते हैं और जटिल वैज्ञानिक विश्लेषण भी करते हैं लेकिन अंत में वह यही सही ठहराते हैं कि इस्लाम इन सबसे बेहतर है.

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‘विज्ञान का इस्लाम से मुकाबलाः युवा बांग्लादेशियों को मीडिया द्वारा पढ़ाई जा रही इस्लाम की नई परिभाषा’ शीर्षक वाले एक पत्र के शोधार्थी जी सैमुअल और एस रोजेरियो ने काफी विस्तार से बताया है कि नाइक की ही तरह सिलहैट की एक छात्रा मुन्नी और अन्य नौजवानों के बीच कैसे नाइक की लोकप्रियता बढ़ रही है.

इसका सारा श्रेय यूट्यूब, एक समर्पित टीवी चैनल और डीवीडी को जाता है. मुन्नी ने इन्हें बताया, ‘क्योंकि उसके पास सारे सवालों के जवाब हैं. वह केवल कुरान ही नहीं पढ़ता, वह गीता और बाइबल भी पढ़ता है और उसे इन सबके बारे में जबर्दस्त जानकारी है. वह सभी सवालों का जवाब बहुत अच्छी तरह से देता है.’

कई बार नाइक अन्य पंथों का उपहास भी उड़ाते देखे गए. यहां तक कि वह यह भी बताते हैं कि पत्नी को पीटना इस्लाम में क्यों बुरा नही है, कंडोम का इस्तेमाल एक इंसान को मारने के समान क्यों माना गया है.

साथ ही वह कहते हैं, वे स्कूल जहां पर पढ़ने वाली लड़कियां अपना कौमार्य खो देती हैं, बंद कर दिए जाने चाहिए. एक बार तो जाकिर नाइक ने टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को भी सलाह दे डाली थी कि वे टेनिस खेलते वक्त भी ढ़ंग के कपड़े पहना करें. वह शरीया कानून मानते हैं और पत्थर से मौत देने के अलावा और भी बहुत सी बातों को धर्म सम्मत मानते है.

नाइक दुनिया भर में इस्लामी एकता के समर्थक हैं और वह किसी अलग धड़े को नहीं मानते. जबकि उनके उपदेशों में उनकी वहाबी सोच साफ-साफ जाहिर होती है. वह कुरान और हदीस की अपनी ही व्याख्या करते हैं और इसके मूल स्वरूप की बात करते हैं, जो कि वहाबियों के कब्जे में है.

उनके इस ‘इस्लाम ब्रांड’ के कारण ही सउदी अरब उन्हें बार-बार पनाह देने की बात करता है. गत वर्ष ही इस्लाम की सेवा के लिए उन्हें किंग फैजल अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है. वह यह भी कहते हैॆ कि मुसलमानों को अल्लाह के अलावा और किसी से मदद नहीं मांगनी चाहिए, पैगम्बर से भी नहीं. इस वजह से सूफी, शिया और अहमदिया समुदायों के प्रति नफरत फैली है. इस्लामिक स्टेट ने इन समुदायों के खिलाफ हिंसा को इसी आधार पर सही ठहराया है.

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कई बार नाइक के भाषणों में शियाओं पर हमले की बात कही जाती है. 2007 में मुंबई में आयोजित एक सभा में जब हजारों लोग नाइक को सुनने आए थे तब उसने करबला के शैतान याजिद के लिए शांति की कामना की थी. यह बात पैगम्बर के बंदों के लिए कही जाती है.

शियाओं ने इस बयान का जमकर विरोध किया था. इस पर नाइक ने अजीबो गरीब सफाई दी थी कि पैगम्बर ने कहा है, "अगर आप किसी नाकाबिल-ए-तारीफ की तारीफ करते हैं तो कोई बात नहीं लेकिन अगर आप किसी को बददुआ देते हैं और वह इस लायक नहीं है तो बददुआ पलट कर आपको ही लगती है. इसलिए मैं कहता हूं किसी को भी बददुआ मत दो, याजिद को भी नहीं."

First published: 15 July 2016, 12:49 IST
 
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