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भारत-ईरान के बीच चाबहार पोर्ट समेत 12 अहम समझौतों पर दस्तखत

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 May 2016, 14:30 IST
(पीएमओ)
QUICK PILL
12 समझौतों पर मुहर
  • पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के ईरान दौरे पर हैं. आज भारत और ईरान के बीच 12 अहम समझौतों पर दस्तखत हुए. जिनमें चाबहार पोर्ट को लेकर भी एमओयू साइन हुआ है.
  • चाबहार बंदरगाह का करार भारत के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. इसके विकसित होने पर भारत, पाकिस्तान के बाहर-बाहर ईरान के रास्ते अफगानिस्तान तक पहुंच बना सकेगा.
  • पीएम नरेंद्र मोदी के ईरान दौरे में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है. भारत और ईरान के बीच आज 12 अहम समझौतों पर दस्तखत हुए हैं. साथ ही चाबहार बंदरगाह को विकसित करने का रास्ता भी साफ हो गया है. 

    इसके साथ ही भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत हो गई है. पीएम के दौरे में चाबहार पोर्ट सिटी में निवेश और पेट्रोकेमिकल के साथ ही ऊर्जा के क्षेत्र में समझौतों पर जोर था.

    समझौतों पर दस्तखत के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी भी मौजूद रहे. चाबहार पोर्ट के लिए साइन हुए एमओयू के तहत तीन हजार करोड़ का निवेश प्रस्तावित है.

    इसके अलावा विदेशी व्यापार और निवेश पर अहम समझौते को हरी झंडी मिली है. एलुमिनियम की साझा मैनुफैक्चरिंग पर भी समझौता हुआ है.

    चाबहार-जाहेदान रेलवे लाइन के लिए समझौते पर दोनों देशों ने अपनी मुहर लगाई है. इसके अलावा भारत-ईरान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साइंस-टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में भी अहम करार हुए हैं.

    साथ ही दोनों देशों के बीच नीतिगत वार्ता जारी रखने और राजनयिकों के प्रशिक्षण के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी समझौता हुआ है. विदेश मंत्रालय की ओर से पीएमओ के ट्विटर पेज पर इसकी आधिकारिक जानकारी दी गई है.

    चाबहार में 3000 करोड़ का निवेश

    मई 2014 में भारत और ईरान ने संयुक्त रूप से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया था कि जब ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे, तो दोनों संयुक्त रूप से चाबहार बंदरगाह का निर्माण करेंगे.

    दोनों पक्ष बंदरगाह पर भारत को दो डॉक 10 साल के लिए लीज पर देने को राजी हुए थे. यह ऐसा कदम है, जिससे भारत के कच्चे तेल और यूरिया आयात की परिवहन लागत 30 फीसदी कम हो जाएगी.

    चाबहार पोर्ट के पहले चरण के विकास के लिए समझौते पर हस्ताक्षर के साथ साथ भारत-ईरान से तेल आयात दोगुना करने की भी सोच रहा है. कुछ साल पहले ईरान उसका दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था.

    इसके साथ ही भारत, ईरान में एक विशाल गैस क्षेत्र के विकास के लिए अधिकार हासिल करना चाहता है. चाबहार बंदरगाह को लेकर हुए समझौते पर हस्ताक्षर के वक्त सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे.

    चीन को जवाब

    चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और यह भारत के लिए काफी सामरिक महत्व रखता है.

    यह फारस की खाड़ी के बाहर स्थित है और भारतीय पश्चिमी तट से इस पर आसानी से पहुंच बनाई जा सकती है. इसके जरिए भारत, पाकिस्तान के बाहर से होते हुए अफगानिस्तान तक पहुंचने का रास्ता बना सकेगा.

    इसके जरिए भारत, चीन और पाकिस्तान को जवाब भी देने की तैयारी में है. चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को विकसित करने के लिए निवेश का करार किया था. ऐसे में भारत ईरान के रास्ते सामरिक महत्व के इस इलाके में अफगानिस्तान तक पहुंच बना सकेगा.

    पीएम मोदी दो दिन की यात्रा पर रविवार शाम को तेहरान पहुंचे. आज सुबह प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके साथ ही उनके आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी (पीएमओ)
    First published: 23 May 2016, 14:30 IST
     
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