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13 देश जहां नास्तिक होने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ सकती है

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 January 2016, 22:30 IST

दुनिया के 13 देशों में नास्तिकता का इजाहर करने पर मौत की सजा मिल सकती है. ये सभी मुस्लिम बहुल देश हैं. इन सभी देशों में ईशनिंदा पर कड़ी सजा का प्रावधान है.

ये देश हैं, अफगानिस्तान, ईरान, मलेशिया, मालदीव, मारीतानिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन.

इंटरनेशनल ह्यूमनिस्ट एंड एथिकल यूनियन (आईएचईयू) की तरफ से साल 2013 में जारी की गई 'द फ्रीथॉट रिपोर्ट' में ये जानकारी दी थी. आईएचईयू नास्तिकों, अज्ञेयवादियों और संदेहवादियों की वैश्विक संस्था है.

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संस्था ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के 192 देशों का अध्ययन किया था. संस्था ने इन देशों के वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, मीडिया की रिपोर्टों और अदालती दस्तावेजों इत्यादि का विस्तृत अध्ययन किया.

रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम के कुछ लोकतांत्रिक देशों में भी ईश्वर में यकीन नहीं रखने वालों के साथ भेदभाव होता है. कुछेक मामलों में तो इसके लिए नागरिकों को सज़ा भी दी जा सकती है.

2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार यूरोप में केवल नीदरलैंड और बेल्जियम ऐसे देश हैं जहां पूरी 'स्वतंत्रता और समानता' है

संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, "दुनिया के ढेर सारे देश नास्तिकों और फ्रीथिंकर के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहते हैं."

रिपोर्ट में बताया गया था कि यूरोपीय संघ के 27 देशों में धार्मिक विश्वास के आधार पर भेदभाव किया जाता है. ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, माल्टा और पोलैंड में ईशनिंदा या धार्मिक भावनाएं आहत करने पर तीन साल तक की जेल हो सकती है.

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रिपोर्ट के अनुसार यूरोप में केवल नीदरलैंड और बेल्जियम ऐसे देश हैं जहां पूरी 'स्वतंत्रता और समानता' है. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में इस मामले में स्थिति 'संतोषजनक' है. दक्षिण अफ्रीका, लातिन अमेरिका और कैरिबाई द्वीपों में भी नास्तिकों को संस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

भारत में भी पिछले कुछ सालों में कई तर्कवादियों की हत्या हो चुकी है.

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First published: 30 January 2016, 22:30 IST
 
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