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मिस्र के दो चर्च में हुए जोरदार धमाकों में 36 की मौत, 100 से ज्यादा घायल

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 April 2017, 20:10 IST

मिस्र के दो गिरिजाघरों में रविवार को जोरदार धमाके हुए. इस हादसे में 36 लोगों की जान चली गई जबकि 100 से ज्यादा घायल हुए. फिलहाल किसी आतंकी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है.

जानकारी के मुताबिक पहला धमाका मिस्र की नील नदी के डेल्टा शहर तंता में हुआ. हालांकि धमाके की वजह साफ नहीं हो सकी है. जबकि दूसरा धमाका उत्तरी मिस्र स्थित एक चर्च में हुआ, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई.

पहला धमाका पाम डे के मौके पर सेंट जॉर्ज कॉप्टिक चर्च में हुआ. पाम डे कॉप्टिक ईसाई समुदाय का त्योहार है, जो ईसा मसीह के येरूशलम में प्रवेश की याद में मनाया जाता है. पिछले कुछ समय से मिस्र में रहने वाले ईसाई समुदाय पर कई हमले हो चुके हैं.

कॉप्टिक भी ईसाईयों का एक समूह है, जो मूल रूप से मिस्र में ही रहता है. इसके अलावा ये लोग सूडान और लीबिया में भी रहते हैं. इन्हें मध्य पूर्व का सबसे बड़ा ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय माना जाता है. ये लोग अलेक्जेंड्रिया के कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स चर्च को मानते हैं. इन लोगों का दावा है कि ये नस्ल-दर-नस्ल से ईसाई धर्म का पालन करते आ रहे हैं.

 

गौरतलब है कि मिस्र की कुल जनसंख्या में ईसाई समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 10 फीसदी है. आतंकी संगठन पिछले लंबे समय से ईसाइयों को लगातार निशाना बना रहे हैं. यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ ही हफ्ते बाद ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस मिस्र की यात्रा पर आने वाले हैं.

घटना के बाद राष्ट्रपति अब्दल फतह अल-सीसी ने कहा कि सैन्य अस्पतालों में घायलों को भर्ती कराने का आदेश दिया है. इसके बाद एंबुलेंस अथॉरिटी के प्रमुख मगदी अवाद ने कहा कि उत्तरी काहिरा से लगभग 120 किमी दूर स्थित चर्च में कम से कम 26 एंबुलेंस तैनात की गई हैं.

बता दें कि मिस्र में 2013 के बाद से लगातार हिंसा की वारदात हो रही हैं, जब सेना ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी का तख्ता पलट कर दिया था, और इस्लामपसंद लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी. मुर्सी मुस्लिम ब्रदरहुड से संबद्ध एक निर्वाचित राष्ट्रपति थे. मुर्सी के कुछ समर्थकों ने ईसाइयों पर आरोप लगाया कि उन्होंने राष्ट्रपति को अपदस्थ किए जाने का समर्थन किया.

रविवार को विस्फोट उस वक्त हुआ, जब कॉप्टिक ईसाई पाम रविवार का जश्न मना रहे थे. पाम रविवार ईसाई कैलेंडर का एक सबसे पवित्र दिन है, जब ईसा मसीह ने येरूसलम में प्रवेश किया था.

First published: 9 April 2017, 20:10 IST
 
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