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दुनिया की आधी आबादी एक तरफ़ और 8 अमीर दूसरी तरफ़

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 17 January 2017, 7:53 IST
(कैच न्यूज़)

ऑक्सफेम का ताज़ा ऑनलाइन सर्वे बताता है कि भारत और दुनिया में सबसे अमीर लोगों के बीच फासला पिछले साल की तुलना में और बढ़ गया है. भारत के सबसे अमीर 1% लोगों के पास देश की 58 प्रतिशत संपत्ति है यानी कि सिर्फ 57 धनकुबेरों के पास जितनी प्रॉपर्टी है, उतनी ही राशि देश की कुल 70 प्रतिशत आम आबादी के पास है. 

रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल 248 अरब डॉलर की संपत्ति में मुकेश अंबानी के पास 9.3 बिलियन डॉलर, दिलीप सांघवी के पास 16.7 अरब डॉलर और अजीम प्रेमजी के पास 15 अरब डॉलर की संपदा है. वहीं वैश्विक स्तर दुनिया में आठ लोगों के पास जितनी संपत्ति है उतनी ही दुनिया की 50 प्रतिशत गरीब आबादी के पास है, जिनकी संख्या 3.6 अरब ठहरती है. रिपोर्ट का यह भी दावा है इन सभी ने अपनी संपत्ति या तो विरासत में मिले पैसे से कमाई है या फिर वे ऐसे उद्योग में हैं जहां भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का बोलबाला है.

8 अमीर

1- बिल गेट्स

देश: अमरीका

सह-संस्थापक: माइक्रोसॉफ्ट

कुल पूंजी: 75 अरब डॉलर

2- अमानसियो ऑर्टिगा

देश: स्पेन

संस्थापक: रिटेल चैन जारा की पैरेेंट कंपनी इन्डिटैक्स के संस्थापक

कुल पूंजी: 67 अरब डॉलर

3- वॉरेन बफे

देश: अमरीका

कंपनी: बर्कशॉयर हैथवे निवेश कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक

कुल पूंजी: 60.8 अरब डॉलर

4- कार्लोस स्लिम हेलु

देश: मैक्सिको

संस्थापक: ग्रुपो कॉर्सो कंपनी, जो कि मैक्सिको की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी टेलमैक्स व अमरीका मोविल टेलिकॉम चलाती है.

कुल पूंजी: 50 अरब डॉलर

5- जेफ बेजोस

देश: अमरीका

संस्थापक और सीईओ: अमेजॉन

कुल पूंजी: 45.2 अरब डॉलर

6- मार्क जुकरबर्ग

देश: अमरीका

सह-संस्थापक व सीईओ: फेसबुक

कुल पूंजी: 44.6 अरब डॉलर

7- लैरी इलिसन

देश: अमरीका

सह-संस्थापक व सीईओ: ओरेकल

कुल पूंजी: 43.6 अरब डॉलर

8- मिचेल ब्लूमबर्ग

देश: अमरीका

मालिक: ब्लूमबर्ग एलपी

कुल पूंजी: 40 अरब डॉलर

रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर दस लोगों में से सात लोग ऐसे देश में रहते हैं जहां कि पिछले 30 सालों में असमानता बढ़ती दर्ज की गई है. अध्ययन में दावा है कि अगर इसी तरह से असमानता बढ़ती रही तो दुनिया आगामी 25 साल के अंदर ही पहला खरबपति देख लेगी. 

बढ़ती असमानता के कारण?

ऑक्सफेम के मुताबिक इस असमानता की एक बड़ी वजह है बड़े कॉरपोरेट घरानों और शीर्ष पर मौजूद लोगों द्वारा टैक्स हैवन देशों के एक नेटवर्क का इस्तेमाल कर सही टैक्स की देनदारी से बच निकलना.

इसके अलावा बड़ी असमानता की अन्य वजह हैं, मजदूरों या कर्मियों को दिए जाने वाले वेतन और उत्पादकों के दाम को कम से कम रखने के साथ ही अपनी आय को वापस कारोबार में कम से कम निवेश करना. साथ ही सरकार पर दबाव डालकर अपने पक्ष में नीतियां बनवा लेना भी असमानता का एक बड़ा कारण है.

रिपोर्ट में 'पनामा पैपर' लीक का हवाला देते हुए बताया गया है कि कैसे दुनिया के ये महाधनवान अपने टैक्स का उचित हिस्सा देने से बचते हैं और टैक्स हैवन्स देशों में पैसा जमा करते हैं.

ऑक्सफेम ने कहा है कि भारत सरकार को टैक्स पर दी जाने वाली रियायतें खत्म कर देनी चाहिए

ऑक्सफेम ने कहा है कि भारत सरकार को टैक्स पर दी जाने वाली रियायतें खत्म कर देनी चाहिए और कॉरपोरेट टैक्स को कम करने का विचार त्याग देना चाहिए. ऑक्सफेम ने कहा कि सरकार को ऐसी कंपनियों का ही समर्थन करना चाहिए जो कि अपने कामगरों तथा समाज के लाभ के लिए काम करती हैं न कि सिर्फ अपने शेयरधारकों के लिए.

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ल्ड बैंक का भी स्पष्ट कहना है कि अगर दुनिया के लीडर्स ने असमानता घटाने के अपने प्रयासों में तेजी नहीं लाई तो हम 2013 तक अत्यधिक गरीबी हटाने के लक्ष्य को नहीं पा सकेंगे. ऑक्सफेम की यह रिपोर्ट और फोर्ब्स सूची में अमीरों की जो सूची गिनाई गई है उसमें कॉफी समानता है.

गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले इस संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर इसी तरह गरीबी बढ़ती रही तो भूकंप स्तरीय बड़े राजनीतिक परिवर्तनों जैसे ट्रंप का राष्ट्रपति चुना जाना तथा ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना, को रोका नहीं जा सकेगा.

ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानिमा का कहना है कि यह देखना शर्मनाक है कि दुनिया के कुछ हाथों में इतना अधिक पैसा सिमटा हुआ है जबकि प्रत्येक दस में एक व्यक्ति दो डॉलर से भी कम पैसे प्रति दिन पर गुजारा करने को मजबूर है. ब्यानिमा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि असमानता के लाखों लोग गरीबी के जाल में फंसते जा रहे हैं. यह हमारे समाज को तोड़ रही है तथा लोकतंत्र को कमजोर कर रही है.

आपको बता दें कि इसी तरह की रिपोर्ट में पिछले साल ऑक्सफेम ने दावा किया था कि दुनिया के 62 लोगों के पास जितना पैसा है उतना ही दुनिया की आधी आबादी के पास है. संगठन के अनुसार अब उनके पास स्विस बैंक क्रेडिट सुएज के हवाले से बेहतर डाटा आ सका है, जिसके कारण यह संख्या 62 से घटकर 8 पर आ गर्इ् है.

ऑक्सफेम ने रिपोर्ट में कुछ ऐसे उपायों को भी सुझाया है जो अगर लागू किए जाएं तो उनसे असमानता को कम करने में मदद मिलेगी. इन उपायों में संपत्ति पर कर की अधिक दर, जन सेवाओं तथा रोजगारों पर अधिक निवेश को वरीयता दी गई है. साथ ही सरकारों के बीच कामगरों को बेहतर वेतन दिलाने के लिए परस्पर समन्वय और ऐसे प्रयासों को रखा गया है जिससे कि अमीर लोग अपनी टैक्स देनदारी से न बच पाएं और न ही कामगरों का शोषण कर पाएं.

First published: 17 January 2017, 7:53 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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