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चीन के कानून से नहीं बच सके माओ, सरकार ने गिरा दी मूर्ति

आशीष पाण्डेय | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • माओत्से तुंग ने 1949 में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की थी. चीनी क्रांति के जनक माअो ने मार्क्सवाद-लेनिनवाद को सैन्य रणनीति से जोड़कर \'माओवाद\' के नाम से एक नया सिद्धांत पूरी दुनिया के सामने रखा.
  • माओ की इस विशालकाय प्रतिमा की स्थापना के लिए किसानों और स्थानीय उद्यमियों से चंदा लिया गया था.

चीन में माओत्से तुंग की सुनहरे पेंट वाली विशाल प्रतिमा को तोड़ दिया गया है. लोहे से बनी 120 फुट उंची इस प्रतिमा को बनाने में करीब 3.07 करोड़ रुपये का खर्च आया था.

हेनान प्रांत के तोंगसू काउंटी में बनी इस प्रतिमा की चर्चा पूरी दुनिया में थी. न्यूयार्क डेली न्यूज के मुताबिक प्रतिमा की स्थापना के लिए सरकार की अनुमति नहीं ली गई थी.

माओ ने चीन में 1949 में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की थी. चीनी क्रांति के जनक माअो ने मार्क्सवाद-लेनिनवाद को सैन्य रणनीति से जोड़कर माओवाद के नाम से एक नया सिद्धांत पूरी दुनिया के सामने रखा.

टाइम पत्रिका ने माओ को 20वीं सदी के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शुमार किया है

खेत में बैठे माओ की मुद्रा वाली इस विशालकाय प्रतिमा की स्थापना के लिए किसानों और स्थानीय उद्यमियों से चंदा लिया गया था. 

प्रतिमा के गिराए जाने के बाद से पूरे विश्व से इस मामले पर लोगों की प्रतिक्रिया आ रही है. द गार्जियन के मुताबिक दुनिया में ज्यादातर लोगों का कहना है कि जितनी धनराशि इस प्रतिमा को बनाने में खर्च की गई, उसे स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में लगाया जाना चाहिए था.

इसके अलावा एक और प्रश्न उठ रहा है कि क्या वाकई में माओ इतनी बड़ी प्रतिमा के हकदार हैं? उनके शासन के दौरान 1950 के आखिर में हेनान प्रांत में अकाल और भूख से लगभग 30 लाख लोग मारे गये थे.

First published: 9 January 2016, 3:12 IST
 
आशीष पाण्डेय @catchhindi

संवाददाता, कैच हिंदी. बीएचयू से पॉलिटिकल साइंस(आनर्स). जामिया मिल्लिया इस्लामिया एमसीआरसी से मॉस कॉम. मल्टी-मीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर डिजिटल, टेलीविज़न, डॉक्यूमेंट्री, रेडियो, सोशल मीडिया कैंपेनिंग, इलेक्शन कैंपेनिंग के लिए काम कर चुके हैं.

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