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ईरान में पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 May 2016, 13:24 IST
(पीएमओ )

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर रविवार को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे. बीते 15 साल में ईरान की यात्रा पर आने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं.

आज पीएम मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया. राष्ट्रपति हसन रोहानी की मौजूदगी में पीएम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. पीएम मोदी आज तेहरान में ईरान के बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. इसके अलावा वो भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.

पीएम मोदी ईरान के राष्ट्रपति रोहानी के साथ लंच करेंगे. साथ ही भारत-अफगानिस्तान-ईरान त्रिकोणीय बैठक होगी. समझौतों पर हस्ताक्षर के बाद एक प्रेस स्टेटमेंट जारी होगा. शाम को पीएम ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी से मुलाकात करने वाले हैं.

पीएम मोदी के एजेंडे में संपर्क, ऊर्जा, सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार शामिल है. ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के लिए भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर दस्तखत होगा.

पीएम मोदी ने कहा कि संपर्क, व्यापार, निवेश, ऊर्जा साझेदारी, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने को प्राथमिकता दी जाएगी. पीएम रविवार की शाम भारतीय समयानुसार करीब 7 बजे तेहरान पहुंच गए थे. यहां एयरपोर्ट पर उनका शानदार स्वागत किया गया. सबसे पहले पीएम ने यहां के एक गुरुद्वारे में मत्था टेका.

गार्ड ऑफ ऑनर मिलने के बाद पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हसन रोहानी के साथ मुलाकात करते हुए आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत की. इस दौरान दोनों पक्षों की तरफ से प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी के साथ पीएम नरेंद्र मोदी (पीएमओ)

चाबहार पोर्ट के करार पर लगेगी मुहर

विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे का सबसे अहम पहलू चाबहार पोर्ट सिटी में निवेश और ईरान में पेट्रोकेमिकल, यूरिया खाद कारखाने का निर्माण है.

2014 के मई में भारत और ईरान ने संयुक्त रूप से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया था कि जब ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे, तो दोनों संयुक्त रूप से चाबहार बंदरगाह का निर्माण करेंगे.

दोनों पक्ष बंदरगाह पर भारत को दो डॉक 10 साल के लिए लीज पर देने को राजी हुए थे. यह ऐसा कदम है, जिससे भारत के कच्चे तेल और यूरिया आयात की परिवहन लागत 30 फीसदी कम हो जाएगी.

चाबहार पोर्ट के पहले चरण के विकास के लिए समझौते पर हस्ताक्षर के साथ साथ भारत-ईरान से तेल आयात दोगुना करने की भी सोच रहा है. कुछ साल पहले ईरान उसका दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था.

इसके साथ ही भारत, ईरान में एक विशाल गैस क्षेत्र के विकास के लिए अधिकार हासिल करना चाहता है. चाबहार बंदरगाह पर हस्ताक्षर के समय भारत के सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहेंगे.

चाबहार से चीन को जवाब

चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और यह भारत के लिए काफी सामरिक महत्व रखता है.

यह फारस की खाड़ी के बाहर स्थित है और भारतीय पश्चिमी तट से इस पर आसानी से पहुंच बनाई जा सकती है. इसके जरिए भारत, पाकिस्तान के बाहर से होते हुए अफगानिस्तान तक पहुंचने का रास्ता बना सकेगा.

इसके जरिए भारत, चीन और पाकिस्तान को जवाब भी देने की तैयारी में है. चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को विकसित करने के लिए निवेश का करार किया था. ऐसे में भारत ईरान के रास्ते सामरिक महत्व के इस इलाके में अफगानिस्तान तक पहुंच बना सकेगा.

First published: 23 May 2016, 13:24 IST
 
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