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तापी गैस पाइपलाइन से बदल सकता है कि पश्चिम एशिया और भारत का गणित

अलीशा मथारू | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • रविवार को तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत को आपस में जोड़ने वाली गैस पाइपलाइन परियोजना की नींव रखी गयी.
  • इस पाइपलाइन से एशियाई देशों के आपसी संबंध में नया बदलाव आ सकता है. दक्षिण एशियाई देशों में गैस की कमी का खत्म होगा संकट.

रविवार को तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) पाइपलाइन का तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अशगबात में उद्घाटन हुआ. 7.6 अरब डॉलर की लागत वाली पाइपलाइन का काम शुरू होना सपना सच होने जैसा है.

अभूतपूर्व समारोह में भारत के उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबानगुली बरदिमुहामदोफ शामिल हुए.

इस पाइपलाइन से जुड़े खास तथ्य

  • लंबाई- 1,735 किलोमीटर
  • क्षमता- 90 मिलियन (नौ करोड़) घन मीटर गैस प्रति दिन(एमएमएसीएमडी)  (यानी एक साल में करीब 33 अरब घन मीटर गैस)
  • भारत और पाकिस्तान को हर रोज 38 एमएमएसीएमडी गैस मिलेगी और अफगानिस्तान को 14 एमएमएसीएमडी.
  • परियोजना का काम दिसंबर, 2018 तक पूरा होने की उम्मीद
  • मियाद- 30 साल
  • गैस दक्षिण-पूर्वी तुर्कमेननिस्तान के गैल्काइनिश/दौलताबाद गैस फील्ड से आएगी
  • इसे दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड में एक माना जाता है. एक अनुमान के मुताबिक यहां करीब 13,100 अरब घन मीटर गैस रिजर्व है.

नफा-नुकसान

इस परियोजना की परिकल्पना पहली बार अक्टूबर, 1997 में की गई थी लेकिन अब तक इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका था. संबंधित देशों की सरकारों के बीच गैस पाइपलाइन फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (जीपीएफए) और गैस सेल एंड पर्चेज एग्रीमेंट (जीएसपीए) पर 2010 से 2013 के बीच दस्तखत हुए.

समझौते की राह में सबसे बड़ी चुनौती इस पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर थी. यह पाइपलाइन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के उन इलाकों से होकर गुजरेगी जहां तालिबान का नियंत्रण माना जाता है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) नवतेज सरना ने हाल ही में कहा था, "इसमें कोई शक नहीं इस परियोजना में सुरक्षा एक अहम मुद्दा है."

भारत के लिए तापी परियोजना कई मायनों में अहम है. अगर ये परियोजना सफल रही तो मध्य एशिया और भारत को रेल और सड़क से जोड़ने वाली दूसरी कई परियोजनाओं के शुरुआत की राह खुल जाएगी. इस तरह के सहयोग से पूरे क्षेत्र का आर्थिक नक्शा बदल सकता है.

तापी गैस पाइपलाइन सफल रही तो मध्य एशिया से भारत को जोड़ने वाली सड़क और रेल परियोजनाओं की राह खुल जाएगी

शेवरॉन कॉर्प, एक्सॉन मोबिल और टोटल एसए जैसी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियां पाइपलाइन बनाने में इच्छुक थीं लेकिन ये सभी प्रस्ताव किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सके. इसकी बड़ी वजह तुर्कमेनिस्तान का कानून है जिसके अनुसार यहां के किसी गैस फील्ड का मालिकाना हक विदेशी कंपनी को नहीं दिया जा सकता. 

साझा कंपनी

परियोजना से जुड़े चारों देशों की राष्ट्रीय तेल कंपनियों ने आपस में मिलकर टीएपीआई कॉर्प लिमिटेड नामक कंपनी बनाई. भारत के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अशगबात में अगस्त में हुई बैठक में हिस्सा लिया था. अक्टूबर में तुर्कमेनगैज़, अफगान गैस एंटरप्राइज, इंटर स्टेट गैस सिस्टम (पाकिस्तान) और गेल (भारत) ने 25-25 की हिस्सेदारी वाली साझा कंपनी टीएपीआई बनायी.

तुर्कमेनिस्तान फिलहाल चीन, रूस और ईरान को गैस आपूर्ति करता है. हाल में तुर्कमेनिस्तान के संबंध रूस से तल्ख हो गये. जुलाई में तुर्कमेनिस्तान ने आरोप लगाया कि रूस की गैजप्रॉम ने इस साल दी गई गैस का पैसा नहीं चुकाया है. वहीं रूस ने अपने गैस खरीद को कम करके चार अरब घन मीटर कर दिया है.

पाइपलाइन का रूट

पाइपलाइन शुरू होने के बाद यह तुर्कमेनिस्तान के गैस फील्ड से निकलकर अफगानिस्तान के हेरात,फराह और हेलमंद प्रांत से होकर कांधार आएगी.

कांधार के बाद पाइपलाइन पाकिस्तान के क्वेटा में प्रवेश करेगी. उसके बाद ये भारत में फाजिल्का में आकर समाप्त होगी.

अंतिम तौर पर इस रूट में बदलाव हो सकता है क्योंकि तुर्कमेनिस्तान से भारत तक आने वाले कई संभावित रूट हैं.

ड्रैगन ऑयल की भूमिका

दुबई स्थित कंपनी ड्रैगन ऑयल कैस्पियन सागर के तुर्कमेन क्षेत्र में स्थित चेलेकेन गैस फील्ड को विकसित कर रही है.

ड्रैगन ऑयल नेचुरल गैस पाइपलाइन परियोजना में 10 अरब डॉलर निवेश करने पर विचार कर रही है.

कंपनी ने कहा है, "कई पश्चिमी कंपनियों के विफल हो जाने के बाद इस परियोजना के लिए हिम्मत बढ़ाने वाली खबर है."

हालांकि कंपनी की भागीदारी को लेकर कुछ सवाल भी खड़े होने लगे हैं.

तापी के माध्यम से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ड्रैगन ऑयल को तुर्कमेनिस्तान के गैस फील्ड से तापी को जोड़ने वाली पाइपलाइन बनानी होगी. यह दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है. ऐसे में सवाल पूछा जा रहा है कि कोई कंपनी इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को विकसित करने में लगने वाली भारी राशि क्यों खर्च करना चाहेगी?

अगर तापी परियोजना सफल हो जाती है तो एशियाई देशों के संबंधों में बड़ा बदलाव आ सकता है

इसका एक संभावित जवाब यह दिया जा रहा है कि ड्रैगन ऑयल शायद पूरब से पश्चिम से जोड़ने वाली इस गैस पाइपलाइन के माध्यम से भविष्य में यूरोप तक गैस आपूर्ति की संभावना देख रही हो.

ऐसी स्थिति में उसे ईरान से कड़ी टक्कर मिलेगी क्योंकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंध हटा लेने के बाद ईरान यूरोप में अपने बाजार को बचाने के लिए पूरा जोर लगा देगा.

अगर तापी परियोजना सफल हो जाती है तो संबंधित देशों के आपसी संबंधों में बड़ा बदलाव आ सकता है. इसके बाद मध्य एशिया लंबे समय बाद रूस और चीन के घेरे से बाहर निकल सकेगा.

ऐसे में ये सभी देश इस पाइपलाइन के सपने को पूरा करने की दिशा में किस तरह आगे बढ़ते हैं इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी.

First published: 14 December 2015, 8:49 IST
 
अलीशा मथारू @almatharu

सब-एडिटर, कैच न्यूज़.

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