Home » इंटरनेशनल » After the US announcement, China is waiting to enter Afghanistan, keeping an eye on its resources
 

अब चीन कर रहा है अफगानिस्तान में घुसने का इंतज़ार, यहां के संसाधनों पर नजर, समझिए पूरी कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 July 2021, 8:53 IST

अफगानिस्तान (Afghanistan) से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की घोषणा के बीच बीजिंग युद्धग्रस्त देश में प्रवेश करने के अवसर की प्रतीक्षा कर रहा है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए अफगानिस्तान का भूराजनीतिक (geopolitical importance) महत्व है. चीनी सेना ईरान या पाकिस्तान के माध्यम से अरब सागर तक पहुंच सकती है. फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार चीन युद्धग्रस्त देश ईरान और मध्य पूर्व तक पहुंच प्रदान कर सकता है और हिंद महासागर और अफ्रीका के लिए एक मार्ग प्रदान कर सकता है.

फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में लेखक और सीसीपी विशेषज्ञ गॉर्डन चांग ने कहा "चूंकि चीनी अधिक शातिर हैं, हां, मुझे लगता है कि उनके पास अफगानिस्तान में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक बेहतर मौका होगा. लेकिन एक बेहतर मौका होने का मतलब यह नहीं है कि वे सफल होंगे. मुझे लगता है कि उन्हें असफल होने में अधिक समय लगेगा."


उन्होंने कहा "हमने चीन को अनियंत्रित क्षेत्रों में संबंध स्थापित करते देखा है, लेकिन यह उनके लिए एक बहुत बड़ी प्रतिबद्धता होगी. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान मुख्य भूमि चीन की सीमा से लगे 14 देशों में से एक है.यह कुछ दूर की प्रतिबद्धता नहीं है जहां वे सिर्फ दांव लगा सकते हैं, एक बार चीन इसमें चला जाता है तो उनके लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा."

चीनी नेता चीन के अंतरराष्ट्रीय 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के माध्यम से अफगानिस्तान के बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए काबुल के अधिकारियों के साथ एक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. ट्रिलियन-डॉलर के कार्यक्रम ने कई परियोजनाओं को वित्त पोषित किया है, आम तौर पर पूरे एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व में हवाई अड्डों, सड़कों और बंदरगाहों जैसे कठिन बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया जाता है.

उन्होंने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण के बदले गरीब देशों को बुनियादी ढांचा ऋण प्रदान करके अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है, जिनमें से अफगानिस्तान के पास बहुत कुछ है.'' अफगान के विशाल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन चीन का लंबे समय से लक्ष्य रहा है.

चांग के अनुसार अफगान सरकार के साथ सौदा कथित तौर पर 62 बिलियन अमरीकी डालर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का विस्तार करेगा, एक परियोजना 2013 में शुरू हुई थी. बीजिंग उम्मीद करेगा कि तालिबान अपने साथी मुसलमानों, चीन के शिनजियांग प्रांत में 12 मिलियन उइगरों के नरसंहार उत्पीड़न की अनदेखी करेगा, जो अफगान और पाकिस्तानी सीमाओं के करीब बैठता है.

इस बीच चांग का मानना है कि अमेरिका का अफगानिस्तान से हटने का फैसला सही था. उन्होंने कहा "अभी संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण खतरा अफगानिस्तान में तालिबान नहीं है, बल्कि चीन है."

अफगानिस्तान में अमेरिका का सैन्य मिशन 31 अगस्त को समाप्त, पढ़िए बाइडेन ने क्या कहा ?

First published: 10 July 2021, 8:53 IST
 
अगली कहानी