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पाउडर से गर्भाशय कैंसर: जॉनसन एंड जॉनसन पर 482 करोड़ का जुर्माना

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 February 2016, 15:51 IST

अमेरिका की एक महिला को बेबी पाउडर लगाने की वजह से गर्भाशय कैंसर हो गया और उसकी मौत हो गई. इसके बाद महिला के बेटे ने अदालत में मुकदमा दायर किया. जिसके बाद अदालत ने जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी को दोषी पाते हुए करीब 482 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने का फैसला सुनाया है. 

सेंट लुइस सर्किट कोर्ट में करीब 60 लोगों द्वारा इस संबंध में दायर मुकदमे में अलाबामा, बर्मिंघम के जैकी फॉक्स शामिल थे. बीमारी की जानकारी होने के दो वर्ष बाद अक्तूबर 2015 में मां (62) की मौत होने पर उनके बेटे ने यह वाद दाखिल किया था. 

फ्लोरिडा स्थित जैकसनविले के मार्विन सैल्टर ने कहा कि उनकी दिवंगत मां इस ब्रांड के टैल्कम पाउडर को दशकों से इस्तेमाल कर रहीं थीं. उन्होंने कहा, "यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया था. यह जाना माना नाम है."

तीन हफ्ते के ट्रायल के बाद सोमवार को इस पर पांच घंटे तक बहस चली. फॉक्स के वकील ने कहा जूरी का यह फैसला देश में इस जैसे एक हजार से ज्यादा लंबित मामलों के बाद आया है जिसमें उन्होंने मुआवजा स्वरूप पैसे देने की बात कही.

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जूरी ने कहा कि फॉक्स को वास्तविक नुकसान के लिए करीब 67 करोड़ रुपये जबकि दंड स्वरूप में करीब 415 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए. दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर उत्पाद बनाने वाली कंपनी ने जहां इस फैसले के खिलाफ अपील की वहीं, वकील जेम्स ऑन्डर ने इसका स्वागत किया है.

न्यू जर्सी बेस्ड कंपनी पर पहले भी स्वास्थ्य और उपभोक्ता समूहों द्वारा उसके उत्पादों में हानिकारक तत्व होने का आरोप लगता रहा है. इसमें जॉनसंस का नो मोर टियर्स बेबी शैंपू भी शामिल है.

मई 2009 में कई संयुक्त समूहों ने सेफ कॉस्मेटिक्स कैंपेन छेड़कर जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी पर इस बात का दबाव बनाया था कि वो अपने बेबी और अडल्ट पर्सनल केयर उत्पादों से सवालिया तत्वों को हटाए. तीन सालों तक दायर याचिकाओं, विरोधी प्रचार और कंपनी के उत्पादों का इस्तेमाल बंद करने की धमकी के बाद कंपनी ने 2012 में उनकी मांगों पर सहमति जताई. कंपनी ने कहा कि वो सन 2015 से अपने उत्पादों से संभावित कैंसरकारी तत्वों मसलन 1, 4-डाईऑक्सेन और फॉर्मैल्डिहाइड को हटा देगी.

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कंपनी की प्रवक्ता कैरोल गुडरिच ने कहा कि कंपनी इस पर कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रही है. एक लिखित बयान में उन्होंने कहा कि यह फैसला "तमाम उत्पादों में कॉस्मेटिक तत्व के रूप में टैल्क सुरक्षित होता है को सिद्ध करने वाले दशकों पुराने विज्ञान के खिलाफ है." इस बाबत उन्होंने यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की संबंधित शोधों का भी जिक्र किया.

वहीं, अदालत ने कंपनी को इस बात का भी दोषी पाया कि उसके टैल्कम पाउडर से कैंसर की संभावना के बारे में लोगों को चेताने में भी वह नाकाम रही. भारत में भी इससे पहले कंपनी के खिलाफ कुछ मामले आ चुके हैं. 

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First published: 24 February 2016, 15:51 IST
 
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