Home » इंटरनेशनल » american newspaper: pakistan not cross his limit regarding india
 

अमेरिकी अखबार: मोदी के सब्र का इम्तिहान ना ले पाकिस्तान

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:24 IST
(एजेंसी)

कश्मीर के उरी सेक्टर में सेना के बटालियन मुख्यालय पर हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव पर विश्व के मीडिया जगत से कई तरह की खबरें आ रही हैं.

अमेरिका के एक अखबार ने दावा किया है कि पाकिस्तान रणनीतिक संयम की भारत की नीति को अधिक समय तक हल्के में लेने की गलती न करे और अगर इस्लामाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग के प्रस्ताव को खारिज कर देता है तो यह देश को 'अछूत राष्ट्र' बनाने की दिशा में एक कदम होगा.

वहीं ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में एक लेख में कहा गया, "मोदी अभी संयम बरत रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान लगातार इसे हल्के में लेने की गलती न करे. अगर सहयोग का मोदी का प्रस्ताव ठुकरा दिया जाता है तो यह पाकिस्तान को पहले से भी अधिक अछूत राष्ट्र बनाने की दिशा में एक कदम होगा."

लेख में आगे लिखा गया है, "यदि (पाकिस्तानी) सेना सीमा पार हथियार एवं आतंकी भेजना जारी रखती है तो भारत के प्रधानमंत्री के पास कार्रवाई करने के लिए मजबूत स्पष्टीकरण होगा."

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर नैतिकतापूर्ण व्यवहार करने के लिए भारत का सम्मानजनक दर्जा है, लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस एवं भाजपा सरकारों में स्पष्ट रूप से इसे दिखाने का साहस नहीं था.

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने कहा कि इसके कारण ‘‘रणनीतिक संयम’’ की नीति बनी, जिसका अर्थ यह हुआ कि पाकिस्तान को पर्दे के पीछे की उसकी आतंकवादी गतिविधियों के लिए कभी भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा, भले ही ये आतंकवादी हमले कितने भी जघन्य क्यों न हों.

अखबार ने कोई भी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लेने के लिए मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि हालांकि उन्होंने सैन्य कार्रवाई नहीं की, लेकिन उन्होंने इसकी जगह संकल्प लिया कि यदि (पाकिस्तानी) सेना आतंकवादी समूहों का समर्थन करना बंद नहीं करती है तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए कदम उठाएंगे.

अखबार ने लेख में कहा है कि वह 1960 की सिंधु जल संधि को रद्द करने पर विचार कर रहे हैं जो सिंधु नदी के जल पर पाकिस्तान के अधिकारों की रक्षा करती है.

इसके अलावा अखबार में यह भी कहा गया है कि वह व्यापार में सबसे तरजीही राष्ट्र का दर्जा भी पाकिस्तान से वापस ले सकते हैं. पाकिस्तान को 1996 में यह दर्जा दिया गया था जिसका उसने कभी प्रतिफल नहीं दिया.

First published: 28 September 2016, 4:00 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी