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चांद पर इंसान के पहुंचने के 50 साल पूरे, जानिए कैसे पृथ्वी से आसमान में लगाई थी छलांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 July 2019, 11:34 IST

ISRO 22 जुलाई को Chandrayaan-2 की लॉन्चिंग करने जा रहा है. इससे पहले 15 जुलाई को तकनीकी खामी के चलते इसकी लॉन्चिंग रोक दी गई थी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से 50 साल पहले ही इंसान चांद पर जा चुका है और वहां चहलकदमी कर चुका है. दरअसल, आज से ठीक 50 साल पहले यानि 20 जुलाई, 1969 को इंसान ने चांद की सतह पर पहली बार कदम रखा था.

इसी के साथ इंसान ने अबतक का सबसे बड़ा मिशन पूरा कर लिया था. जो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ी कामयाबी थी. 16 जुलाई को अपोलो-11 अभियान के तहत तीन अंतरिक्षयात्रियों ने चांद के लिए उड़ान भरी थी. जिनमें शामिल थे नील आर्मस्ट्रांग, एडविन एल्ड्रिन और माइकल कोलिंस.

पहली बार पृथ्वी से बाहर निकलकर और आसमान में दिखाई देने वाले चमकीले तारों चांद पर पहुंचने की ये पहल अमेरिका ने की थी. जिसके लिए अमेरिका ने अपोलो कार्यक्रम शुरु किया. अमेरिका ने सबसे पहले अपोलो-1 से लेकर अपोलो-10 नाम से अभियान चलाए. जिसमें इस पूरी पृक्रिया की जांच की गई.

अमेरिका ने अपोलो-11, अपोलो-12, अपोलो-14, अपोलो-15, अपोलो-16 और अपोलो-17 से चांद पर इंसानों को उतारा. साथ ही इंसानों की धरती पर वापसी सुनिश्चित की गई. इस दौरान अपोलो-13 में खराबी आ गई थी जिसके चलते यह चांद पर नहीं उतर सका. चांद पर उतरे सभी छह अमेरिकी अभियान वापसी में अपने साथ भारी मात्रा में वैज्ञानिक आंकड़े जुटाकर लाए थे.

अंतरिक्षयात्री चांद की सतह के 400 किग्रा नमूने भी धरती पर लाने में सफल रहे थे. वहां की मिट्टी की बनावट, क्षुद्र ग्रहों, चांद पर कंपन, हीट फ्लो, चुंबकीय क्षेत्र और सौर हवाओं को लेकर तमाम प्रयोग किए गए. 20 अप्रैल, 1972 को इस कड़ी में अपोलो-17 आखिरी सफल अभियान था. इसके बाद अमेरिका ने अपोलो कार्यक्रम को बंद कर दिया.

इस कार्यक्रम का अपोलो-11 अभियान पहला ऐसा अभियान था जिसके द्वारा पहली बार इंसान चांद पर पहुंचा था. चांद पर लैंडिंग करने के बाद आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन चांद की सतह पर दो घंटे चहलकदमी करते रहे थे. इस दौरान इन दोनों ने कई प्रयोग किए. नमूने जुटाए और अमेरिकी झंडे भी गाड़ा. इस तरह से इंसान ने चांद की सतह पर कुल 21 घंटे, 36 मिनट का समय बिताया. हालांकि अधिकांश समय चांद पर उतरे ल्युनर माड्यूल में ही रहे. इनके तीसरे सहयोगी माइकल कोलिंस इस दौरान चांद की कक्षा में परिक्रमा कर रहे कमांड माड्यूल में थे.

बता दें कि अमेरिका ने 1960 में अपोलो कार्यक्रम की घोषणा की थी. तब वह चंद्रमा की कक्षा में एक छोटे चालक दल को भेजना चाहते थे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन ऑफ केनेडी को इससे अधिक की चाहत थी. 1961 में उन्होंने चंद्रमा पर इंसान को उतारने की अपनी और संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रतिबद्धता की घोषणा करते हुए अपना प्रसिद्ध भाषण दिया. बता दें कि जिस समय आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन ने चांद की सतह पर लैंडिंग की थी उसी दौरान चंद्रमा से करीब 530 मील की दूरी पर लूना-15 मानव रहित सोवियत अंतरिक्ष यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

अमेरिका से पहले सोवियत संघ इस दिशा में काम कर रहा था. 4 अक्टूबर, 1957 को सोवियत संघ ने अपना स्पुतनिक-1 नाम का पहला कृत्रिम उपग्रह लांच किया था. इस सफलता ने सैन्य, आर्थिक और तकनीकी के क्षेत्र में अमेरिका को बड़ी चुनौती दी थी. इसी के साथ दोनों देशों के बीच स्पेस वार शुरू हो गया. फिर क्या था अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने नासा का गठन किया और प्रोजेक्ट मर्करी की शुरुआत कर दी. इसका उद्देश्य मनुष्य को पृथ्वी की कक्षा में भेजना था. 12 अप्रैल, 1961 को सोवियत अंतरिक्ष एजेंसी ने यूरी गगारिन को अंतरिक्ष में भेजा जो अमेरिका के मुंह पर करारा चांटा था. तब यूरी पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले पहले व्यक्ति बने.

ये अमेरिका के लिए एक और बड़ा झटका था. उसके करीब एक महीने बाद, 5 मई, 1961 को एलन शेपर्ड 15 मिनट की सबऑर्बिटल की यात्रा पूरी करके अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अमेरिकी बने. उसके बाद अमेरिका ने चांज पर इंसान भेजकर इतिहास रच दिया.

First published: 20 July 2019, 11:11 IST
 
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