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जब नवाज शरीफ ने अटल बिहारी वाजपेयी का पाकिस्तान में भी चुनाव जीतने का किया था दावा

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 16 August 2018, 23:50 IST
(File photo)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार को शाम करीब 5 बजे दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. उनके मरने के बाद पूरे देश में शोक की लहर है. वाजपेयी जी ने अपने जीवन में कई उपलब्धियां हासिल की थी. उन्होंने सीमा पार पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए कई कदम उठाए थे.

अटल के बारे में साल 1999 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ ने बड़ा दावा किया था. अटल बिहारी वाजपेयी जब नवाज शरीफ के आमत्रंण पर शांति बहाली के प्रयासों के तहत दिल्ली से लाहौर बस से किए थे. अटल बिहारी ने दोनों लोगों को जोड़ने के लिए उस समय दिल्ली से लाहौर के लिए बस सेवा की शुरू की थी.

 

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अटल 19 फरवरी को 1999 को पंजाब के अटारी-वाघा बॉर्डर को पार करते हुए लाहौर पहुंचे थे. उनके साथ 22 प्रख्यात लोगों भी पाकिस्तान गए थे. इसमें पत्रकार कुलदीप नैय्यर, नृत्यांगना मल्लिका साराभाई और फिल्म अभिनेता देव आनंद और जावेद अख्तर भी गए थे. इस बस को हर दिन चलाने की योजना थी.

वरिष्ठ पत्रकार किंगशुक नाग की पुस्तक अटल बिहारी वाजपेयी: ए मैन फॉर ऑल सीजन में इसका जिक्र करते हुए बताया गया कि उनकी वहां क्या ख्याति थी. वाजपेयी के साथ 22 लोगों का दल भी साथ गया था जिसमें पत्रकार कुलदीप नैयर, नृत्यांगना मल्लिका साराभाई और फिल्म अभिनेता देवा आनंद और जावेद अख्तर गए थे. जिस बस से अटल जी लाहौर गए थे, बाद में उसे दिल्ली-लाहौर के बीच चलाया गया. उनकी इस यात्रा के दौरान तत्कालीन पीएम नवाज ने कहा,"अटल अगर पाकिस्तान से भी चुनाव लड़ेगे तो भी जीत जाएंगे."

 

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जब वाजपेयी बॉर्डर पार करके पाकिस्तान पहुंचे, तो नवाज शरीफ में उनका जोरदार स्वागत किया. उन्होंने कहा, "यह दक्षिण एशिया के इतिहास का सबसे निर्णायक क्षण है और हम चुनौतियों से निपटना होगा."

अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी ने बाद में इस घटना को याद करते हुए बताया था कि कैसे पाकिस्तान के सूचना मंत्री मोहम्मद हुसैन ने उनसे कहा था, 'पाकिस्तान में इस समय आने का साहस केवल वाजपेयी ही कर सकते हैं. इस घटना का गवाह बनने के लिए सैकड़ों लोग सीमा पर खड़े थे और वे सब इस एतिहासिक घटना के गवाह बने."

 गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी इस यात्रा के दौरान मीनार-ए-पाकिस्तान स्मारक भी गए थे जिसकी स्थापना 1947 में की गई थी और ये पाकिस्तान बनने के बाद बनी थी. उनके अलावा कोई भी भारतीय पीएम आज तक वहां नहीं गया.

अपने इस दौरे के बारे में अटल ने कहा था, "मैंने लाहौर आना इसलिए चुना क्योंकि मेरे बारे में जो कहा जा रहा था, उसमें कोई तर्क नजर नहीं आया. मैंने उन्हें साफ कर दिया था कि पाकिस्तान को अपनी पहचान के लिए मेरे स्टांप की जरूरत नहीं है. पाकिस्तान की अपनी अलग पहचान है. उन्होंने आगे कहा, "यदि मेरे भारत वापस लौटने के बाद यह प्रश्न कोई पूछेगा तो भी मेरा जवाब यही रहेगा." 

First published: 16 August 2018, 23:23 IST
 
हेमराज सिंह चौहान @@journalist_hem

इंडिया टीवी और न्यूज 24 में आउटपुट में काम करने के बाद डिजिटल मीडिया में कदम. राजनीति, खेल और समसामयिक विषयों में गहरी रुचि.

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