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डेविड गुडॉल: एक वैज्ञानिक जिन्हें उनके देश ने नहीं दी इच्छा मृत्यु की इजाजत तो किया ये..

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 May 2018, 9:52 IST
(File Photo)

अपनी पूरी जिंदगी में कई रिसर्च करने वाले ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डेविड गुडॉल ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के एक क्लिनिक में अपने जीवन का अंत कर लिया है. गुडॉल 104 साल के थे और पिछले कई साल से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में अपने छोटे से फ्लैट में अकेले रहते थे. मरने के अधिकार के लिए काम कर रही एक संस्था ने गुडॉल के निधन की जानकारी दी है.

डेविड गुडॉल का जन्म लंदन में हुआ था. उन्होंने बॉटनी और इकोलॉजी में कई महत्वपूर्ण शोध किए थे. दुनिया को अलविदा कहने के लिए गुडॉल ने 3 मई को ऑस्ट्रेलिया स्थित अपने घर से विदा ली थी और स्विट्जरलैंड आकर दुनिया से दूर चले गए.

गुडॉल ने 104 बसंत जिए और दुनिया छोड़ने से पहले मशहूर संगीतकार बीथोवेन की एक धुन ‘ऑड टू जॉय’ सुनते हुए सदा के लिए सो गए. बता दें कि डेविड गुडॉल को कोई गंभीर बीमारी भी नहीं थी, लेकिन वो अपने जीवन का सम्मानजनक अंत चाहते थे. इसलिए उन्होंने इच्छा मृत्यु का रास्ता चुना.

गुडॉल के इस फैसले ने पूरी दुनिया का ध्यान उनकी ओर खींचा. गुडॉल का कहना था उनकी आजादी छिन रही है इसलिए वो इच्छा मृत्यु चाहते हैं. अपने जीवन के आखिरी पलों में वो बहुत खुश थे. उन्होंने कहा था कि वो अपने जीवन का अंत करके खुश हैं. मरने से पहले गुडॉल ने अपने परिवार से बातचीत की और जरूरी कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए.

बता दें कि डेविड गुडॉल ने अपने देश ऑस्ट्रेलिया में भी इच्छा मृत्यु की मांग की थी, लेकिन वहां की सरकार ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं है. इसलिए वो उन्हें इच्छा मृत्यु की इजाजत नहीं दी जा सकती. उसके बाद उन्होंने स्विट्जरलैंड का रुख किया. जहां इच्छा मृत्यु को कानूनी मान्यता है.

गुडॉल पर्थ की एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी में मानद रिसर्च एसोसिएट थे. उनकी इच्छा मृत्यु में एक्जिट इंटरनेशनल ने अहम भूमिका निभाई. एक्जिट इंटरनेशनल के संस्थापक फिलिप निशेक ने गुरुवार को ट्विटर पर ट्वीट कर उनके मरने की खबर दी. उन्होंने ट्वीट में लिखा, बासेल में गुडॉल की ‘शांतिपूर्ण मौत’. उन्होंने आगे लिखा, यहां लाइफसाइकिल क्लीनिक में 10.30 बजे बॉर्बीट्युरेट स्तर के इंजेक्शन नेम्बुटाल से उनकी मौत हो गई.

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First published: 11 May 2018, 9:52 IST
 
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