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सरकार के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई अख़बारों ने फ्रंट पेज किये ब्लैक, ये है पूरी कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 October 2019, 15:33 IST

ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े अख़बारों ने सरकारी गोपनीयता और कानून के खिलाफ खिलाफ अपने फ्रंट पेज ब्लैक रखे. द ऑस्ट्रेलियन, द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड और ऑस्ट्रेलियन फाइनैंशल रिव्यू सहित कई अख़बारों ने अपने पहले पन्ने की खबर को ब्लैक आउट किया. देश कई टेलीविज़न पर भी विज्ञापन जारी किये गए, जिनमें कहा गया कि "जब सरकार आपसे सच्चाई छिपाती है, तो आखिर यह सच्चाई है क्या?" यह विरोध सरकार पर जनता का दबाव बनाने के लिए किया गया. पत्रकारों का कहना है कि सरकार उन्हें संदेदनशीन सूचनाओं के लिए रोकने के लिए कानून बना रही है.

पत्रकारों की यह मांग भी है कि मीडिया पर मानहानि के मुक़दमे दर्ज करने को मुश्किल बनाया जाये. पत्रकारों का कहना है कि यह हर ऑस्ट्रेलियाई नागरिक का अधिकार है कि उसे सरकार के फैसलों की जानकारी दी जाये. फ्री स्पीच के लिए ऑस्ट्रेलिया के पास कोई संवैधानिक सुरक्षा उपाय नहीं हैं. सरकार ने 2018 में काउंटर-जासूसी कानूनों को मजबूत करने पर व्हिसलब्लोअर को बचाने के लिए एक प्रावधान जोड़ा, हालांकि मीडिया संगठनों का कहना है कि प्रेस की स्वतंत्रता अभी भी प्रतिबंधित है.

 

न्यूज कॉर्प आस्ट्रेलिया के कार्यकारी अध्यक्ष माइकल मिलर ने कहा कि लोगों को हमेशा ऐसी सरकारों पर संदेह करना चाहिए जो लोगों के इस यह जानने से रोकना चाहती है कि वह क्या कर रही है". इस साल ऑस्ट्रेलिया में मीडिया स्वतंत्रता पर चर्चा ही थी जब एक अदालत के आदेश ने मीडिया को यह रिपोर्ट करने से रोका कि पूर्व वेटिकन के कोषाध्यक्ष, कार्डिनल जॉर्ज पेल को बाल यौन शोषण के आरोपों में दोषी पाया गया था.


देश कई अख़बारों ने यह रिपोर्ट छापी लेकिन उनका नाम नहीं लिखा लेकिन कुछ विदेशी मीडिया कंपनियों ने पेल के नाम से रिपोर्ट छापी. इस मामले में अभियोजन पक्ष अब तीन दर्जन ऑस्ट्रेलियाई पत्रकारों और प्रकाशकों पर मुकदमा चलाने के लिए जुर्माना और जेल की सजा की मांग कर रहे हैं.

पेल अपने दोषियों के खिलाफ अपील कर रहा है. इस मामले में जून में एक बार फिर उबाल आया जब पुलिस ने सिडनी में एबीसी के मुख्य कार्यालय और एक समाचार कॉर्प संपादक के घर पर में छापा मारा. एबीसी में लगभग 9,000 कंप्यूटर फ़ाइलों की गई.

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First published: 21 October 2019, 15:31 IST
 
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