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भारत रत्न सीमांत गांधी की पुण्यतिथि को आतंकियों ने चुना हमले के लिए

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 January 2016, 15:10 IST

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के चारसद्दा ज़िले में स्थित आतंकी हमले का शिकार बनी बाचा ख़ान यूनिवर्सिटी का नाम मशहूर स्वतंत्रता सेनानी भारत रत्न ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान के नाम पर रखा गया है.

बाचा ख़ान, ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान (बादशाह ख़ान) का पश्तो नाम था. चारसद्दा बादशाह ख़ान की जन्मभूमि है.

उनका जन्म छह फ़रवरी 1890 में ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के चारसद्दा ज़िले में हुआ था. उनकी मृत्यु 97 वर्ष की आयु में 20 जनवरी, 1988 में हुई थी. 

ख़ान को उनके शांतिवादी विचारों के लिए सीमांत (फ्रंटियर) गांधी भी कहा जाता था. महात्मा गांधी के वो करीबी मित्र थे. उन्हें 1987 में भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया था.

बुधवार को हुए इस आतंकी हमले में अब तक 21 लोग मारे जा चुके हैं. हमलावरों और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी अभी जारी है. ये यूनिवर्सिटी प्रांत की राजधानी पेशावर से करीब 50 किलोमीटर दूर है.

Gandhi, khan abdul gaffar khan in Peshwar

पेशावर में खुदाई खिदमतगार की रैली में महात्मा गांधी और सीमांत गांधी

बादशाह ख़ान भारत के विभाजन के ख़िलाफ़ थे. उन्होंने मुस्लिम लीग के अलग पाकिस्तान के निर्माण की मांग का विरोध किया था. भारत के बंटवारे के बाद भी वो कांग्रेस के विभाजन को स्वीकार करने के फ़ैसले से सहमत नहीं थे.

विभाजन के बाद बादशाह ख़ान ने महात्मा गांधी से कहा था, "आपने हमें (खुदाई खिदमतगार) भेडियों के सामने फेंक दिया है."

विभाजन के बाद अफ़ग़ानिस्तान से सटा ख़ैबर पख़्तूनख़्वा इलाक़ा पाकिस्तान में चला गया. ये वर्तमान पाकिस्तान के चार प्रांतों में से एक है.

उन्होंने 1929 में खुदाई खिदमतगार(ईश्वर के सेवक) नाम के संगठन की स्थापना की. जिसे लाल कुर्ती आंदोलन भी कहा जाता है

First published: 20 January 2016, 15:10 IST
 
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