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बराक ओबामा: असद, रूस और ईरान के हाथ ख़ून से रंगे हुए हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:13 IST
(फाइल फोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सीरिया के सबसे पुराने शहर अलेप्पो में साढ़े चार साल पुरानी जंग खत्म होने के बाद सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद, रूस और ईरान को कठघरे में खड़ा किया है.

अब जबकि अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल खत्म होने को है और महज एक महीने बाद डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्रपति बनने वाले हैं. उससे ठीक पहले सीरिया की जंग को लेकर ओबामा ने बड़ा बयान दिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद, रूस और ईरान के हाथ खून से रंगे हैं. अलेप्पो में फंसे लोगों को निकालने के लिए एक पर्यवेक्षक बल की जरूरत है." 

ओबामा की टीस!

दरअसल सीरिया की जंग के निर्णायक दौर में पहुंचने से पहले बराक ओबामा ने बशर अल-सद से गद्दी छोड़ने की मांग की थी, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस और लोगों को मंज़ूर नहीं था कि अमेरिका किसी नए देश में सैन्य दखल दे.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के इस बयान को उस टीस के तौर पर देखा जा सकता है, जो बतौर उनके राष्ट्रपति रहते सीरिया संकट का हल नहीं निकाल पाने की वजह से उपजी है.

पढ़ें: हमारे क़िस्सों और दास्तानों का एक शहर अलेप्पो दफ़न हो गया

सीरिया में छह साल पहले जंग शुरू हुई थी और उस वक्त ओबामा का पहला कार्यकाल था, लेकिन उनका दूसरा और अंतिम कार्यकाल अवसान पर है. विश्लेषक मानते हैं कि सीरिया का मसला हल किए बिना राष्ट्रपति पद से अलविदा कहना ओबामा को खलता रहेगा.

अलेप्पो की जंग ख़त्म, बर्बादी के निशान

सीरिया में छह साल पहले राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ बग़ावत शुरू हुई थी. अमेरिका ने इस जंग में विद्रोहियों को खड़ा किया और हुक़ूमत के ख़िलाफ़ उनका समर्थन किया.

इन सबके बीच सीरिया के बहाने रूस और अमेरिका की नूराकुश्ती भी चलती रही. इस जंग में रूस हमेशा से असद के साथ रहा. दरअसल रूस को किसी सूरत में असद सरकार का जाना मंजूर नहीं था.

इसके पीछे रूस के निजी हित भी जुड़े हुए थे. बशर अल-असद के सीरिया में सत्ता से हटने के बाद वहां की गैस पर किसी और का क़ब्ज़ा हो जाता जो रूस के ख़िलाफ़ होता. रूस यूरोप को अपनी गैस पर निर्भर रखना चाहता है.

इन सबके बीच असद के ख़िलाफ़ विद्रोह पूरी तरह से इस्लामिक आतंकियों के हाथ में चला गया. इस्लामिक स्टेट से लेकर फ्री सीरियन आर्मी तक. इसने पूरे इलाक़े में इस्लामिक कट्टरपंथ की जड़ें जमाईं.

2011 में असद ने छेड़ी जंग

पश्चिमी मीडिया अलेप्पो की तबाही के तीन लोगों को जिम्मेदार मानता है. व्लादिमीर पुतिन, बशर अल-असद और ईरान. 2011 में असद ने विद्रोहियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के ख़िलाफ़ एक खूंखार जंग छेड़ दी.

इस जंग में अनुमान है कि 4 लाख सीरियाई नागरिक मारे गए और लाखों यूरोप में शरण मांगने को मजबूर हो गए. अक्टूबर 2015 में जब लगने लगा कि असद हार रहे थे तो रूस ने अपने जंगी जहाज़ और सैनिक भेजकर सीधे दखल दिया.

रूस ने दिया असद का साथ

असद सरकार की तरफ़ से रूस उन गुटों से लड़ने लगा जो अमेरिका और अरब देशों ने तैयार किए थे. ईरान के समर्थन से हिज़्बुल्लाह ने भी अपने 5 हज़ार लड़ाके यहां तैनात कर दिए और नतीजतन इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में अपनी जड़ें और मज़बूत की.

इन सबके बीच साढ़े चार साल पहले सीरिया के सबसे पुराने शहर अलेप्पो में शुरू हुई जंग अब ख़त्म हो गई है. जंग में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है. इस लड़ाई ने सुनहरे इतिहास वाले शहर अलेप्पो को तकरीबन बर्बाद कर दिया है.

First published: 17 December 2016, 2:45 IST
 
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