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ओबामा: कड़े बंदूक नियंत्रण कानून के बगैर ऑरलैंडो जैसी घटनाएं होती रहेंगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 June 2016, 16:11 IST
(एजेंसी)

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आगाह करते हुए कहा है कि अगर कड़े बंदूक नियंत्रण कानूनों को जल्द ही स्वीकार नहीं किया गया, तो ऑरलैंडो में हुई हालिया घटना की तरह गोलीबारी की और भी भयानक घटनाएं हो सकती हैं.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "हम हर उस विक्षिप्त व्यक्ति को पकड़ नहीं सकते, जो अपने पड़ोसियों, दोस्तों, अपने सहकर्मियों या अनजान लोगों को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता हो, लेकिन ऐसा व्यक्ति जिस मात्रा में नुकसान पहुंचा सकता है, उस मामले में हम जरूर कुछ कर सकते हैं."

'हथियारों की खरीद आसान'

साथ ही राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "यह हमारी राजनीति का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि ऑरोर और न्यूटाउन जैसे शहरों में किसी आतंकवादी या मानसिक संतुलन गंवा चुके व्यक्ति के लिए आधुनिक और खतरनाक हथियार खरीदना आसान बना दिया है और वे इनका इस्तेमाल कानूनी तौर पर कर सकते हैं."

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरुवार को ऑरलैंडो गोलीबारी के पीड़ितों और उनके परिवार वालों से मुलाकात की.

बहस में बदलाव की जरूरत

इस मुलाकात के बाद ओबामा ने कहा, "अब इस बहस में बदलाव की जरूरत है. इस त्रासदी के जवाब में नाइट क्लब में अधिक से अधिक लोगों को हत्यारे के समान ही हथियारों से लैस किया जाए, इस प्रकार की अवधारणा आम समझ के विरुद्ध है.

जो भी हथियारों की आसान पहुंच के समर्थन में दलील देते हैं, उन्हें इन परिवारों से मिलना चाहिए और यह बताना चाहिए कि यह उचित क्यों है."

'तो भविष्य में भी होंगी ऐसी घटनाएं'

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा, "अगर हम कार्रवाई नहीं करते, तो हम भविष्य में ऐसे ही कत्लेआम को देखने के लिए मजबूर होते रहेंगे, क्योंकि हमने ही ऐसा होने का चुनाव किया है."

वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ओबामा के बयान के उलट राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के संभावित प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि यदि लोगों को बंदूक ले जाने की इजाजत होती, तो मरने वालों की तादाद कम हो सकती थी.

रविवार को फ्लोरिडा प्रांत के ऑरलैंडो में उमर मतीन नाम के एक शख्स ने समलैंगिकों के एक नाइट क्लब में अंधाधुंध गोलियां बरसाकर 50 लोगों की हत्या कर दी थी. जवाबी कार्रवाई में मतीन भी मारा गया था. इस घटना के बाद अमेरिका में हथियारों तक आसान पहुंच पर एक बार फिर बहस छिड़ी हुई है.

First published: 17 June 2016, 16:11 IST
 
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