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इराकी राजदूत: मोसुल में जंग खत्म होने के बाद ही पता चलेगा, 39 भारतीय ज़िंदा हैं या नहीं

सादिक़ नक़वी | Updated on: 2 December 2016, 7:59 IST
QUICK PILL
  • भारत में इराक़ के राजदूत फाख़री एच अल ईसा ने कहा है कि मोसुल में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को ख़त्म करने का आधा काम पूरा हो चुका है. 
  • जंग ख़त्म होने पर ही पता चल पाएगा कि 2014 में किडनैप हुए 39 भारतीयों के साथ इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने क्या किया है.

2014 में इस्लामिक स्टेट ने 39 भारतीयों को मोसुल से किडनैप कर लिया था. अभी तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. भारत में इराक के राजदूत फाख़री एच अल ईसा ने कैच न्यूज़ से कहा है कि मोसुल को आतंकियों से छुड़ाने के लिए जंग जारी है. यह जंग ख़त्म होने पर ही किडनैप भारतीयों की तकदीर का खुलासा हो सकता है. मोसुल के कुछ हिस्से अब भी इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े में हैं. 

अल-ईसा ने कहा, ‘अभी तक हमारे पास उनके मरने की कोई ख़बर नहीं है.’ हो सकता है कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाके उनसे गुलामी करवाने के लिए ले गए हों. ये आतंकी सैकड़ों इराकियों को भी गुलाम बनाकर ले जा चुके हैं, जिन्हें बाद में सुरंग खोलने के लिए इस्तेमाल करते पाया गया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी कई मौक़े पर यह मानने को तैयार नहीं हुई हैं कि इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े में 39 भारतीय मारे गए हैं. उन्हें कई सूत्रों से पता चला है कि वे ज़िंदा हैं. 

कैच को दिए खास इंटरव्यू में अल-ईसा ने कहा कि मोसुल के 50 फीसदी लोगों को इस्लामिक स्टेट से छुड़ा लिया गया है. जिसे इराकी सेना ने ‘सालाफिस्ट-जिहादिस्ट-टकफिन’ ऑपरेशन नाम दिया. उन्होंने 45 दिन में यह ऑपरेशन पूरा होने की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि इस्लामिक स्टेट के पास सरेंडर करने या मर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. लड़ाके वहां से भाग भी नहीं सकते थे क्योंकि उस पूरे इलाक़े को सील कर दिया गया था. 

भारत से उम्मीदें

इराकी राजदूत भारत की मदद चाहते हैं, ख़ासकर आतंक के ख़िलाफ़ जंग में इराकी सेना के लिए हथियार. उन्होंने कहा कि इससे मध्य पूर्व बेहतरी की ओर बढ़ेगा. उन्होंने कहा, ‘हमें हर तरह की मदद चाहिए. इंसानियत के नाते 3.5 मिलियन विस्थापितों को वापस बसाने के लिए मदद चाहिए. आतंकियो का सफ़ाया करने के लिए हथियार चाहिए.’

हालांकि राजदूत ने यह भी कहा कि इराक भारत का सीधा हस्तक्षेप नहीं चाहता. पिछले साल भारत ने इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लडऩे का प्रस्ताव रखा था. इसके लिए अनुमति भी ले ली थी. मगर अल-ईसा ने कहा, ‘हमारे पास लड़ने के लिए लोगों की कमी नहीं है.’ 

इराक भारत को तेल देने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है. अल-ईसा ने कहा कि अब इराक को दोबारा खड़ा करने और कारोबार में ज्यादा सक्रिय भारत की भागीदारी चाहता है. उन्होंने कहा कि 750 से ज़्यादा पब्लिक सेक्टर का पुनर्निर्माण वहां होना है और इस तरह भारतीय कारोबारियों के लिए यहां बिजनेस के मौक़े बन रहे हैं. 

वैश्विक स्तर पर तेल के दामों में आई मंदी से इराक की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर हुआ है. राजदूत ने कहा कि ‘लागत के लिए पूंजी नहीं है.’ 3.5 मिलियन से ज्यादा विस्थापितों की देखरेख और तनख़्वाह देने से देश में बजट का 10 फीसदी ही रह जाएगा. 

मौजूदा रिश्ते

विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के बगदाद और कर्बला आने के बाद विदेश मंत्री इब्राहिम अल-जाफरी ने दिसंबर में भारत आने को कहा था ताकि दोनों मुल्क़ों के संबंधों में इज़ाफा हो सके. हालांकि अब उनका आना फरवरी के मध्य तक टल गया है. भारत सरकार ने अभी इसकी मंज़ूरी नहीं दी है. 

वहीं पेट्रोलियम मंत्री जब्बर अली अल-लुआईबी को पेट्रोटेक सम्मेलन 2016 और प्रदर्शनी के लिए भारत आना था मगर उन्हें हटा दिया गया है. अब एक इराकी डेलीगेशन इसमें शामिल होगा. 

बहरहाल, कुछ इराकी फौजी अपने गंभीर ज़ख्मों का इलाज कराने भारत आ रहे हैं. अल-इसा ने बताया कि ऐसे 40 सैनिकों का गुडग़ांव के आर्टिमिस अस्पताल में इलाज हो रहा है, जिसके साथ इराकी रक्षा मंत्रालय ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.   

First published: 2 December 2016, 7:59 IST
 
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