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कहीं बच्चे को मनोरोगी और असामाजिक तो नहीं बना रहे हैं आप

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 27 April 2016, 16:09 IST

माता-पिता द्वारा छोटे बच्चों को मारने से बड़े होने पर उनमें मनोरोगी बनने के साथ असामाजिक व्यवहार करने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. एक नई शोध में खुलासा हुआ है कि ऐसे बच्चे बड़े होकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते.

जर्नल ऑफ फैमिली साइकोलॉजी में छपी एक शोध की मानें तो 50 सालों तक 1 लाख 60 हजार से ज्यादा बच्चों पर इस संबंध में शोध किया गया. जिसमें पता चला कि ऐसे बच्चों में ज्ञान संबंधी परेशानियां और ज्यादा गुस्सा भरा होता है. 

ऑस्टिन स्थित यूनीवर्सिटी ऑफ टैक्सास और यूनीवर्सिटी ऑफ मिशिगन की संयुक्त शोध के नतीजे बताते हैं कि बचपने में हुई मारपीट का बच्चों के बड़े होने पर मानसिक स्वास्थ्य, विकास और लाइफ स्किल्स पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है.

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शोधकर्ताओं द्वारा बच्चों के पिछवाड़े पर या फिर हाथ-पैर में मारने के लिए स्पैंकिंग जैसे विशेष शब्द का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने पाया कि अभिभावकों की स्पैंकिंग से 13 नकारात्मक परिणाम संबंधित थे, जिनका बच्चों के बड़े होने पर काफी प्रभाव पड़ा.

इसके प्रभाव स्वरूप ऐसे बच्चों में ज्यादा गुस्सा, ज्यादा असामाजिक व्यवहार, ज्यादा परेशानियां दिखाना, ज्यादा मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, अभिभावकों के साथ ज्यादा नकारात्मक रिश्ते, कम नैतिकता का प्रदर्शन, कम ज्ञान संबंधी क्षमता और कम आत्मसम्मान का मूर्तरूप में प्रदर्शन देखा गया.

शोधकर्ताओं द्वारा निष्कर्ष निकाला गया, "बच्चों की गलतियों-गलत व्यवहार पर उनकी स्पैंकिंग एक आम बात है, यद्यपि कोई भी इसके प्रभाव और सही होने पर बहस कर सकता है. लेकिन यहां प्रस्तुत आंकड़ों से पता चलता है कि स्पैंकिंग से बच्चों के व्यवहार में सुधार का कोई सबूत नहीं मिल लेकिन ऊपर दिए गए 13 नकारात्मक विकाससंबंधी प्रभाव सामने आने की संभावना जरूर बढ़ गई."

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"स्पैंकिंग करने वाले अभिभावक, इसकी सिफारिश करने वाले लोग और नीति निर्माता जिन्होंने इसे अनुमति दी है को वाकई इस पर पुनर्विचार की जरूरत है. क्योंकि स्पैंकिंग से बच्चों में किसी सुधार या अच्छाई का कोई सबूत नहीं मिलता है. इससे मिलने वाले सभी नतीजे केवल बच्चों को नुकसान पहुंचाते ही दिखते हैं."

यूनीसेफ द्वारा की गई शोध के मुताबिक दुनिया भर में करीब 80 फीसदी बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए किसी न किसी प्रकार की आए दिन पिटाई या मार का सामना करना पड़ता है.

ब्रिटेन में बच्चों को सजा देने के लिए अभिभावकों द्वारा उनकी स्पैंकिंग वैध है, हालांकि इससे बच्चों में किसी प्रकार के शारीरिक निशान (जैसेः चोट, खरोंच, खून निकलना) नहीं आने चाहिए.

First published: 27 April 2016, 16:09 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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