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ब्रेग्जिट: ईयू से ब्रिटेन के बाहर होने की आहट पर आहत हुआ सेंसेक्स और रुपया

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2016, 15:44 IST

जनमत संग्रह के नतीजे आने के बाद यह साफ हो गया है कि ब्रिटेन अब यूरोपीय यूनियन का हिस्सा नहीं रहेगा. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के मुताबिक 52 फीसदी लोगों ने ईयू से ब्रिटेन के अलग होने के पक्ष में वोट दिया है.

जनमत संग्रह के नतीजे में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था, लेकिन आखिरकार ब्रिटेन ने अब इस बात पर मुहर लगा दी है कि वह 28 देशों के यूरोपीय यूनियन से औपचारिक तौर पर अलग हो रहा है.

रायशुमारी के शुरुआती नतीजों के सामने आने के साथ ही ब्रिटेन की आधिकारिक मुद्रा पाउंड की कीमत पहले डॉलर के मुकाबले लड़खड़ा गई. नतीजे आने से पहले पाउंड 1.50 डॉलर पर चल रहा था. लेकिन जब नतीजों का रुझान यूरोपीय यूनियन से अलग होने के पक्ष में दिखने लगा, तो पाउंड 1.41 डॉलर पर आ गया.

28 देशों का यूरोपियन यूनियन

संडरलैंड में एक लाख 34 हज़ार 400 वोट पड़े, जिसमें से 82 हज़ार 394 लोगों ने यूरोपीय यूनियन छोड़ने के पक्ष में वोट दिया है. न्यूकैशल में 50.7 फ़ीसदी वोट ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में रहने के पक्ष में पड़े हैं.

गिब्राल्टर के ज़्यादातर लोगों ने भी ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में बने रहने के पक्ष में वोट दिया है. इस ऐतिहासिक जनमत संग्रह के चलते ब्रिटेन का भविष्य एक अहम मोड़ पर खड़ा था. जनमत संग्रह से यह फैसला हो गया है कि ब्रिटेन 28 देशों के संगठन यूरोपीय यूनियन में अब साझेदार नहीं होगा.

यूरोपीय संघ में बने रहने और इससे बाहर निकलने के समर्थन में चले दोनों तरह के अभियानों में करीब 4.6 करोड़ लोग शामिल हुए, जिनमें 12 लाख भारतीय मूल के ब्रिटेन के नागरिक हैं.

बाजार औंधे मुंह गिरा

इस बीच यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने के रुझान मिलने के बाद बाजार पर बुरा असर पड़ा. शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 900 अंकों की गिरावट के साथ खुला. इसके अलावा विदेशी शेयर बाजारों में भी गिरावट का दौर देखा जा रहा है.

रुपये की कीमत पर भी ब्रेक्जिट के नतीजों का बुरा असर पड़ा है. कारोबार शुरू होने के साथ ही एक डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 89 पैसे तक गिर गई. इसके अलावा शुरुआती नतीजों के सामने आने के बाद पाउंड की कीमत पर असर पड़ा.

जापान के शेयर बाजार पर भी यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने की आहट का असर देखा गया. माना जा रहा है कि ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद अब अमेरिकी डॉलर और मजबूत होगा.

क्यों अहम था जनमत संग्रह?

ब्रिटेन के जनमत संग्रह पर दुनिया भर की निगाहें लगी थीं. ब्रिटेन के अलग होने के बाद दुनिया भर के बाजार गिरने का खतरा है. चार महीने चली मुहिम के बाद वोटिंग के नतीजे आ चुके हैं.

ब्रिटेन के अलग होने के फैसले के साथ यूरोप में तो उथल-पुथल मचनी तय है. भारत भी इसके असर से अछूता नहीं रह पाएगा.

भारत का सबसे ज्यादा कारोबार यूरोप के साथ है. सिर्फ ब्रिटेन में 800 भारतीय कंपनियां हैं, जिसमें एक लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं. इन कंपनियों के जरिए 2015 में ब्रिटेन में 2 लाख 47 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ.

भारतीय आईटी सेक्टर की 6 से 18 फीसदी कमाई ब्रिटेन से ही होती है. ब्रिटेन के रास्ते भारतीय कंपनियों की यूरोप के इन 28 देशों के 50 करोड़ लोगों तक पहुंच है. ब्रिटेन के ईयू से बाहर निकलने के बाद, यह आसान पहुंच बंद हो जाएगी.

कंपनियों के मुनाफे पर असर

ब्रिटेन के अलग होने के साथ ही यूरोप के देशों से अब नए करार करने होंगे. कंपनियों का खर्च भी बढ़ेगा और अलग-अलग देशों के अलग-अलग नियम कानून से जूझना होगा. ब्रिटेन में बने उत्पाद पर भारतीय कंपनियों को यूरोपीय देशों में टैक्स देना होगा.

टाटा समूह की जगुआर लैंडरोवर के मुताबिक उसे करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा.

ब्रिटेन के बाहर होने के बाद अब वीजा नियम सख्त होने की संभावना है. जिससे भारतीय कंपनियों के लिए स्टाफ की दिक्कत हो सकती है. वीजा लेकर पढ़ने जाने वाले छात्रों को भी मुश्किल होगी.

करेंसी-विदेशी निवेश पर असर

ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने का करेंसी पर भी असर पड़ेगा. ब्रिटेन की करेंसी पाउंड और यूरोप की करेंसी यूरो के झगड़े में दुनिया भर में डॉलर की मांग बढ़ेगी. ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत घटेगी.

ऐसा हुआ तो भारत को कच्चे तेल के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे, यानी पेट्रोल और डीजल महंगा होगा.

ब्रिटेन उन देशों में है जहां से भारत की कमाई ज्यादा होती है और भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है.भारत ने पूरे यूरोपियन यूनियन में जितना निवेश किया है, उससे ज्यादा सिर्फ ब्रिटेन में पैसा लगाया है.

हालांकि अलग होने का समर्थन कर रहे ब्रिटेन के सांसद मानते हैं कि ब्रिटेन के अलग होने पर भारत में निवेश में आसानी होगी, क्योंकि यूरोपियन यूनियन को जाने वाला पैसा भारत जैसे एशियाई देशों में आ सकता है.

First published: 24 June 2016, 15:44 IST
 
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