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अपने ही मानचित्र से क्यों डर गया चीन, नष्ट किये 30,000 से ज्यादा नक्शे

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 March 2019, 16:38 IST

चीन के कस्टम विभाग लगभग 30 000 ऐसे मानचित्रों को नष्ट कर दिया है, जिनमें भारत के अरुणांचल और ताईवान को चीन का हिस्सा नहीं दिखाया गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार यह हाल के वर्षों चीन की इस तरह की सबसे बड़ी कार्रवाई थी, जिसमे चीन में अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने का दावा किया है. नक्शे अंग्रेजी में थे और एक चीनी प्रांत में एक कंपनी द्वारा तैयार किये गए थे. अरुणाचल प्रदेश को बीजिंग द्वारा चीन के एक हिस्से के रूप में पेश किया जाता है और इसे दक्षिण तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के हिस्से के रूप में आधिकारिक मानचित्रों पर दर्शाया जाता है.

इसी तरह बीजिंग ताइवान को एक अपने हिस्से के रूप में मानता है. ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार एक गुप्त सूचना के आधार पर, शेडोंग प्रांत के किंगदाओ शहर के कस्टम अधिकारियों ने एक कार्यालय पर छापा मारा और 28,908 विश्व मानचित्रों वाले 800 से अधिक बक्से जब्त किए.

रिपोर्ट के अनुसार, प्रांत के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "28,908 गलत नक्शे के कुल 803 बक्से हाल के वर्षों में जब्त किए गए और नष्ट कर दिए गए. दस्तावेजों को एक गुप्त स्थान पर ले जाया गया और काट दिया गया. ग्लोबल टाइम्स ने बताया, "मानचित्र पूर्वी चीन के अनहुई प्रांत की एक कंपनी द्वारा निर्मित किए गए थे और किसी दूसरे देश निर्यात किए जाने के रास्ते पर थे." 

मानचित्रों को इसलिए किया नष्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि समस्याग्रस्त नक्शे चीन के सही क्षेत्र को दिखाने में विफल रहे और दक्षिण तिब्बत और ताइवान के द्वीपों को छोड़ दिया गया. इसे संबंधित अधिकारियों ने घरेलू मानचित्र बाजार पर 100 से अधिक बार जांच की है और 10,000 से अधिक गलत नक्शों को खोजा और नष्ट किया है, जिससे घरेलू और विदेशी बाजारों में बिक्री इसे इन्हे रोका जा सके. बीजिंग अरुणाचल प्रदेश में भारतीय नेताओं की यात्रा का विरोध करता है और भारत के एक भाग के रूप में अरुणाचल प्रदेश को संवेदनशील मानता है. अप्रैल 2017 में चीन ने दलाई लामा की भारत के सबसे पूर्वी राज्य की यात्रा का विरोध किया था.

इसी तरह बीजिंग ने हाल के महीनों में ताइवान पर अपना अधिकार जताने के अपने प्रयासों के तहत वेबसाइटों पर ताइवान को चीन के हिस्से के रूप में संदर्भित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय फर्मों और एयरलाइनों पर दबाव बढ़ा दिया है. पिछले जुलाई में भारत की राष्ट्रीय एयर लाइन एयर इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर ताइवान का नाम बदलकर चीनी ताइपे कर दिया था क्योंकि चीन ने दुनिया भर में विभिन्न एयरलाइनों द्वारा ताइवान को एक अलग क्षेत्र के रूप में वर्णित किए जाने के बारे में चिंता जताई थी. एयर इंडिया ऐसा करने वाली 40 अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों में शामिल थी. इसके अलावा, पिछले साल अमेरिकी कपड़ों की कंपनी GAP को चीन के नक्शे के साथ टी-शर्ट बेचने के लिए माफी मांगनी पड़ी थी.

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First published: 26 March 2019, 15:06 IST
 
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