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चीन बनाएगा श्रीलंका में पोर्ट सिटी

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST

चीन, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में पोर्ट सिटी बनाने जा रहा है. श्रीलंका के नए राष्‍ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना का यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे की नीति के एकदम उलट बताया जा रहा है.

पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे का मानना था कि श्रीलंका को चीन पर जरूरत से ज्‍यादा निर्भर रहने की जरुरत नहीं हैं. पूर्व राष्ट्रपति के इस विचार की राष्‍ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना खुली आलोचना भी कर चुके हैं. इसके साथ ही मैत्रीपाला ने राष्‍ट्रपति पद ग्रहण करने के तुरंत बाद पूर्व राष्‍ट्रपति राजपक्षे के कार्यकाल में चीन के साथ हुए सभी समझौतों के समीक्षा का आदेश दिया था.  

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक महिंदा राजपक्षे ने अपने कार्यकाल में तमिल विद्रोहियों के खिलाफ सैन्‍य अभियान चलाया था, जिसमें राजपक्षे ने चीन से मदद ली थी. इस समय दक्षिण एशिया में श्रीलंका, चीन का सबसे बड़ा निवेशक है.

भारतीय रणनीतिकार श्रीलंका में बढ़ती चीन की पैठ पर कई बार चिंता जता चुके हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय को उम्‍मीद थी कि राजपक्षे के जाने के बाद श्रीलंका की विदेश नीति में बदलाव आएगा, लेकिन पोर्ट सिटी प्रोजेक्‍ट को मंजूरी से यह साबित हो गया है कि वर्तमान राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के आने के बाद भी चीन का प्रभाव श्रीलंका की राजनीतिक गलियारों में कम नहीं हुआ है.

इससे पूर्व भी चीन दक्षिणी श्रीलंका में हम्बनटोटा बंदरगाह के निर्माण में अपना सहयोग दे रहा है. पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे के गृह शहर में चीन अरबों डॉलर खर्च करके बंदरगाह बना रहा है.

चीन के श्रीलंका में इस निर्माण कार्य पर भारत कई बार कड़ा एतराज जता चुका है, लेकिन भारत को इस मामले में कोई खास सफलता नहीं मिली. चीन सामरिक तौर पर भारत को समंदर में घेरने के लिए सागरमाला बना रहा है. इसी कड़ी में वह पाकिस्‍तान में एक बंदरगाह बना रहा है, ताकि भविष्य में युद्ध की स्थिति बनती है तो वह भारत पर कई ठिकानों से एक साथ हमला कर सके.

हालांकि श्रीलंका ने जिस वर्तमान पोर्ट सिटी प्रोजेक्‍ट को मंजूरी दी है, वह रिहाइशी इलाकों में बनने वाली कॉलोनियों के संदर्भ में है. लेकिन भारतीय कूटनीतिक इसके पीछे छिपे उस संकेतों पर गौर कर रहे हैं कि कोलंबो-बीजिंग के बीच बढ़ते करीबी रिश्ते कहीं परोक्ष तौर पर भारत को घेरने के संकेत तो नहीं है.

First published: 12 March 2016, 8:42 IST
 
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