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कोरोना वायरस की महामारी का इस देश में नहीं है कोई खौफ, आमदिनों की तरह चल रहा जीवन

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 March 2020, 14:10 IST

Corona Virus outbreaks: पूरी दुनिया जहां कोरोना वायरस (Corona Virus) के खौफ में थम गई है वहीं दुनिया में एक ऐसा भी देश है जहां जिंदगी आमदिनों की तरह ही चल रही है और कोरोना वायरस के खौफ का यहां कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है. बता दें कि चीन (China) के वुहान शहर (Wuhan City) से फैला कोरोना वायरस अब दुनिया के लगभग हर देश में पहुंच गया है. सबसे बुरे हालात यूरोप (Europe) के कई देशों के हैं वहीं अमेरिका (America) में कोरोना के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा हो गई है.

इसी बीच पता चला कि यूरोप के देश बेलारूस (Belarus) में सब कुछ सामान्य चल रहा है. बेलारूस में यूरोप के बाकी देशों की तरह ना तो कोई सख्त कदम उठाया है और ना ही लॉकडाउन जैसा कुछ किया है. बता दें कि यूक्रेन और रूस ने भी कोरोना वायरस से निपटने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए हैं. हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि यूक्रेन जल्द ही कोरोना को रोकने के लिए आपातकाल की घोषणा कर सकता है.


वहीं रूस ने सभी स्कूलों को बंद कर दिया है, सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाई है और देश से आने जाने वाली सभी उड़ानों को भी रद्द किया है. लेकिन बेलारूस पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है. यहां सबकुछ आमदिनों की तरह ही है. देश की सीमाएं पहले की तरह खुली है, लोग काम पर जा रहे हैं और सामान खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़ भी दिखाई दे रही है.

वहीं बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लूकाशेन्को का कहना है कि फिलहाल देश में कोरोना को पैर पसारने से रोकने के लिए एहतियातन कदम उठाने की जरूरत नहीं है. बीते मंगलवार को राजधानी मिंस्क में चीन के राजदूत से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, 'घटनाएं तो होती रहती हैं. जरूरी है कि उन्हें लेकर लोगों में दहशत न फैले.'

बता दें कि बेलारूस में न तो सिनेमाघर और थिएटर बंद किए गए हैं और न ही यहां सार्वजनिक कार्यक्रम करने पर किसी तरह को पाबंदी लगाई गई है. बेलारूस दुनिया के उन चंद देशों में से है जिसने यहां होने वाली फुटबॉल चैंपियनशिप कैंसिल नहीं की है. यहां हो रहे फुटबॉल मैच सामान्य दिनों की तरह कराए जा रहे हैं और पड़ोसी रूस के फुटबॉल प्रेमियों के लिए टेलीविजन पर भी मैचों का सीधा प्रसारण भी किया जा रहा है.

बेलारूस के राष्ट्रपति लूकाशेन्को ने हाल में कहा था कि 'कोरोना वायरस को एक ट्रैक्टर रोकेगा.' उनका ये बयान बेलारूस के सोशल मीडिया पर सुर्खियों में रहा और लोगों ने इस पर चर्चा की, कइयों ने इस बयान का मजाक भी बनाया. हालांकि राष्ट्रपति का बयान खेतों में मेहनत करने को लेकर था. उन्होंने ये भी कहा था कि वो खुद शराब नहीं पीते हैं लेकिन कोरोना को रोकने के लिए पीना पड़ा तो वो एक घूंट वोदका तो पी ही सकते हैं. ऐसा नहीं है कि बेलारूस के लोग कोरोना वायरस के बारे में नहीं जानते. इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी मिंस्क में कई युवा और स्कूली छात्र बीमारी का बहाना बना कर छात्रों से भरी क्लास में जाने से बच रहे हैं.

छात्रों की परेशानी कम करने के लिए कॉलेज और युनिवर्सिटीज ने अपने क्लासेस का वक्त कुछ घंटे पहले कर दिया है, ताकि छात्र सार्वजनिक परिवहन में होने वाली भीड़ से बच सकें. मिंस्क की सड़कों पर लोग कम ही दिख रहे हैं और लोगों का कहना है कि उन्हें पता है कि बूढ़े लोगों को इस वायरस से अधिक खतरा है, लेकिन कोरोना को लेकर इस तरह का कोई जागरूकता अभियान अधिकारियों की तरफ से नहीं कराया जा रहा. वहीं बेलारूस के राष्ट्रपति लूकाशेन्को का कहना है कि इस कारण चिंता करने की कोई बात नहीं है, क्योंकि विदेशों से बेलारूस आने वाले सभी लोगों के कोरोना वायरस टेस्ट कराए जा रहे हैं. वो दावा करते हैं कि, 'एक दिन में दो या तीन लोगों के टेस्ट के नतीजे पॉजिटिव आ रहे हैं. ऐसे मामलों में उन्हें क्वारंटीन में भेजा जा रहा है और फिर उन्हें डेढ़ सप्ताह या दो सप्ताह बाद छोड़ा जा रहा है.'

बता देें कि बेलारूस में अब तक कोरोना के कुल 94 मामले सामने आए हैं और यहां किसी की मौत नहीं हुई है. इनमें से 32 लोग इलाज के बाद ठीक भी हो चुके हैं. बता दें कि बेलारूस कई मायनों में यूरोप के दूसरे देशों से अलग है. ये यूरोप का आखिरी ऐसा देश है जहां अब भी मौत की सजा का प्रावधान है. देश की विपक्षी एक्टिविस्ट एंड्रे किम सरकार के कड़े आलोचक रहे हैं, लेकिन इस मामले में वो राष्ट्रपति की बात से इत्तेफाक रखते हैं.

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First published: 28 March 2020, 14:10 IST
 
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