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Coronavirus: IMF की मीटिंग में भारत बोला- पाकिस्तान में हिन्दुओं को नहीं दी जा रही कोरोना संकट में मदद

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 April 2020, 12:35 IST

Coronavirus: 16 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की बैठक में इस्लामाबाद को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 1.4 बिलियन डॉलर की सहायता देने को हरी झंडी दी गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान वहां मौजूद भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के कोरोना वायरस खर्चों पर चिन्ता व्यक्त की है और कहा है कि वह इससे अपने अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और सुरक्षा खर्च को बढ़ा सकता है.

सुरजीत एस भल्ला, जो आईएमएफ के बोर्ड में भारत के कार्यकारी निदेशक हैं, ने मीटिंग में जोर दिया कि पाकिस्तान को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर बिना भेदभाव के खर्च करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि बजटीय संसाधन पाकिस्तान के सभी क्षेत्रों को उपलब्ध कराए जाने चाहिए क्योंकि बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में covid-19 की स्थिति बहुत खराब है.


भल्ला ने उन रिपोर्ट्स का भी हवाला जिनमें कहा गया है कि इस दौरान पाकिस्तान में अल्पसंख्यक जैसे कि हिंदू, सिख, ईसाई और अहमदिया समुदाय सबसे कमजोर स्थिति में हैं. इसे भारत की ओर से जवाब देने के रूप देखा जा रहा है. इससे पहले पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना इस बात पर की थी कि जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने और नागरिक संशोधन अधिनियम को लागू करने का प्रयास मुसलमानों को निशाना बनाना था.

भल्ला ने कहा कि इमरान खान सरकार कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए भेदभाव कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सिंध प्रान्त में लोगों की स्थिति ख़राब है लेकिन वहां फंड समान रूप से नहीं पहुंचाया जा रहा है. आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि कोरोना वायरस के कारण पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था अगले साल 1.5 प्रतिशत बढ़ेगी. पाकिस्तान आईएमएफ से लंबे समय से सहायता पा रहा है. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने 1958 से आईएमएफ का फंड और 22 मौकों पर हासिल किया.

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First published: 18 April 2020, 12:11 IST
 
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