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भारत-फ्रांस के बीच 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा 59000 करोड़ में पक्का

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 September 2016, 14:05 IST
(एएनआई)

भारत और फ्रांस के बीच बहुप्रतीक्षित राफेल विमान डील पर मुहर लग गई है. रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने 36 राफेल विमानों के इस सौदे पर दस्तखत कर दिए हैं. भारत और फ्रांस के बीच तकरीबन 59,000 करोड़ (7.8 अरब यूरो) की डील हुई है.

इस अहम रक्षा सौदे के लिए फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान 22 सितंबर को ही दिल्ली पहुंच गए थे. दो इंजन वाला यह लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना का पसंदीदा है. 

2019 से मिलने लगेंगे विमान

राफेल सौदे को लेकर दोनों देशों के बीच 1999-2000 में बातचीत हुई थी. वायुसेना लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही थी. राफेल सौदे पर दस्तखत होने के बाद 36 महीने के अंदर यानी 2019 में विमान आना शुरू हो जाएंगे. सभी 36 विमान 66 महीने यानी 2022 तक भारत आ जाएंगे.

जानिए कितना अच्छा है राफेल सौदे का विचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेढ़ साल पहले अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान इस डील का एलान किया था. दोनों देशों ने गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील के लिए एक समझौता भी किया था. राफेल लड़ाकू विमानों को फ्रांस की डसाल्ट एविएशन कंपनी बनाती है. 36 विमान सीधे फ्रांस से आएंगे. 

क्यों खास है राफेल?

दरअसल भारतीय वायुसेना की टॉप च्वाइस राफेल कई खूबियों से लैस है. यह हर तरह के मिशन पर जा सकता है. राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन में मार करने में सक्षम है.

राफेल लड़ाकू विमान की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी प्रति घंटा है.चीन के पास भी इसकी टक्कर का कोई विमान नहीं है. यही नहीं यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है. 

मिटीयोर मिसाइल भी होगी हासिल

विमानों की कीमत को लेकर फ्रांस की ओर से जनवरी में बताई गई शुरुआती राशि से मौजूदा कीमत करीब 750 मिलियन यूरो कम है. इस कीमत में राफेल लड़ाकू विमान के साथ ही बेहतर हथियार प्रणाली मसलन मिटीयोर मिसाइल भी हासिल होगी.

बियॉन्‍ड विजुअल रेंज मिसाइल जिसकी क्षमता 150 किलीमीटर है, भी इसके साथ होगी. करगिल युद्ध के दौरान भारतीय लड़ाकू विमानों के पास बियॉन्‍ड विजुअल रेंज वाले मिसाइल तो थे, लेकिन उनकी रेंज 60 किलोमीटर थी.

पाकिस्तान ने भी अब ऐसी मिसाइल हासिल कर ली है जिसकी रेंज 80 किलोमीटर है. यानी मीटियोर के आने से हमारी वायुसेना के मिसाइल पाकिस्तानी वायुसेना के मिसाइल पर काफी भारी पड़ेंगे. 

बिना सरहद लांघे पाक के कई इलाकों में पहुंच

जहाज़ में हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर मिसाइल होने से तिब्बत और पाकिस्तान के कई इलाके बगैर सरहद पार किये भारत की ज़द में आ जाएंगे. राफेल विमान में भारतीय वायुसेना की ज़रूरतों के लिहाज से तक़रीबन एक दर्जन बदलाव भी किए गए हैं.

इतना ही नही इसमें हवा से जमीन में मार करने वाली स्कैल्प मिसाइलें होंगी. इसका निशाना अचूक है यानी इस लड़ाकू विमान के मिसाइल किसी भी आतंकी कैंप को बरबाद करने में सक्षम हैं.

लंबी दूरी की हवा से ज़मीन पर मार करने वाली स्कैल्प मिसाइल का होना भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर एक स्वाभाविक बढ़त देता है.

1600 करोड़ रुपये का एक राफेल

पिछले साल फ्रांस की डसाल्ट एविएशन कंपनी से जब राफेल विमान की कीमत को लेकर बातचीत शुरू की गई, तब उसने 36 राफेल विमानों की कीमत 12 बिलियन यूरो बताई थी.

जनवरी में दोबारा बात होने के बाद सौदा 8.6 बिलियन यूरो पर आकर टिका. अप्रैल में अंतिम दौर की बातचीत होने पर 7.87 बिलियन यूरो में यह सौदा पक्का हो गया.

भारतीय रुपये में यह सौदा करीब 59 हजार करोड़ रुपये बैठता है. इस लिहाज से एक राफेल की कीमत हथियार समेत करीब 1600 करोड़ रुपये पड़ेगी.

First published: 23 September 2016, 14:05 IST
 
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