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पाकिस्तान से बेहतर संबंध की आड़ में ब्रिटेन भारत से छल कर रहा है

विवेक काटजू | Updated on: 7 February 2017, 8:13 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • ब्रिटेन का यह रवैया कि भारत बलूचिस्तान, सिंधु नदी जल संधि और पीओके की बात न करे. यह पाकिस्तान के प्रति उसकी तुष्टिकरण की नीति का ही हिस्सा है. 
  • भारत को ब्रिटेन को यह जता देना चाहिए कि वह भारत-पाक को बराबर करने का जो खेल दशकों से खेलता आ रहा है, अब उसे बंद करे. 

क्या अंग्रेज एक बार फिर से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की आड़ में भारत-पाक को बराबरी पर लाने का चतुराई भरा खेल खेलने की तैयारी कर रहे हैं? पहले भी ब्रिटेन ने कभी पाक प्रायोजित आतंकवाद की निंदा नहीं की. हालांकि उसने मौके-बेमौके यह जरूर माना कि पाकिस्तान के जिहादी गुट ही भारत में आतंक फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं.

दोहरी चाल चलते हुए ब्रिटेन एक तरफ आतंकवाद को विदेश नीति के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए पाक को माफ करता आया है तो दूसरी ओर वह पाक से जिहादी गुटों के कारनामों पर रोक लगाने के लिए भी बहुत ही धीमे स्वर में ‘गुहार’ लगाता है. 

ब्रिटेन की भारत-पाक की ओर यह नई नीति वाया राहुल राय चौधरी सामने आई है. लंदन में रहने वाले राहुल इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के दक्षिण एशियाई कार्यक्रम के प्रमुख हैं. आईआईएसएस और ऐसे ही कुछ अन्य संस्थानों को ब्रिटिश फॉरेन एंड कॉमनवेल्थ ऑफिस (एफसीओ) से फंड मिलता है. एफसीओ ब्रिटेन की चिंताओं और स्थितियों का समाधान करता है. ऐसा करते हुए वह ब्रिटिश सरकार को मौका देता है कि वह वक्तव्यों से दूरी बनाए रखे. ऐसे ही कूटनीतिक व्यवहार तय किया जाता है. 

इस्लामाबाद में प्रस्ताव

13 दिसम्बर को इस्लामाबाद में आयोजित पाकिस्तानी सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटजिक स्टडीज और आईआईएसएस के एक संयुक्त कार्यक्रम में रॉय चौधरी ने एक 8 सूत्री प्रस्ताव रखा. पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार डॉन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार प्रस्ताव में जो सिफारिशें की गई हैं, वे इस प्रकार हैं...

1- संघर्ष विराम के प्रभावी क्रियान्वयन के दावों के सुर को दबाना.

2- मीडिया द्वारा इस बहस पर नियंत्रण की कोशिशों को खत्म करना.

3- मुंबई और पठानकोट के संदिग्धों के खिलाफ चल रही सुनवाई में तेजी लाई जाए और खत्म की जाए.

4- भारत कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही ज्यादतियों पर लगाम लगाए.

5- पाक आतंकरोधी कार्रवाइयों में इजाफा करे.

6- नई दिल्ली द्वारा कश्मीर मसले के हल की मांग के मद्देनजर आपसी वार्ता शुरू की जाए, खास तौर पर गुप्तचर एजेसियों के बीच.

इन बिंदुओं पर गौर करें तो जाहिर है कि ब्रिटेन दोनों देशों के बीच संतुलन साधने का प्रयास कर रहा है ताकि वह दोनों ही देशों से फायदा उठा सके.

ध्यान निजी हितों पर

आतंकवाद से निपटने का जो तरीका इन बिंदुओं में दिखाया गया है, उससे तो लगता है कि ब्रिटेन आतंक के खिलाफ असल समाधान को प्राथमिकता न दे कर, बस अपनी लड़ाई पर ही फोकस करवाना चाहता है. यहां ऐसी कोई मांग नहीं की गई कि पाक अपने इरादों की पूर्ति के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करना बंद करे.

यह कहना कि पाक सारे गुटों के खिलाफ आतंक रोधी कार्रवाई में इजाफा करे और भारत कश्मीर हल की दिशा में आगे बढ़े. बस इस सूची में बिंदुओं की संख्या बढ़ाने के लिए कहा गया है. बल्कि जिस ढंग से ब्रिटेन आतंकवाद से निपटने की बात कर रहा है, उससे लगता है कि जब तक कश्मीर मसला हल नहीं हो जाता आतंकवाद जिंदा रहेगा. देखा जाए तो असल में यह पाक की ही सूची है, जिस पर ब्रिटेन ने राय चौधरी के जरिये मुहर लगा दी है और भारतीय इसे नजरंदाज नहीं कर सकते. 

गौरतलब है कि नब्बे के दशक में पश्चिमी देशों को लगता था कि पाकिस्तानी आतंकवाद केवल कश्मीर समस्या के कारण पनपा है, इसलिए भारत को ही इसे हल करना होगा. वह तो 9/11 के बाद दुनिया को लगा कि आतंकवाद वैश्विक समस्या है. 

राय चौधरी की इस सूची से जाहिर है कि ब्रिटेन के लिए आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष कहीं न कहीं उसके आर्थिक हितों के आगे बौना हो जाता है. 

ब्रिटेन की अपेक्षा

एक और बात यहां तकलीफदेह है कि ब्रिटेन के अनुसार भारत को कश्मीर हल के लिए लगातार गुहार करनी चाहिए, लेकिन ऐसा करने से क्या उरी हमले के जवाब में की गई भारत की सर्जिकल स्ट्राइक का महत्व कम नहीं हो जाएगा? गौरतलब है कि इस पूरी सूची में कहीं उरी और नगरौटा हमले की निंदा नहीं की गई है, यह बात अखरने वाली है. यहां एक संदेह पैदा होता है कि ब्रिटेन कह रहा है कि भारत को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़े. यही बात तो पाकिस्तान कहता आया है!

ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है, क्या तनाव न बढ़ाने की हिदायत भारत को कभी जवाबी कार्रवाई से रोक पाई है? सर्जिकल स्ट्राइक इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है. इसी से ब्रिटेन परेशान है. भारत के लिए ब्रिटेन की इस सोच का खंडन करना जरूरी है. रॉय चौधरी द्वारा गिनाए गए इन बिंदुओं में झलकती ब्रिटेन की मंशा मोदी सरकार के लिए संकेत है कि पाक को अलग-थलग करने की उसकी राह में ब्रिटेन की यह सोच क्या रंग दिखाएगी. 

किसी देश ने उग्रवादी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में फैली अशांति की निंदा नहीं की. ऐसे में भारत को वहां तैनात सुरक्षा बलों को ढील न देने की ब्रिटेन की हिदायत से लगता है कि वह इस पर ही फोकस कर रहा है ताकि वह इस्लामाबाद की नजरों में अच्छा बना रहे. 

साथ ही पठानकोट हमले के संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पाक को कहना भर केवल कुछ दिलासा देता है. लेकिन भारत की जवाबी कार्रवाइयों को लेकर किए जा रहे दावों के स्वर धीमे करने के लिए कहना यह दिखाता है कि भारत बलूचिस्तान, सिंधु नदी जल संधि और पीओके की बात न करे. यह भी पाकिस्तान के प्रति तुष्टिकरण की नीति का ही हिस्सा है. 

भारत को ब्रिटेन को यह जता देना चाहिए कि वह भारत-पाक को बराबर करने का जो खेल दशकों से खेलता आ रहा है, अब उसे बंद करे और पाक समर्थित आतंकवाद पर रोक लगाने पर फोकस करे और उसकी वकालत करना बंद करे.

First published: 19 December 2016, 8:10 IST
 
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