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सुषमा स्वराज की चेतावनी: कुलभूषण जाधव को फांसी हुई तो पाक को नतीजे भुगतने पड़ेंगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 April 2017, 10:18 IST

 

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर कुलभूषण जाधव को फांसी हुई, तो उसे उसके नतीजे भुगतने पडेंग़े. जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्हें पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने ‘जासूसी’ के आरोप में मौत की सजा सुनाई है.


भारत ने पाकिस्तान के फैसले पर प्रहार करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने जाधव को फांसी की सजा सुनाकर न्याय के अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों की अनदेखी की है. भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए आगे कहा कि जाधव को फांसी दी गई, तो इसे पूर्व नियोजित हत्या माना जाएगा.

 

सुषमा का बयान

मंगलवार को राज्य सभा में सुषमा स्वराज ने कहा, 'माननीय उपसभापति महोदय, पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर फांसी की सजा सुनाई है. इस संबंध में मैं सदन के साथ अपने विचार साझा करना चाहती हूं. मैं फिर से कहती हूं कि ये आरोप मनगढ़ंत हैं.


मैं सदन को बताना चाहती हूं कि श्री जाधव ईरान में व्यवसाय कर रहे थे. उनका अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान ले जाया गया. किन स्थितियों में ले गए, कहना मुश्किल है. इस संबंध में दावे से तभी कहा जा सकता है, अगर हम उनका वाणिज्यदूत (कान्सल) से संपर्क करवा सकें. जब से उनके अपहरण की जानकारी मिली है, इस्लामाबाद में हमारे उच्चायोग ने लगातार पाकिस्तान के अधिकारियों पर दबाव डाला है कि वे उन्हें वाणिज्यदूत से संपर्क करने दें.

अंतरराष्ट्रीय नियम के तहत संपर्क करवाया जा सकता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए यह आदर्श भी माना जाता है, फिर भी पाकिस्तान की सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी. इसी से जाहिर है कि श्री जाधव के खिलाफ मामले में कितना दम है. माननीय सदस्यों को याद होगा कि पाकिस्तान के एक वरिष्ठ नेता ने भी इस मामले में पर्याप्त सबूत होने पर संदेह व्यक्त किया था.'


उपसभापति महोदय, साल की शुरुआत में, पाकिस्तान सरकार ने इस संबंध में जांच शुरू करने के लिए सबूत और अन्य सामग्री के लिए हमारा सहयोग मांगा था. इसके लिए उन्होंने भारत के वरिष्ठ अधिकारियों पर बेहूदे आरोप लगाए, जबकि इस मुद्दे में उनका कोई हाथ नहीं था. उसके बदले में उन्होंने वाणिज्यदूत से संपर्क करवाने की बात कही थी. फिर भी इस उम्मीद में कि कुछ कदम उठाए जा सकते हैं, हमारी प्रतिक्रिया तर्कसंगत थी. हमने कहा कि यदि तथ्यों को जांचना है और पाकिस्तान में उनकी मौजूदगी की परिस्थितियों को समझना है, तो जाधव की कान्सुलर पहुंच पहली आवश्यकता है.


सूचनाओं की इस अदला-बदली की मांग के बीच कल बड़ी अजीब घटना हुई. पर्याप्त सबूत मिले नहीं, उससे पहले पाकिस्तान ने श्री जाधव के लिए अचानक फांसी की सजा का ऐलान कर दिया. फैसले को और असंगत बनाने के लिए, फांसी की सजा की घोषणा के 3 घंटे बाद, भारतीय उच्चायोग को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से एक आधिकारिक सूचना मिली. यह सशर्त कान्सुलर पहुंच के लिए पाकिस्तानी प्रस्ताव को बार-बार दुहराने से संबंधित थी. इससे जाहिर है कि कथित कार्यवाही हास्यास्पद है, जिसकी वजह से अपहृत निर्दोष भारतीय के खिलाफ गलत फैसला दिया गया है.


इस मुद्दे पर हमारा पक्ष साफ है. श्री जाधव के कुछ गलत करने का कोई प्रमाण नहीं है. अगर कुछ है, तो वह यह कि वे एक योजना का शिकार हुए हैं. पाकिस्तान भारत पर कलंक लगाना चाहता है ताकि विश्व का ध्यान पाकिस्तान के आतंक को सहयोग और फंड देने की ओर से हट जाए. इन स्थितियों में उस सजा को उनकी पूर्व नियोजित हत्या मानने के सिवाय हमारे पास कोई विकल्प नहीं है.


उपसभापति महोदय, विदेश सचिव ने कल पाकिस्तान के उच्चायोग को हमारा पक्ष बताया. मैं खुलकर बता दूं कि भारत की सरकार और लोग इस बात को बड़ी गंभीरता से लेंगे कि पाकिस्तान में एक निर्दोष भारतीय को मूलभूत नियमों, कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का उल्लंघन करते हुए, न्यायसंगत कार्यवाही के बिना फांसी सुनाई गई है. यदि पाकिस्तान ने उन्हें फांसी दी, तो मैं पाकिस्तान की सरकार को चेतावनी देती हूं कि इससे भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों पर विपरीत असर पड़ेगा.'


उपसभापति महोदय, मैं सदन से यह भी कहना चाहूंगी कि मैं श्री जाधव के माता-पिता के संपर्क में रही हूं. हम इस मुश्किल घड़ी में उन्हें अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं. सदन के अपनेपन से उन्हें इन हालात में हौसला मिलेगा.' 

First published: 12 April 2017, 10:18 IST
 
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