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खुद से लड़ रहा है बांग्लादेश

सादिक़ नक़वी | Updated on: 6 July 2016, 7:58 IST
QUICK PILL
  • बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. हमलावरों में शामिल युवा बांग्लादेश के समृद्ध परिवारों से ताल्लुक रखते हैं. उनका कट्टरपंथ से प्रेरित होना गहरे सामाजिक विभाजन की तरफ इशारा कर रहा है.
  • ढाका में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले में कुल 20 लोग मारे गए थे. इनमें अधिकांश विदेशी नागरिक थे. मरने वालों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है.
  • बांग्लादेश की सरकार ने हालांकि हमले में किसी विदेशी आतंकी के होने की संभावना से इनकार किया है. उनका कहना है कि हमले की योजना घरेलू आतंकी संगठनों ने बनाई थी.

शुक्रवार को ढाका में हुए आतंकी हमले के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. इस हमले में 20 लोग मारे गए थे, जिसमें अधिकांश विदेशी थे.

बांग्लादेशी समाचारपत्रों के मुताबिक अधिकारी उनके आतंकी होने को लेकर जांच कर रहे हैं. साथ ही इस हमले बांग्लादेश सरकार के आतंकवाद से निपटने की क्षमता पर सवालिया निशान उठा दिए हैं. अंसार उल इस्लाम के ट्वीटर हैंडल ने गुलशन हमले की पहले ही चेतावनी दी थी. यहां तक कि भारत ने भी इस तरह की चेतावनी जारी की थी. अंसार उल इस्लाम दक्षिण एशियाई अल कायदा का सहयोगी संगठन है.

हालांकि अभी तक हमलावारों की सही संख्या के बारे में पता नहीं लग पाया है. हालांकि साइट इंस्टीट्यूट ने हमलावारों के आईएस से संबंध होने और उनकी तस्वीरों को पता लगाया है. पुलिस ने इन पांच हमलावरों की तस्वीर जारी कर दी है. पांचों के नाम बिकास, रिपन डॉन, आकाश और बंधन हैं.

ढाका के लोग इस वजह से सदमे में हैं कि पहले तीनों नाम बेहतर पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं और उनकी स्कूलिंग और कॉलेज की पढ़ाई बड़े और महंगे संस्थानों में हुई है. हमलावरों की पृष्ठभूमि पहले ही संकट से जूझ रहे बांग्लादेशी समाज में तेजी से मजबूत हो रहे चरमपंथ की तरफ इशारा कर रही है.

भाड़े के सैनिक

निबरास इस्लाम की उम्र 22 साल है और इसे हमले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. इस्लाम की पढ़ाई तुर्किश होप हाई स्कूल में हुई थी और यह आगे की पढ़ाई के लिए मलेशिया चला गया. उसके बाद ढाका लौटने के दौरान इस्लाम गायब हो गया था. बाद में उसने अपना नामांकन नॉर्थ साउथ यूनिवर्सिटी में कराया.

रोहन, इम्तियाज खान बाबुल का बेटा है जो सत्ताधारी अवामी लगी के सदस्य हैं और बांग्लादेश ओलंपिक एसोसिएशन के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल हैं. बाबुल ने इस साल जनवरी में इम्तियाज के गायब होने की शिकायत कराई थी. इम्तियाज भी मोनाश गया था. ढाका में उसकी पढ़ाई जिस स्कूल में हुई उसकी मासिक फीस 200 डॉलर प्रति महीने है. इम्तियाज की मां इसी स्कूल में पढ़ाती हैं. 

मीर समी मुबाशेर इम्यिाज का साथी है. यह दोनोें भी फरवरी में गायब हो गए थे. बिकास और बंधन उत्तरी बांग्लादेश से आते हैं. बिकास को लेकर मिल रही जानकारी अभी तक स्पष्ट नहीं है लेकिन बंधन के परिवार वालों ने पुलिस की तरफ से जारी तस्वीर में उसे पहचान लिया है.

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक  बंधन एक मजदूर का बेटा है. वह पिछले एक साल से गायब था. दूसरे व्यक्ति की पहचान सैफुजरहमान के तौर पर हुई थी. उसके परिवार वालों ने पुलिस के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि वह बेकरी में शेफ था और मिनी पिज्जा बनाने के लिए मशहूर था.

सातवें संदिग्ध सौरव के बारे में कम जानकारी है. बांग्लादेशी पुलिस ने इसे मौके से गिरफ्तार किया था. उसे रेस्टारेंट में बेहद गंभीर हालत में गिरफ्तार किया गया था.

इस बीच सुरक्षा बल हसनत करीम से पूछताछ कर रही है जो पहले साउथ नॉर्थ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे. करीम चरपमंथी संगठन हिज्ब उत तहरीर के साथ कथित तौर पर जुड़े होने की वजह से 2012 में सुर्खियों में आए थे. करीम हमले के दौरान अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट में थे और कुछ वीडियो में वह हमला कर रहे आतंकियों से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं.

बाहरी कनेक्शन

सुरक्षा एजेंसियां का दावा है कि पांच हमलावर जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश से जुड़े थे. कुछ रिपेार्ट्स की माने तो हमला जेएमबी और अंसार उल इस्लाम की संयुक्त कोशिशों का नतीजा था. इनमें से कुछ हमलावर हुसैन अली एक मंदिर पर हमला करने के भी आरोपी हैं.

गृह मंत्री का कहना है कि ढाका में हुए हमला पूरी तरह से देसी आतंकी संगठनों की साजिश है. उन्होंने हमलावरों की समृद्ध पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि अब आतंकी बनना फैशन हो गया है. उन्होंने कहा कि देश में विदेशी आतंकी संगठन मौजूद नहीं है. सत्ताधारी आवामी लीग का दावा है कि हमला जमात ए इस्लाम की छात्र ईकाई के कुछ सदस्यों ने कराया.

खान का यह कहना कि हमलावर देसी थे, सच हो सकता है लेकिन उनके विदेशी आतंकी संगठनों से संबंध होने को नहीं नकारा जा सकता. वास्तव में 100 से अधिक बांग्लादेशी युवा आईएस के लिए लड़ने वास्ते मध्य पूर्व के देशों में जा चुके हैं.

बांग्लादेश के सूचना एंव प्रसारण मंत्री हसनुल हक इनू ने हमले में पाकिस्तान के आईएसआई को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा, 'आईएसआई का जमात ए इस्लामी के सशस्त्र दस्ते के साथ संबंध रहा है. हाल ही में कुछ राजनयिकों को ढाका के दूतावास से बाहर कर दिया है. उन पर हथियार तस्करी के आरोप थे.'

2014 के बाद से ढाका के पाकिस्तानी दूतावास में काम कर रहे दो अधिकारियों को पाकिस्तान भेजा गया था क्योंकि उन  पर जेएमबी को फंड देने का आरोप था. इस्लामाबाद ने हालांकि इस हमले में आईएसआई के हाथ होने की संभावना से इनकार किया है.

ढाका में हुए हमला भारत के लिए खतरे की घंटी है. बीएसएफ को हाई अलर्ट पर रखा गया है. रविवार को जारी बयान में दक्षिण एशियाई अल कायदा के प्रमुख ने भारतीय मुसलमानों से भारतीय सिविल सर्विस के अधिकारियों पर हमला करने की अपील की है.

बांग्लादेश में हुआ हमला अचानक नहीं है. बांग्लादेश में कट्टरता तेजी से बढ़ी है. 2013 के बाद से देश पूरी तरह से विभाजित होे चुका है. 2013 में देश में अब्दुल कादिर मुल्लाह को मिले आजीवन कारावास को लेकर भारी आंदोलन हुआ था. आंदोलनकारियों का मानना था कि मुल्लाह को कम सजा मिली है. 1971 के युद्ध के दौरान मुल्ला को मीरपुर नरसंहार का दोषी करार दिया गया है.

मुल्ला को हालांकि मौत की सजा के बदले आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. इसके बदले मेंं हिफाज ए इस्लाम ने रैली निकालकर शाहबाग आंदोलनकारियों को फांसी दिए जाने की मांग की थी. 2014 में बीएनपी के चुनाव का बहिष्कार किए जाने के बाद यह विभाजन और अधिक गहरा हुआ है. बीएनपी के सहयोगी जेईआई को प्रतिबंधित किया जा चुका है. जेईआई के कई सदस्यों को युद्ध अपराध की वजह से फांसी पर चढ़ाया जा चुका है.

2013 के आंदोलन के बाद करीब 50 ब्लॉगर, बुद्धिजीवी और धार्मिक अल्पसंख्यकों की हत्या की जा चुकी है. आने वाले दिनों में इस विभाजन के खत्म होने की संभावना भी नहीं के बराबर है. ढाका में मौजूद कई बुद्धिजीवियों ने कैच को बताया कि देश में बढ़ रही कट्टरता को रोकने की बजाए विपक्ष को दोष देने से आने वाले दिनों में ऐसी वारदातें बढ़ेंगी, जिसे बांग्लादेश सहन नहीं कर सकता.

First published: 6 July 2016, 7:58 IST
 
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