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उलझती जा रही है ढाका हमले की गुत्थी

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 July 2016, 12:42 IST

ईद से पहले शुक्रवार को ढाका में होली आर्टिजन बेकरी में हुए हमले का रहस्य और गहरा गया है. जाकिर हुसैन शान की मौत से सवाल उठ रहे हैं कि इस हमले में हमलावर और उनके साथियों की संख्या कितनी थी, जबकि ईद पर ही बांग्लादेश में एक और हमला हुआ. 

पुलिस का दावा है कि गुलशन हमले के हमलावर और शोलकिया में ईद की नमाज के लिए इकठ्ठा हुई भीड़ पर हमला करने के आरोपी एक दूसरे को जानते थे.

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शान को पुलिस ने आतंकी कार्रवाई के दौरान आधी रात को गुलशन बेकरी के पास से जख्मी हालत में गिरफ्तार किया था. सुरक्षा बलों का मानना है संदिग्ध जाकिर इस हमले में शामिल था. उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी हालत सुधर रही थी. 

सुरक्षा एजेंसियों कहना है कि वे इस मामले में उसका बयान दर्ज करने का इंतजार कर रहे थे. लेकिन वह कोई बयान देता इससे पहले ही ढाका मेडिकल काॅलेज हाॅस्पिटल में उसकी मृत्यु हो गई.

उसके परिजनों का दावा है कि वह बेकरी में काम करता था और पुलिस उसे परेशान कर रही थी. उसने शुक्रवार को ही हमें फोन किया था. वह खुश था और बता रहा था कि उसे ईद पर बोनस मिला है. परिवार का कहना है कि उसका किसी आतंकी गुट से कोई संबंध नहीं था. 

दूसरे हमलावर हमले के बाद गायब हो गए और अपने परिजनों पर दबाव डाला कि वे उनके बारे में पूछे जाने पर यही कहें कि वे लापता है, लेकिन जाकिर शान अपने परिवार के सम्पर्क में था.

पुलिस का दावा

यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि शान हमले में घायल हुआ है या सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े जाने के दौरान, क्योंकि बेकरी को चारों ओर से घेरने के बाद बीस मिनट के भीतर ही हमलावरों ने ज्यादातर लोगों को मार गिराया था. 

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हमले में मारे गए बेकरी कर्मचारियों में शान दूसरा था. इससे पहले बेकरी में शेफ रहा सैफुल इस्लाम चौकीदार सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई में मारा गया था

सुरक्षा एजेंसियों ने हमले के बाद अलसुबह छापेमारी की कार्रवाई में उन छह लोगों को मार गिराया था, जिन पर हमले में शामिल होने का संदेह था. बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों ने उसका रिकाॅर्ड भी खंगाला था. हालांकि जब यह पता चला कि वह बेकरी में शेफ था तो सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि वह आपसी गोलीबारी में गलती से मारा गया होगा.

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आतंकवादरोधी शाखा के प्रमुख मुनीरुल इस्लाम ने पलटते हुए कहा कि वह हमलावरों में से ही एक था और जब हमलावर गोलियां चलाते हुए बच कर भाग निकलना चाहते थे, तब वह उनके साथ था. हमले के बाद एक जुलाई को इस्लाम ने यह भी कहा था कि बेकरी में काम करने वाले दो और संदिग्धों का अस्पताल में इलाज चल रहा था.

यह बात समझ से परे है कि सुरक्षा एजेंसियों ने घेराबंदी खत्म होने के बाद जिस एक हमलावर को पकड़ने का दावा किया था उसकी पहचान के बारे में अब तक कोई खुलासा क्यों नहीं किया है.

प्रोफेसर और छात्र

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ढाका हमले में स्थानीय गुट जमायते मुजाहिदीन बांग्लादेश का हाथ था. सुरक्षा अधिकारियों ने घेराबंदी के दौरान रेस्टोरेंट में मौजूद दो और संदिग्धों को पकड़ा है, एक है हसनत करीम जो कि उत्तर-दक्षिण विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहा है और दूसरा है तहमीद हसीब खान जो कि टोरंटो विश्वविद्यालय का छात्र है. वह हमले से ठीक एक दिन पहले ढाका पहुंचा था.

इन दोनों से ही सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूछताछ जारी है. रिपोर्टों के अनुसार हमले की रात होली आर्टिजन बेकरी के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वे हमलावरों से काफी घुल-मिल रहे हैं.

खुद से लड़ रहा है बांग्लादेश

अजीब संयोग है कि शोकालिया में ईद की नमाज पर हमले के दौरान मारा गया युवा हमलावर अबिर रहमान भी उत्तर-दक्षिण विश्वविद्यालय में बीबीए का छात्र था. इसी प्रकार होली आर्टिजन बेकरी पर हमले में मारा गया एक हमलावर निब्रास इस्लाम भी इसी उत्तर दक्षिण विश्वविद्यालय में पढ़ा है.

यह निजी संस्थान उस वक्त सुर्खियों में था जब इसने अपने कुछ प्राचार्यों को नौकरी से निकाल दिया था जिनका संबंध आतंकी गुट हिजबुत तहरीर से था, जो कि 2012 में एक हमला करने में विफल रहा था.

इस्लामिक स्टेट या स्थानीय

वर्ष 2013 में जब शाहबाग का विरोध जारी था, राजिब हैदर नाम के एक ब्लाॅगर की ढाका में हत्या कर दी गई थी. मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था. ये सभी उत्तर-दक्षिण विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों के छात्र थे. 

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जांच में पाया गया कि वे दक्षिण एशिया के अलकायदा से जुड़े एक आतंकी संगठन अंसार-अल-इस्लाम के एक नेता जसीमुद्दीन रहमानी से प्रभावित थे. रहमानी ने अपने धर्मोपदेश में उक्त ब्लाॅगर को जान से मारने की बात कही थी.

बांग्लादेश की होली आर्टिजन बेकरी पर हुए हमले की जिम्मेदारी आतंकी गुट आईएसआईएस ने ली है. आईएस धीरे-धीरे भारत और बांग्लादेश में भी पांव पसार रहा है. हमले के बाद आईएस ने हमलावरों के फोटो भी जारी किए.

जबकि ढाका की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से कह रही हैं कि बांग्लादेश में होने वाले ज्यादातर हमले जेएमबी या अंसर उल इस्लाम जैसे स्थानीय गुटों का ही काम है. इन संगठनों ने शाहबाग हमले के बाद बांग्लादेश से उन सब लोगों का सफाया करने का बीड़ा उठाया है, जो जाहिर तौर पर एक धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश की मांग कर रहे हैं.

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इन एजेंसियों का मानना है कि गुलशन में हुआ हमला स्थानीय गुटों का काम है, न कि विदेशी आईएसआईएस का. जबकि कई विश्लेषकों का मानना है कि आईएस और हमले कर सकता है. आखिर आईएस ने इंटरनेट के जरिये दुनिया भर के युवाओं को प्रभावित किया है.

इस बीच, आईएसआईएस ने एक और वीडियो जारी कर तीन बांग्लादेशियों को दिखाते हुए दावा किया है कि ये रक्का, सीरिया में हैं. गुट ने और आतंकी हमलों की बात कही है. वीडियो में दिखाई दे रहा एक शख्स तहमीद रहमान है जो 2015 में गायब हो गया था.

First published: 12 July 2016, 12:42 IST
 
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