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क्या ट्रम्प की जीत में रूस का हाथ था? सीआईए कुछ ऐसा ही सोचती है

साहिल भल्ला | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
QUICK PILL
  • अमेरिका की सेंट्रल ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने तमाम एजेंसियों से जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर सनसनीख़ेज़ खुलासा किया है. 
  • सीआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस साल हुए अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में रूस ने डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने में मदद की है. 
  • वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि ये आरोप उन्हीं लोगों की तरफ़ से आया है जिन्होंने कहा था कि ईराक़ के पास विनाशकारी हथियार हैं. 

अमेरिका की सेन्ट्रल इंटलिजेंस एजेन्सी (सीआईए) ने दावा किया है कि रूस ने साल 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में दखलंदाजी की थी. इस दखलंदाजी से रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प को अमरीका का अगला राष्ट्रपति बनने में मदद मिली. दि वाशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक सीआईए अपने 'गोपनीय आकलन' में इस नतीजे पर पहुंची है. 

सीआईए ने बंद कमरे में कुछ 'कुछ महत्वपूर्ण सीनेटर्स' के साथ अपने हाल के इस आकलन को साझा किया है. सीआईए ने पिछले सप्ताह कैपिटल हिल में एक सीक्रेट मीटिंग में यह जानकारी साझा की थी. एजेन्सी ने यह जानकारी विभिन्न खुफिया सूत्रों के जरिए जुटाई. रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेन्सी ने ट्रम्प की मदद करने वाले जिन लोगों की पहचान की है, वे सभी रूसी सरकार के सम्पर्क में थे. इन लोगों ने विकीलीक्स (खुफिया सूचनाएं, न्यूज लीक्स  और अज्ञात स्रोतों के जरिए जानकारियां प्रकाशित करने वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन) को वे हजारों ई-मेल उपलब्ध कराए जो डेमोक्रेटिक नेशनल कॉमेटी और अन्य से हैक किए गए थे. 

इनमें से कुछ ई-मेल हिलेरी क्लिंटन के अभियान के चेयरमैन जॉन पोडेस्टा के भी हैक किए गए थे. इनमें से कुछ अधिकारियों से रूसी अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ लिया है. विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे ने रूस के साथ किसी तरह के सम्बंध होने से इनकार किया है. उन्होंने एक टीवी साक्षात्कार में कहा है कि उनके स्रोत का रूसी सरकार से कोई लेना-देना नहीं है.

न्यूयार्क टाइम्स का दावा

न्यूयार्क टाइम्स की खबर के मुताबिक रूस ने रिपब्लिकन नेशनल कॉमेटी के कम्प्य़ूटर सिस्टम को भी हैक कर लिया था लेकिन उन्होंने रिपब्लिकन नेटवर्क्स से जो जानकारियां हासिल कीं, उसे जारी नहीं किया.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, जिन्होंने एफबीआई की एक जांच के बारे में ब्रीफ किया हुआ है, कहते हैं कि रिपब्लिकन कमेटी के सिस्टम को समझ पाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी थी. कोई नहीं जानता कि रिपब्लिकन कमेटी से कितनी फाइलें चुराई गईं थीं. ये साइबर हमले बसन्त के मौसम में हुए थे.

सितम्बर में, अमरीकी खुफिया और लॉ इन्फोर्समेन्ट एजेन्सियों को जांच के दौरान पता चला था कि रूसी सहयोग से अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप किया जा रहा है और डेमोक्रेटिक पार्टी के चुनावी अभियान पर अटैक कर उन्हें नुकसान पहुंचाया जा रहा है. अब हमें यह जानकारी हो गई है कि वे एक कदम और आगे बढ़ गए थे. अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या ट्रम्प ने यह चुनावी रूसी हस्तक्षेप के बिना जीता है.

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने, सीनेटरों के साथ एक गोपनीय बैठक में जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह खुफिया संगठनों का आकलन है कि रूस का उद्देश्य एक प्रत्याशी की मदद करना था ताकि ट्रम्प को जिताने में मदद की जा सके. यह अपने से मिलते-जुलते विचारों का नतीजा था.

महीनों से ओबामा प्रशासन इस उधेड़बुन में था कि रूस के अनुचित हस्तक्षेप का कैसे जवाब दिया जाए. व्हाइट हाउस के कुछ अधिकारियों ने आपस में बैठकर इस बात पर चर्चा की थी कि उनके प्रतिउत्तर से रूस के साथ तनाव में इजाफा तो नहीं हो जाएगा. एजेन्सी के अधिकारियों को व्लादिमिर पुतिन और उनके सहयोगियों से भी 'विश्वसनीय जानकारी' जुटाने में काफी अड़चनों, समस्याओं का सामना कर पड़ रहा था.  

कोई भी इन करीबी सम्बंधों को काफी स्पष्टता से आपस में जोड़ सकता है. रूस का हस्तक्षेप ट्रम्प की आश्चर्यजनक जीत में किसी वैधानिकता का भी सवाल नहीं खड़ा करता है.

अमरीकी सीनेट के बहुमत के नेता मिच मैक्कॉनेल ने गत सितम्बर में कांग्रेस नेताओं के साथ एक गोपनीय मुलाकात में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस बारे में अपना संदेह भी व्यक्त किया था. अक्टूबर में खुफिया समुदाय ने मास्को को 'आधिकारिक रूप से' दोषी ठहरा दिया कि वह चुनाव में दखलंदाजी कर रहा है.

पिछला शुक्रवार

अब चुनाव हो गए हैं. स्थितियां बदल गईं हैं. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2016 के चुनावी अभियान के दौरान हुए साइबर हमलों के मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. दरअसल, सात डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने पिछले सप्ताह हैकिंग मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को सार्वजनिक किए जाने की राष्ट्रपति से मांग की थी.

ओबामा चाहते हैं कि इस 'लेशन लर्न्ड' रिपोर्ट की जांच 20 जनवरी से पहले हो जाए. 20 जनवरी को ट्रम्प प्रशासन को कार्यभार संभालना है. पदमुक्त होने से पहले ओबामा को यह रिपोर्ट मिल जाने की उम्मीद है. अधिकारियों के अनुसार निवर्तमान होने जा रहे राष्ट्रीय खुफिया एजेन्सी के डायरेक्टर जेम्स क्लेपर के नेतृत्व में इस रिपोर्ट पर रिव्यू होगा.    

'ट्रम्प का इनकार

उधर, ट्रम्प और उनकी टीम चुनाव के दौरान रूस से किसी भी तरह की मदद मिलने के आरोपों से इनकार कर चुकी है. ट्रम्प ने रूसी हैकिंग के सभी खुलासों को खारिज करते हुए कहा है कि आरोप लगाने वाले वे ही लोग हैं जिन्होंने कभी कहा था कि सद्दाम हुसैन के पास भारी विध्वंस करने वाले घातक हथियार हैं. अब चुनाव खत्म हो चुके हैं. यह जीत इतिहास में सबसे बड़ी चुनावी जीत है. अब वक्त आ गया है कि 'हम अमरीका को फिर महान बनाएं.'

ट्रम्प ने टाइम मैग्जीन से बातचीत में कहा था कि मैं नहीं मानता कि उन्होंने दखलंदाजी की है. यह रूस हो सकता है. यह चीन हो सकता है. और कुछ लोग अपने घर न्यू जर्सी में भी हो सकते हैं. इसके आगे, ट्रम्प की टीम ने, एक बयान में कहा है कि ये वे ही लोग हैं जिन्होंने कहा था कि सद्दाम हुसैन के पास विनाशकारी हथियार हैं.

डेमोक्रेट्स इस मामले पर चाहते हैं कि द्विदलीय (दोनों दलों द्वारा समर्थित) जांच आयोग बने, ठीक उसी तरह से, जिस तरह से 9/11  के लिए आयोग बना था. लेकिन खत्म हुए इस शुक्रवार तक उन्हें कांग्रेस के रिपब्लिकन्स का बहुत ज्यादा समर्थन नहीं मिल सका था. 

वहीं शिकागो ट्रिब्यून में एरॉन ब्लेक ने लिखा है कि बुधवार को सीनेटर लिंड्से ग्राहम, आरएससी ने जांच के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है. और अब सीनेट आर्म्ड सर्विसेज के कमेटी के चेयरमैन जॉन मैक्कन ने कहा है कि वह सीनेट इंटेलीजेन्स कॉमेटी के चेयरमैन रिचर्ड बर्र के साथ इस मामले पर काम कर रहे हैं.

अमरीकी कांग्रेस के एलीजाह कम्मिंग्स और एरिक स्वालवेल ने बुधवार को रूसी हस्तेक्षप की स्वतंत्र जांच आयोग की मांग वाला विधयेक पेश किया है. कम्मिंग्स ने पत्रकारों से कहा है कि यह द्विदलीय आयोग हमारे चुनाव को प्रभावित करने वाली रूसी कोशिशों और हमारे लोकतंत्र पर हमले की स्वतंत्र जांच करेगा. भविष्य के लिए यह मार्गदर्शिका भी तैयार करेगा. हम अपने लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था में अमरीकियों के विश्वास की एकता को कायम रखेंगे.

ग्राहम को यह कहते हुए रेखांकित किया गया है कि मैं मानता हूं कि उन्होंने हमारे चुनावों को प्रभावित किया. वे उन देशों में से एक हैं जो वैश्विक पटल पर अपने प्रभावों से सर्वाधिक अस्थिरता उत्पन्न करते हैं. और मैं चाहता हूं कि पुतिन (रूसी राष्ट्रपति) व्यक्तित रूप से इसकी कीमत अदा करें.

अभी यह देखा जाना बाकी है कि इनमें से कोई अधिकारी इस्तीफा देगा या नहीं/ अभियोग लगाया जा सकेगा या नहीं. और यह भी देखा जाना बाकी है कि आरोप साबित हों. डोनाल्ड ट्रम्प के लिए भविष्य में इसके मायने क्या होंगे. यह तो समय ही बताएगा.

First published: 12 December 2016, 8:00 IST
 
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