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अमेरिका के साथ ही सिंगापुर में भी भारतीयों की नौकरी पर मंडराया खतरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 April 2017, 18:29 IST

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के नए कदम से H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीयों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अब स्पष्ट रूप से कह दिया है H-1B वीजा के दुरुपयोग से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे. यह नई व्यवस्था अमेरीकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा ने लागू की है. अब इस नई सेवा के अंतर्गत किसी सामान्य कंप्यूटर प्रोग्रामर को विशेषज्ञ पेशेवर नहीं माना जाएगा.

वीजा को लेकर की गई यह ताजा व्यवस्था अमेरिका द्वारा डेढ़ दशक पहले जारी दिशानिर्देशों के ठीक विपरीत है. इन्हें नई सहस्राब्दी की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से अमेरिका द्वारा जारी किया गया था.

अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) ने 31 मार्च को एक ज्ञापन जारी करके यह स्प्ष्ट किया है कि अब कौन सी चीजें विशिष्ट पेशे के लिए जरूरी हैं. यूएससीआईएस ने कहा कि प्रवेश के स्तर वाले कंप्यूटर प्रोग्रामर अब सामान्य तौर पर विशिष्ट पेशे में स्थान नहीं पा सकेंगे.

अमेरिकी प्रशासन के इस नए कदम का असर एक अक्तूबर 2017 से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष के लिए H-1B वर्क वीजा के लिए आवेदन करने वाले हजारों भारतीयों पर पड़ने की संभावना है. इसके लिए प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है.

 

यूएससीआईएस पॉलिसी मेमोरेंडम में कहा गया है कि एक व्यक्ति कंप्यूटर प्रोग्रामर के तौर पर कार्यरत हो सकता है. वह सूचना तकनीक कौशल और ज्ञान का इस्तेमाल किसी कंपनी को उसके लक्ष्य को हासिल कराने के लिए कर सकता है. लेकिन उसकी नौकरी उसको विशिष्ट पेश के लिए स्थापित कराने के लिए पर्याप्त नहीं है.

यूएससीआईएस ने तर्क दिया कि पुराना मेमोरेंडम ऑक्यूपेशनल आउटलुक हैंडबुक के 1998-1999 और 2000-01 संस्करणों पर आधारित है, जो कि अब अप्रचलित हो गया है.

अभी भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरीकी वीजा प्रतिबंधों ने गति भी नहीं पकड़ी है कि सिंगापुर भी उसी राह चल पड़ा है. सिंगापुर में भी भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए वीजा सीमित करते हुए वहां की भारतीय आईटी कंपनियों पर स्थानीय लोगों को ही रोजगार देने का दबाव बनाया जा रहा है. ऐसे में, भारत की कई नामी आईटी कंपनियां किसी और देश में ठौर तलाशने लगी हैं.

सिंगापुर का यह कदम भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए नया संकट बनकर सामने आया है. सिंगापुर पिछले कुछ वर्षों में आईटी क्षेत्र में जिस तरह बड़ा किंगमेकर बनकर उभरा है, ऐसे में उसकी कुछ महत्वाकांक्षाओं का उभरना अप्रत्याशित नहीं है. लेकिन सिंगापुर को नहीं भूलना चाहिए कि एक तो वह अमेरिका नहीं है.

दूसरे, उसके यहां काम करने वाले भारतीय आईटी विशेषज्ञों जैसी योग्यता ढूंढ़ना उसके लिए खासा मुश्किल साबित होने वाला होगा. इतना ही नहीं, उसका आर्थिक ढांचा भी काफी कुछ भारत के साथ व्यापार पर निर्भर है और यदि भारत ने सिंगापुर से सामान आयात-निर्यात पर कमी की या रोक लगाई या शर्तें बदलीं, तो उसे खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

First published: 4 April 2017, 18:29 IST
 
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