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डॉनल्ड ट्रंप के झूठ बड़े-बड़ों को मात देते हैं

साहिल भल्ला | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति पद के आधिकारिक उम्मीदवार न केवल नफरत के पात्र हैं बल्कि वह बहुत बड़े झूठे भी हैं.
  • अपने भाषण में उन्होंने जिस तरह से अमेरिका की विदेश नीति, रोजगार और आंतरिक समस्याओं को गिनाते हुए आंकड़े और तथ्य पेश किए, वह न केवल गुमराह करने वाले थे बल्कि उनका संबंध भी पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति जार्ज बुश की गलत नीतियों से था.

ब्लादिमीर पुतिन जहां कहीं भी होंगे, मुस्कुरा रहे होंगे. डॉनल्ड ट्रंप के स्वीकार्य भाषण के बाद पुतिन दुनिया में सबसे अधिक भाग्यशाली होंगे क्योंकि अब वह दुनिया में सबसे अधिक नफरत किए जाने वाले नेता नहीं रहे. यह खिताब अब डॉनल्ड ट्रंप को जाता है.

ट्रंप न केवल नफरत के पात्र हैं बल्कि वह बहुत बड़े झूठे भी हैं. कल अमेरिका के स्थानीय समय के मुताबिक उनका भाषण रात साढ़े दस बजे शुरू हुआ.

शुरुआती अंश

ट्रंप ने कहा, 'हमारा सम्मेलन ऐसे वक्त में शुरू हो रहा है जब हमारा देश संकट में है.' ट्रंप ने कहा, 'हमारी पुलिस पर हमला और शहरों में आतंकवाद की वजह से हमारी जिंदगी पर खतरा है. कोेई नेता अगर इस खतरे को समझ नहीं पा रहा है तो वह देश को नेतृत्व देने में सक्षम नहीं है.'

यह अब तक का ट्रंप का सबसे आक्रामक भाषण रहा. उन्होंने जोर देकर अमेरिका को महान बनाने की अपील की. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के दरवाजे बाहरी लोगों के लिए बंद कर देने चाहिए. उन्होंने कहा, 'अमेरिकी इस भाषण को देख रहे हैं. उन्होंने हाल ही में हमारी गलियों में हुई हिंसा को देखा है. कई लोगों का हिंसा से निजी साबका रहा है. कुछ लोग इसके पीड़ित भी रहे हैं.

ट्रंप ने कहा, 'मेरे पास आप सभी के लिए संदेश है. अपराध और हिंसा से घिरा हुआ हमारा शहर जल्द ही इन सबसे मुक्त होगा. 20 जनवरी 2017 से सुरक्षा सबसे ऊपरी एजेंडे पर होगी.' हां, हम 20 जनवरी का इंतजार कर रहे हैं. जब डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति होंगे और सुरक्षा अपने आप आ जाएगी.

अपराध और हिंसा

ट्रंप ने कहा, 'दशकों के प्रयास के बाद अपराध की दर में गिरावट आई थी लेकिन अब यह बढ़ रहा है. अमेरिका के 50 बड़े शहरों में आत्मघाती हमलों में 17 फीसदी गिरावट आई है. यह पिछले 25 सालों में सबसे बड़ी गिरावट है.'

डॉनल्ड ट्रंप भीड़ को यह यकीन दिलाने में सफल रहे कि अमेरिका 'अपराध और हिंसा' की वजह से टूटने के कगार पर खड़ा है. उन्होंने यह कहा कि इस स्थिति से अगर कोई अमेरिका को बचा सकता है वह डॉनल्ड ट्रंप खुद हैं और वह यह काम राष्ट्रपति बनकर सकते हैं.

डॉनल्ड ट्रंप की अपराध आधारित राजनीति के दो अहम आधार है. पहला रिचर्ड निक्सन का मशहूर प्रचार अभियान है जिसमें उन्होंने कानून और व्यवस्था का मुद्दा उठाया था और दूसरा न्यूयॉर्क की राजनीति ने 80 और 90 के दशक में रुडी जियूलानी की मदद की.

हम सभी जानते हैं कि 1991 के हिंसक दौर के बाद अपराध में गिरावट आई है. साथ ही हत्याओं में भी कमी आई है. इसलिए जब ट्रंप यह कहते हैं, 'अमेरिका के 50 बड़े शहरों में इंसानी हत्याओं में पिछले साल 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह 25 सालों में सबसे अधिक है. हमारेे देश की राजधानी में हत्याओं में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पड़ोसी इलाके बाल्टीमोर में यह करीबब 60 फीसदी अधिक है.' तो वह एक हद तक ही सही बोल रहे होते हैं.

फीसदी में हुई बढ़ोतरी बेशक बड़ी है लेकिन ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले साल अपराध की संख्या बेहद कम थी.

अप्रवासी

ट्रंप ने अपने भाषण में अप्रवासियों के मुद्दे पर जमकर हमला बोला. यह ट्रंप के अब तक के प्रचार का सबसे मजबूत स्तंभ रहा है. उन्होंने कहा, 'आपराधिक रिकॉर्ड वाले करीब 180,000 अवैध प्रवासियों को हमारे देश से बाहर भेजा गया है. वह अभी भी हमारे बीच घूम रहे हैं जिससे शांतिपसंद नागरिकों को खतरा पैदा हो रहा है.'

ट्रंप हो सकता है कि सही हों लेकिन एक जगह वह गलत हैं. 180,000 बड़ी संख्या है और यह कहना कि इनमें से सभी शांतिप्रिय नागरिकों के लिए खतरा हैं, संदेह के घेरे में है. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ऐसी गप्पबाजी की हो.

उन्होंने कहा, 'इस साल जितने लोगों ने अमेरिका में प्रवेश किया है, उनकी संख्या 2015 में आए अप्रवासियों से भी ज्यादा है. उन्हें हजारों की संख्या में हमारे लोगों के बीच भेजा जा रहा है. उन्हें हमारी सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है.'

यहां यह जानना जरूरी है कि ट्रंप कैलेंडर ईयर की नहीं बल्कि फाइनैंशियल ईयर की बात कर रहे हैं.

अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा, 'हमारी अर्थव्यवस्था के बारे में क्या ख्याल है? मैं एक बार फिर से आपको तथ्य बताना चाहता हूं जिसे अखबारों से गायब कर दिया जाता है.' उन्होंने कहा, 'करीब 1.4 करोड़ लोग काम छोड़ चुके हैं.' यह तथ्य पूरी तरह से गलत है. 2009 के बाद काम करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है न कि उसमें गिरावट आई है.

वॉक्स के मुताबिक, 'जनवरी 2008 में अमेरिका में 15.4 करोड़ लोग रोजगार में थे. पिछले महीने आया आंकड़ा बताता है कि फिलहाल वहां 15.89 करोड़ लोग रोजगार में है. करीब 50 लाख लोगों को नौकरी मिली है.'

ट्रंप जो बता रहे हैं, वह लेबर डिपार्टमेंट के आकलन के तरीकों से जुड़ा है. ओबामा के ऑफिस में आने के बाद अमेरिकी जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है और बड़ी संख्या में लोग रिटायर हुए हैं. डिग्री मिलने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. 

ट्रंप जहां सही हो सकते हैं, वह श्रम शक्ति में भागीदारी का है. यह नौकरी वाले लोगों की भागीदारी और नौकरी खोज रहे लोगों की संख्या है. इस संख्या में गिरावट आई है और यह 65.7 फीसदी से कम होकर 62.7 फीसदी रह गया है.

आईएसआईएस और ईरान

ट्रंप ने कहा, '2009 में आईएसआईएस नक्शे पर भी नहीं था. लीबिया स्थिर था. मिस्र में शांति थी. इराक में हिंसा में कमी आई थी. ईरान प्रतिबंध से परेशान था. सीरिया भी बहुत हद तक नियंत्रण में था.' लेकिन 'ओबामा के चार साल बाद हमारे पास क्या है? आईएसआईएस पूरे क्षेत्र और दुनिया में फैल चुका है. लीबिया बर्बाद हो चुका है और हमारे दूतावास के अधिकारी और कर्मचारी मरने के लिए छोड़े जा चुके हैंं. मिस्र की कमान मुस्लिम ब्रदरहुड के हाथों में चली गई और फिर सेना को मजबूरन कमान संभालनी पड़ी. सीरिया में गृह युद्ध छिड़ा हुआ है और ईरान परमाणु हथियार बनाने के कगार पर खड़ा है. पश्चिम को शरणार्थियों का संकट सता रहा है. मध्य पूर्व में करीब 15 सालों की लड़ाई पर खरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं और हजारों लोगों की जान जा चुकी है. इससे पहलेे कभी स्थिति इतनी बुरी नहीं थी.'

आईएसआईएस की जड़ों को 2004 में खोजा जा सकता है जब यह इराक के अल कायदा से निकला. उस वक्त ओबामा न तो राष्ट्रपति थे और नहीं क्लिंटन विदेश मंत्री. उस वक्त रिपब्लिकन जॉर्ज बुश राष्ट्रपति थे. इसालिए वह सही हो सकते हैं कि 2009 के आस पास आईएस नक्शे पर नहीं था लेकिन निश्चित तौर पर उसकी मौजूदगी थी. मध्य पूर्व में फैली हिंसा के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. आईएस 2013 के बाद से अपने नाम के साथ सामने आया.

'ईरान समझौते से ईरान को 150 अरब डॉलर मिला लेकिन हमें कुछ नहीं मिला. यह इतिहास में सबसे बुरे समझौते के तौर पर याद किया जाएगा.'

ट्रंप इस आंकड़े को लेकर गलतबयानी कर रहे हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के जब्त किए गए संपत्ति की कीमत करीब 100 अरब डॉलर थी और इसका अधिकांश हिस्सा कर्ज से जुुड़ा था. न कि इस संपत्ति की कीमत 150 अरब डॉलर थी.

First published: 23 July 2016, 8:23 IST
 
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